पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • डेढ़ महीने से लगा रहा शिकायतों का अंबार, प्रशासन ने न ध्यान दिया न पड़ताल करवाई

डेढ़ महीने से लगा रहा शिकायतों का अंबार, प्रशासन ने न ध्यान दिया न पड़ताल करवाई

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
बिलासपुर। पंचायत चुनाव निपट गया, लेकिन इस बीच शिकायतों का अंबार लगा रहा। प्रशासन ने ज्यादातर शिकायतों पर न ध्यान दिया और न ही इनकी पड़ताल करवाई। अधिकारी चुनाव निपटाने में ही लगे रहे। स्थानीय अधिकारियों के साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग के आला अफसराें तक भी शिकायत पहुंची पर इसे अनसुनी कर दिया गया। अब प्रशासन इन शिकायतों की जांच करवाने के मूड में नहीं दिख रहा है।

4 जनवरी को निकाय चुनाव के नतीजे घोषित होने के तत्काल बाद प्रशासन पंचायत चुनाव की तैयारियों में जुट गया। 645 ग्राम पंचायतों में पंच-सरपंच के साथ ही सात जनपद पंचायतों में सदस्य व जिला पंचायत की 25 सीटों के लिए सदस्य का चुनाव करवाया था। इसका दायित्व स्थानीय निर्वाचन पर था। इधर, अधिसूचना जारी होने के बाद तैयारियां तेज हुई और उधर ग्रामीण राजनीति में भी उबाल आ गया है। पहली शिकायत 6 जनवरी को बिल्हा विधायक सियाराम कौशिक ने की।
उन्होंने उनके गांव परसदा के 562 मतदाताओं के नाम सूची से गायब किए जाने की शिकायत जिला निर्वाचन अधिकारी से की। तहसीलदार युगल किशोर उर्वशा पर गड़बड़ी का आरोप लगाया। प्रशासन ने तहसीलदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की पर शिकायत सही थी इसलिए 24 घंटे के अंदर मतदाताओं के नाम सूची में जोड़ दिए। इसके बाद ग्रामीण रोज शिकायत करने लगे। कोटा इलाके के ग्रामीणों ने आर्थिक अनियमितता करने वाले पंचायत प्रतिनिधियों को इस बार चुनाव नहीं लड़ने देने की मांग की। ग्राम पंचायत बिल्ली बंद के सरपंच सूर्यभान सिंह तंवर की पत्नी योगिता सिंह के चुनाव लड़ने पर ग्रामीणों ने आपत्ति जताते हुए ज्ञापन सौंपा। ऐसे दर्जनभर पंचायत प्रतिनिधियों की सूची भी कलेक्टर को दी। कलेक्टर ने जांच का आश्वासन तो दिया, लेकिन इसके बाद कुछ नहीं किया।
गौरेला, पेंड्रा के इलाके में तीन-चार दिन बाद भी प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह नहीं देने की शिकायत मिली तो प्रशासन ने इस मामले में चुप्पी साध ली। जाहिर है, समय पर चुनाव चिन्ह नहीं दे पाना प्रशासन की ही चूक थी। चुनाव ग्रामीण इलाकों में थे लेकिन जिला मुख्यालय में शिकायतकर्ताओं की भीड़ जुटती रही। ज्ञापन लेकर अधिकारी उन्हें जांच व कार्रवाई की बात कहकर चलता करते रहे और ऐसे-तैसे चुनाव निपट गया। फिर चुनाव खर्च को लेकर भी शिकायत मिली। प्रत्याशियों पर मतदाताओं को लुभाने के लिए पायल, बिछिया, चांदी के सिक्के बांटने के आरोप लगे। चुनाव के दौरान पीठासीन अधिकारियों पर एक पक्ष को सपोर्ट कर जिताने का भी आरोप लगा।
बैनर-पोस्टर छपवाने के बाद बदल दिया चुनाव चिन्ह
शहर से लगी देवरीखुर्द पंचायत के पंच प्रत्याशी के. प्रसाद राव, के. भानू और नूतन सोनी चुनाव चिन्ह मिलने के बाद बैनर-पोस्टर छपवाने के साथ ही प्रचार में जुट गए थे। अचानक चुनाव के चार-पांच दिन पहले उन्हें बताया गया कि उनका चिन्ह बदल गया है। वे बौखला गए। शिकायत की, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
चांदी के सिक्के बंटे, फर्जी वोटिंग भी हुई
शहर से लगी उसलापुर ग्राम पंचायत में 4 फरवरी को वोटिंग थी। ग्रामीणों ने सरपंच प्रत्याशी पर शहर के वार्ड नंबर तीन के रहवासियों के नाम पंचायत की मतदाता सूची में जुड़वाने और उनसे वोटिंग करवाने का आरोप लगाया। मतदाताओं को लुभाने के लिए लक्ष्मी व श्री गणेश छाप वाले चांदी के सिक्के बांटने की शिकायत हुई। सिक्कों की फोटो देकर नतीजे घोषित न करने की मांग की। पर प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया।
ड़बड़ी के आरोप लगे तो मौके पर करवाई जांच
बिल्हा की कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी उषा भारद्वाज 25 वोटों से भाजपा की प्रतिमा कौशिक से हार गई। उषा ने टेबुलेशन के दौरान ही तहसीलदार व एसडीएम पर कूटरचना कर हराने का आरोप लगाया। उनका आरोप था कि उसे कोरमी बूथ में 153 वोट मिले थे, लेकिन उसे बदलकर 37 कर दिया गया। बोड़सरा में 233 वोट मिले थे और उसे 203 बना दिया गया। कलेक्टर ने मौके पर ही मामले की जांच करवाई। जांचकर्ता अधिकारियों ने शिकायत को गलत बताया, पर जांच करने वाले वही अधिकारी थे, जिन पर आरोप लगाया गया था।