बिलासपुर / रतनपुर. शहर और गांवों का स्वरूप ही नहीं वहां रहने वालों की सोच भी बदल रही है। नतीजतन, युवा वर्ग को नेतृत्व का जिम्मा दिया जा रहा है। खासतौर पर आधी आबादी यानी महिलाओं को झंडाबरदार बनने, निर्णायक भूमिका निभाने के सुनहरे मौके हासिल हो रहे हैं। हमारे शहर से 30 किमी दूर रतनपुर के लोहार की नि:शक्त बेटी को ही लीजिए, लोगों ने उन्हें रतनपुर नगर पालिका अध्यक्ष बना दिया। इसी तरह मेलनाडीह पंचायत में पूरे गांव ने पढ़ी-लिखी युवती को बगैर चुनाव के ही अपना मुखिया चुन लिया।
कुछ ऐसा ही चौंकाने वाला परिणाम आया मस्तूरी जनपद पंचायत से। यहां महज 23 वर्ष की राजेश्वरी सारथी ने जनपद सदस्य क्रमांक 14 रिसदा से सदस्य का चुनाव जीत लिया।
नगर पंचायत से नगर पालिका परिषद् बने रतनपुर के महामायापारा में रहने वाले आनंदराम सूर्यवंशी को अभी भी यकीन नहीं हो रहा है कि उनकी बेटी पूर्व अध्यक्ष को हराकर नगर पालिका अध्यक्ष बन गई है। यकीन भी आखिर कैसे हो, सूर्यवंशी परिवार पीढ़ियों से लोहारी व बढ़ईगीरी कर गुजर-बसर करता आ रहा है। कभी राजनीति में आने के बारे में सोचने की फुर्सत ही नहीं मिली। लेकिन 27 साल की बेटी आशा ने हिम्मत दिखाई और मिथक तोड़ दिया। बकौल आशा, उसे खुद कई बार भ्रष्ट शासन-प्रशासन की तस्वीर देखने को मिली।
इसी से दु:खी होकर राजनीति में आई। आशा के पिता आनंद अपने भाई संतोष और अशोक के साथ लोहारी का काम करते हैं। रतनपुर और उसके आस-पास के गांवों के लोग बैलगाड़ियों के चक्के का पट्टा चढ़वाने उनके पास आते हैं। आनंद के पिता गोविंद और उसके दादा नकछेद भी यही काम करते थे। इधर, रतनपुर इलाके के मेलनाडीह की शारदा गढ़ेवाल की कहानी आशा से कुछ अलग है। शिक्षक पिता भरतलाल की असमय मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई। उसने शादी करने के बजाय गांव की सेवा का निर्णय लिया। वह खुद सिलाई-बुनाई का काम करती है और गांव की अन्य महिलाओं को आगे आने के लिए प्रेरित भी।
पहली बार स्वतंत्र पंचायत का दर्जा मिला तो ग्रामीणों ने चुनाव के एक महीने पहले अपनी सरकार चुन ली। पंच तो निर्विरोध निर्वाचित हुए ही गांव की पढ़ी-लिखी शारदा गढ़ेवाल को आपसी सहमति से सरपंच निर्वाचित कर लिया। शारदा, उसके लिए पहले यकीन करना मुश्किल था, लेकिन जब ग्रामीणों ने भरोसा जताया है तो वह वहीं करेगी जो गांव के लिए सही होगा।
23 की राजेश्वरी बनी जनपद सदस्य
महज 23 वर्ष की राजेश्वरी सारथी ने मस्तूरी जनपद सदस्य क्रमांक 14 रिसदा से सदस्य का चुनाव जीतकर सभी को चौका दिया है। मस्तूरी सरपंच चमरू सारथी की बेटी राजेश्वरी ने बीए तक की पढ़ाई की है। 25 सदस्यों की टीम में उसे सबसे कम उम्र का सदस्य बताया जा रहा है।
राजेश्वरी के राजनीति में आने का निर्णय उनके पिता चमरू ने लिया। रिसदा सीट एससी महिला के लिए आरक्षित हुआ तो चमरू ने राजेश्वरी को मैदान में उतारा। राजेश्वरी कहती है कि मस्तूरी इलाका पिछड़ा हुआ है और महिलाओं की स्थिति चिंताजनक है। पांच सालों में उनकी कोशिश रहेगी कि वह महिलाओं के हित के लिए अधिक से अधिक कार्य करे।
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