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निकाय चुनाव : वार्डों का भविष्य तय होते ही शुरू हुई 'टिकट-परिक्रमा'

7 वर्ष पहले
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बिलासपुर. 55 से बढ़कर 66 वार्डों वाली हो चुकी न्यायधानी के नगर निगम के वार्डों का आरक्षण सोमवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में भारी गहमागहमी भरे माहौल में हुआ। ढाई घंटे की जद्दोजहद के बाद नए आरक्षण में निगम के सभापति, नेता प्रतिपक्ष, पूर्व मेयर समेत कई पुराने पार्षदों के वार्ड पराए हो गए। स्टेटस बदल जाने से अब इन्हें दूसरे वार्डों में जोर-आजमाइश करनी पड़ेगी या फिर परिवार के सदस्यों को चुनाव मैदान में उतारना पड़ेगा। इस बार नगर निगम में कुल 22 महिलाएं पार्षद चुनकर आएंगी।

वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया बिलासपुर नगर निगम से कलेक्टर सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, एडिशनल कलेक्टर नीलकंठ टेकाम की उपस्थिति में नगर निगम कमिश्नर रानू साहू ने पूरी करवाई। आरक्षण के लिए वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाया गया। संबंधित वार्ड से मौजूद पार्षद व नागरिकों से चिट निकलवाकर घोषणा की गई। शहर के 66 में से 22 वार्डों में महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिलेगा।

इनके वार्ड बचे

निगम के उपनेता ओमप्रकाश देवांगन, पूर्व मेयर विनोद सोनी, राममनोहर सोनी, बबलू पमनानी, रमेश जायसवाल, राजेश शुक्ला, शहजादी कुरैशी, विष्णु यादव, संतोष साहू, राजेश मिश्रा, जितेंद्र राय, उमेशचंद्र कुमार आदि के वार्ड आरक्षण में अनुकूल रहे। चुनाव के रास्ते में इनके लिए आरक्षण की बाधा नहीं है।

घोषणा के साथ बदलती रही पार्षदों की भाव-भंगिमाएं

आरक्षण की चिट निकलते ही पार्षदों के चेहरों की भाव-भंगिमाएं बदलती रहीं। जिनके वार्ड आरक्षित हो गए, वे निराश रहे। जिन्हें मनमाफिक आरक्षण मिला, वे प्रसन्न मुद्रा में लोगों से कुछ इस अंदाज में मिलते रहे, मानों पहली फतह हासिल कर ली हो। पार्षद पद के चुनाव से पहले आरक्षण की पहली बाधा दूर हो गई है। इसके साथ ही उम्मीदवारों ने वार्डों में जनसंपर्क और टिकट के लिए जोर-आजमाइश शुरू कर दी।

आरक्षण ने बदली तस्वीर: कहीं पतियों तो कहीं पत्नियों को मिलेगा मौका

वार्डों के आरक्षण के बाद निगम चुनाव की तस्वीर उभरने लगी है। सभापति अशोक विधानी का वार्ड हेमूनगर परिसीमन के बाद दो हिस्सों में बंट गया है। इसमें से एक पिछड़े वर्ग की महिला के लिए आरक्षित होने से उनका रास्ता बंद हो गया। दूसरे सामान्य हुए वार्ड से उनकी दावेदारी के लिए रास्ता खुल गया। पत्नी के पिछड़े वर्ग से होने के कारण अब पति-पत्नी दोनों अगल-बगल के वार्ड से चुनाव लड़ सकेंगे।
इसी तरह एमआईसी मेंबर राखी घोष का वार्ड सामान्य होने के बाद उनके पति लाल्टू घोष खुद चुनाव लड़ सकेंगे। पिछले चुनाव में उनका वार्ड महिला घोषित होने से वे वंचित रह गए थे। सबसे अजीब स्थिति विनोबा नगर वार्ड की पार्षद सीमा सिंह के साथ बनी। उनका वार्ड दो भागों में बंटने के बाद दोनों पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित हो गए। पूर्व में महिला सीट होने से पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष रहे रविंद्र सिंह को पत्नी सीमा सिंह को चुनाव लड़वाना पड़ा था।
किस वर्ग को मिले कितने वार्ड

अनुसूचित जाति मुक्त 5
अनुसूचित जाति महिला 3
अनुसूचित जनजाति मुक्त 2
अनुसूचित जनजाति महिला 1
पिछड़ा वर्ग मुक्त 11
पिछड़ा वर्ग महिला 6
अनारक्षित मुक्त 26
अनारक्षित महिला 12
कई के वार्ड पराए, कुछ के बच गए
वार्डों के आरक्षण में सभापति अशोक विधानी का वार्ड पिछड़े वर्ग की महिला के लिए आरक्षित हो गया। हालांकि नए वार्ड में उन्हें जोर आजमाने का मौका है, क्योंकि एक वार्ड सामान्य घोषित हुआ है। इसी तरह नेता प्रतिपक्ष महेश चंद्रिकापुरे, भाजपा पार्षद स्नेहलता शर्मा, वी. रामाराव, सुरेश वाधवानी, अनुज टंडन, लक्ष्मीनारायण कश्यप, कांग्रेस की पार्षद सीमा सिंह, रविंद्र सिंह, राजा शर्मा, एमआईसी मेंबर एलएन राव, भास्कर यादव, संजय यादव, रीता गुलहरे के वार्ड पराए हो गए। वार्ड-14 विनोबा नगर (परिवर्तित वार्ड 17 व 18) से रविंद्र सिंह चुनाव लड़ते रहे थे, लेकिन इस बार दोनों वार्ड पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित हो गए। पिछले चुनाव में इनका विनोबा नगर वार्ड महिला घोषित होने पर उन्होंने पत्नी सीमा सिंह को चुनाव लड़वाया था। नए आरक्षण में अब दोनों अपने वार्डों से चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।
तखतपुर से एक भी एसटी सीट नहीं
तखतपुर नगर पालिका के 15 वार्डों में एक भी वार्ड एसटी के खाते में नहीं आया। यहां पांच वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हुए। इनमें एक एससी वार्ड भी शामिल है।
एक नजर इधर भी...
- महिला वार्डों के आरक्षण के लिए महिलाओं से ही लाॅटरी निकलवाई गई।
- कलेक्टोरेट के मंथन सभाकक्ष में एसी चालू नहीं था, गर्मी से लोगों की हालत पस्त रही।
- आरक्षण कई अधिकारी-कर्मचारियों के लिए नया था, इसलिए वे भी परेशान हुए।
- कई लोगों को खाना नहीं मिला। इन्होंने होटलों में नाश्ता कर काम चलाया। शोर इतना था कि कलेक्टर को अपील करनी पड़ रही थी।
- आरक्षण की घोषणा होने के साथ ही एक-दूसरे पर छींटाकशी का दौर शुरू हो गया।
- बदइंतजामी पर कलेक्टर ने मातहतों के प्रति नाराजगी जताई।