बिलासपुर. बच्चों की उच्च शिक्षा, परिजन के इलाज या फिर नशे की लत के चलते सूदखोरों से कर्ज लेने के बाद परेशान होकर नौकरी छोड़ चुके बिलासपुर जोन के कर्मचारियों की मदद के लिए रेलवे प्रबंधन ने पहल शुरू की है। इसके लिए 23 अधिकारियों और रेलवे श्रमिक संगठन के सदस्यों की मदद ली जा रही है। ऐसे कर्मियों की तलाश कर उन्हें नशे और कर्ज से मुक्ति दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
टीम ने साढ़े तीन सौ कर्मचारियों को चिह्नांकित कर लिया है। इनमें सबसे अधिक ग्रुप डी के हैं। अफसर और यूनियनों के सदस्य लगातार इनकी खोजबीन में जुटे हुए हैं। जैसे ही किसी का पता चलता है, उससे संपर्क कर रेलवे प्रबंधन की पहल के बारे में बताया जाता है, फिर उनकी काउंसिलिंग की जाती है।
जब कर्मचारी मानसिक रूप से तैयार हो जाते हैं, तब उन्हें नौकरी शुरू करने के लिए कहा जाता है। वहीं नशे के आदी कर्मचारियों के परिवार और करीबी लोगों से संपर्क किया जाता है। शराब छुड़वाने के लिए 12 कर्मचारियों का रेलवे अस्पताल में इलाज करवाया जा रहा है।
छह महीने में निजात दिलवाने का दावा
रेल प्रबंधन का दावा है कि वे समस्या से छह महीने में निजात पा लेंगे। इसके लिए रेल प्रबंधन द्वारा गठित कमेटी कर्मचारियों को कर्ज देने वालों से बात कर रास्ता निकालने का प्रयास करेगी। ऐसे कर्मचारियों को अग्रिम राशि दी जाएगी ताकि वे कर्ज चुका सकें। वहीं नशेड़ियों की लत छुड़वाने के लिए रेलवे अस्पताल में उनका इलाज करवाया जाएगा।
तनख्वाह चली जाती है ब्याज में
कोरबा में पदस्थ लिपिक एसके मनीष ने छह महीने पहले मां के इलाज के लिए एक प्राइवेट लाइसेंसधारी से ऊंची ब्याज दर पर कर्ज लिया। इलाज के दौरान खर्च बढ़ता ही गया जिससे मनीष को आैर कर्ज लेना पड़ा। इलाज हो गया लेकिन हर महीने उनका पूरा वेतन ब्याज में चला जाता है। जब घर चलाने में दिक्कत आने लगी तो मनीष डिप्रेशन में चले गए। नौकरी पर जाना छोड़ दिया। ऐसे में यूनियन के कर्मचारियों ने उनसे संपर्क किया। समस्या दूर करने के लिए कारगर कदम उठाए। कोशिश है कि वेतन का कुछ पैसा अग्रिम देकर सूदखोर का हिसाब चुकता कर दिया जाए।
उधार देने वाले ने ले लिया एटीएम कार्ड
बिलासपुर की लोको काॅलोनी में रहने वाले ग्रुप डी कर्मचारी गोकुलराम केवर ने नशे की लत के चलते बुधवारी बाजार के एक दुकानदार से साढ़े तीन लाख रुपए उधार लिए। कर्ज देने वाले ने उसका एटीएम कार्ड अपने पास रख लिया। हर महीने वेतन आने पर दुकानदार पूरा पैसा निकाल लेता है। तनख्वाह ब्याज में चली जाती है। इसके चलते परिवार का खर्च नहीं चल पाता, पत्नी-बच्चे परेशान रहने लगे हैं। मजबूरन परिवार के सदस्यों को कामकाज कर पेट पालना पड़ रहा है।
पुख्ता व्यवस्था कर रहे
रेलवे ने नशे और कर्ज के कारण अपने परिवार से भटके लोगों को उबारने की पहल शुरू की है। इसमें कुछ सीनियर अफसर और कर्मचारी यूनियनों के पदाधिकारियों के नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है। रेलवे का कामकाज पटरी पर लाने के लिए भी ये बेहद जरूरी है। इसकी पुख्ता व्यवस्था की जा रही है, कि आगे से कोई इस तरह के चक्रव्यूह में न फंसे।'' - नवीन कुमार सिंह, सीनियर डीसीएम