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सभी को एक ही डर, पराया न हो जाए अपना वार्ड

7 वर्ष पहले
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बिलासपुर. जिले में नगरीय निकाय चुनाव की सियासी सरगर्मियां तेज हैं। मौजूदा पार्षद और इस पद के दावेदार फिक्रमंद हैं कि उनकी टकटकी जिस वार्ड पर है, उसका आरक्षण न बदल जाए। नगर निगम के 66 वार्डों के अलावा जिले की 12 नगर पंचायतों का आरक्षण भी इसी दौरान पूरा होगा। इसके बाद तय होगा कि पार्षद पद के सैकड़ों दावेदारों का ऊंट किस करवट बैठेगा। बिलासपुर मेयर का पद पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हो चुका है। अब वार्डों की तस्वीर तय होने के बाद टिकटों के लिए घमासान छिड़ने की आशंका है। कोई खुद के लिए तो कोई पत्नी, रिश्तेदारों के टिकट के लिए परिक्रमा में जुट जाएगा।

नगर निगम के वार्डों के परिसीमन के बाद वार्डों की संख्या 55 से बढ़ाकर 66 कर दी गई है। जाहिर है कि पार्षद बनने लालायित उम्मीदवारों को इस बार क्षेत्र तलाशने के लिए 11 अतिरिक्त वार्ड मिलेंगे। दरअसल, पार्षद पद के दावेदारों की असली चिंता उनके कार्यक्षेत्र या निवास वाले वार्ड के अनुकूल आरक्षण को लेकर है।

मौजूदा पार्षदों को अपने वार्ड में दोबारा दावेदारी का अवसर तभी मिलेगा, जब उनके वार्ड का स्टेटस आरक्षण के बाद नहीं बदलेगा। स्टेटस बदलने पर पार्षदों को दूसरे वार्ड की तलाश करनी होगी। इसी तरह महिला के लिए वार्ड का आरक्षण होने पर हर बार की तरह पुरुष पार्षदों को पत्नी या परिवार की महिला सदस्यों को चुनाव मैदान में उतारना पड़ेगा।
नए वार्डों का आरक्षण चक्रवार नहीं होगा
वार्डों के परिसीमन से इस साल जिन 22 वार्डों के स्वरूप में परिवर्तन हुआ है, उनके आरक्षण के लिए मौजूदा नियम के अवरोही (चक्रानुसार) क्रम को नहीं अपनाया जाएगा। बाकी 44 वार्डों में आरक्षण की प्रक्रिया चक्रवार ही होगी। इसके मुताबिक महिलाओं के लिए वार्डों का आरक्षण 44 पुराने वार्डों में से किया जाएगा। आरक्षण की प्रक्रिया कलेक्टर सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, एडिशनल कलेक्टर नीलकंठ टेकाम, एसडीएम क्यूए खान, निगम कमिश्नर रानू साहू, डिप्टी कमिश्नर हिमांशु तिवारी के अलावा नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में पूरी होगी। नगर निगम के वार्डों के बाद जिले की नगर पंचायतों के वार्डों का आरक्षण होगा। सभी निकायों के अफसरों व ब्लॉकों के एसडीएम को भी मौजूद रहने के लिए कहा गया है।
तीन नई नगर पालिकाओं में भी चुने जाएंगे अध्यक्ष, पार्षद
शासन ने नगर पंचायत तिफरा के अलावा तखतपुर और रतनपुर को नगर पालिका परिषद का दर्जा दिया है। इनमें भी नगर पालिका अध्यक्ष और पार्षदों का चुनाव होगा। 22 सितंबर को इन नए निकायों के लिए आरक्षण होगा। इनके अलावा जिले की नगर पंचायतों गौरेला, पेंड्रा, मरवाही, सकरी, बिल्हा, बोदरी, मल्हार, सिरगिट्‌टी के लिए आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
ऐसे होगा एमआईसी में वार्डों का बंटवारा
नगर निगम में वार्डों की संख्या 66 होने पर पिछले सालों की तुलना में आरक्षित वर्ग को इस बार और अधिक वार्ड चुनावी जोर-आजमाइश के लिए मिलेंगे। दिसंबर में खत्म हो रही निगम की मौजूदा परिषद में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण के हिसाब से 19 वार्ड मिले थे, जो इस बार बढ़कर 22 हो जाएंगे। इसी तरह एससी के खाते में आठ और एसटी के खाते में तीन वार्ड जाएंगे। ओबीसी के लिए फाॅर्मूला है कि एससी, एसटी की जनसंख्या 50 फीसदी से कम होने पर ओबीसी के लिए 25 फीसदी वार्ड आरक्षित किए जाएंगे।
फाॅर्मूले के आधार पर लाॅटरी
नगर पालिक निगम अधिनियम में वार्डों के आरक्षण के लिए फाॅर्मूला निर्धारित है। आरक्षण की प्रक्रिया लाॅटरी निकालकर की जाएगी। फाॅर्मूले के मुताबिक महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण सभी 66 वार्डों में से होगा। इसी तरह ओबीसी के लिए वार्डों का आरक्षण एससी, एसटी के लिए आरक्षित वार्डों को छोड़कर चिट निकाली जाएगी। ओबीसी के लिए नए आरक्षण से पहले मौजूदा परिषद में इस वर्ग के लिए आरक्षित वार्डों को लाॅटरी से अलग कर चिट निकाली जाएगी। यही प्रक्रिया महिलाओं के लिए वार्डों का आरक्षण करने से पहले वर्ष 2004 या वर्ष 2009 में आरक्षित महिलाओं के वार्डों को लाॅटरी से अलगकर चिट निकाली जाएगी।