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1 करोड़ का भवन बेकार, कच्चे कमरों में हो रही है क्लास

8 वर्ष पहले
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बिलासपुर. स्कूल परिसर में हॉल सहित 26 कमरों की दो बिल्डिंग तैयार है, लेकिन हाई व हायर सेकेंडरी स्कूल तक की क्लास मिडिल स्कूल के जर्जर भवन में लग रही है। जगह की कमी ऐसी कि छात्रों को डेस्क के बजाय जमीन पर बिठाया जा रहा है। प्रशासनिक मशीनरी की विफलता और पढ़ने वालों की पीड़ा को बयां करने वाला यह दृश्य बालक हायर सेकेंडरी स्कूल चकरभाठा का है। दैनिक भास्कर ने स्कूल का दौरा कर इस अव्यवस्था को समझने की कोशिश की।
शहर से लगी नगर पंचायत बोदरी के शहरी क्षेत्र की पहचान चकरभाठा के तौर पर है। यह आसपास के 55 गांवों के लिए व्यापारिक व शिक्षा का भी केंद्र है। दर्जनभर गांवों के बच्चे चकरभाठा के स्कूल में पढ़ाई करते हैं। ठीक इसके विपरीत प्रशासनिक मशीनरी की विफलता से सरकारी स्कूल में भवन जैसी प्राथमिक जरूरतें भी पूरी नहीं हो रही हैं।
ऐसा नहीं है कि बालक हायर सेकेंडरी स्कूल चकरभाठा को भवन की सुविधा नहीं दी गई हो। स्कूल परिसर में लोक निर्माण विभाग ने लगभग 55 लाख रुपए की लागत से 16 कमरों का हाईस्कूल भवन तैयार किया है। इसी के बगल में ग्रामीण यांत्रिकी विभाग ने 45 लाख की लागत से एक हॉल सहित 9 कमरों वाली बिल्डिंग का निर्माण किया है।
इसे अनेक प्रकार के अतिरिक्त कक्ष के तौर पर जाना जाता है। स्कूल परिसर में 1 करोड़ रुपए की लागत से दो भवन तैयार हैं। बालक हायर सेकेंडरी की 9 वीं से 12 वीं तक की कक्षा में 1 हजार से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं। इनकी कक्षाएं मिडिल स्कूल के भवन में लगाई जा रही हैं। यह भवन 1977 का है, लिहाजा भवन की स्थिति भी उतनी ही खराब है। शाला प्रबंधन की मजबूरी है कि वह जीर्ण-शीर्ण भवन में क्लास लगाए।
बिल्डिंग में शिफ्टिंग क्यों नहीं
नई बिल्डिंग को लेकर शिक्षा विभाग और निर्माण एजेंसियों के बीच विवाद छिड़ा हुआ है। विवाद का कारण जिला प्रशासन की लचरता है। इस समस्या को बिल्डिंग-वार समझा जा सकता है। आरईएस ने 1 हॉल और 9 कमरों वाली बिल्डिंग को तैयार कर लिया है। आरईएस को सिविल वर्क का ही आर्डर मिला। प्रशासन ने बिजली की व्यवस्था दी ही नहीं, आखिरकार अफसरों के दबाव में आरईएस ने बिजली की व्यवस्था कर दी।
अब भवन में शौचालय की दरकार है। जिला प्रशासन ने शौचालय निर्माण की जिम्मेदारी पीएचई को सौंप दी है। यही हाल पीडब्ल्यूडी द्वारा बनाए गए भवन का है। 16 कमरों का भवन तैयार है। यहां बिजली और पानी की सुविधा नहीं है। बिजली लगाना पीडब्ल्यूडी तो पानी के लिए बोर उपलब्ध कराना पीएचई की जिम्मेदारी है।
पीडब्ल्यूडी बिजली फीट कराने में जुटा है, लेकिन पानी की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। साफ है कि पीएचई के चलते दोनों भवनों में असुविधा है। यही कारण है कि प्रिंसिपल भवन का कब्जा लेने से कतरा रहीं हैं। प्रिंसिपल आर राहा ने बताया कि भवन पानी, बिजली, शौचालय जैसी प्राथमिक जरूरतों का अभाव है। इसकी पूर्ति बगैर भवन का कब्जा कैसे हासिल किया जा सकता है। बहरहाल विभागों की रस्साकशी का खामियाजा पढ़ने वाले हजार छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।