बिलासपुर. भवनों के पार्किंग स्पेस पर बिजनेस कर रहे व्यापारियों को नगर निगम की कार्रवाई इतनी नागवार गुजरी कि वे निगम के बिल्डिंग ऑफिसर व अमले से मार-पीट और हुज्जतबाजी पर आमादा हो गए। तेलीपारा में अवैध निर्माण पर शंकर हार्डवेयर एंड प्लायवुड नामक दुकान को सील करने के दौरान व्यापारी निगम के अमले से भिड़ गए।
अतिक्रमण उन्मूलन दस्ते के प्रभारी प्रमिल शर्मा अौर कर्मचारियों के काॅलर पकड़े तो दोनों ओर से झूमा-झटकी, धक्का-मुक्की और फिर देखते ही देखते मार-पीट होने लगी। निगम अमले ने जवाबी कार्रवाई की। व्यापारियों की जुटती भीड़ देख कोतवाली से पुलिस बुलवाई। व्यापारियों ने बिल्डिंग अफसर वीके खेत्रपाल को रोककर दुकान सील करने की जानकारी नहीं देने पर एतराज जताया और चाबी मांगी। पुलिस बल के पहुंचने पर मामला शांत हुआ।
आम लोगों को ट्रैफिक की परेशानियों से राहत दिलाने और अवैध निर्माण के मामलों में दुकान, काॅम्प्लेक्स के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई का गुरुवार को तीसरा दिन था। एक काॅम्प्लेक्स और एक दुकान सील करने के बाद निगम अमले ने दोपहर करीब 2.15 बजे तेलीपारा रोड के शंकर हार्डवेयर को सील किया।
सीलिंग के दौरान दुकान संचालक प्रणय जुनेजा ने विरोध किया, लेकिन अमले ने कार्रवाई पूरी की। सीलिंग के बाद निगम अमला लौटने लगा, तब जुनेजा समेत कुछ व्यापारियों ने प्रमिल शर्मा और असिस्टेंट इंजीनियर गोपाल सिंह ठाकुर को घेरकर तीखे लहजे में पूछा कि सीलिंग की कार्रवाई किसके कहने पर की जा रही है? सील करने के पहले जानकारी क्यों नहीं दी गई। इसके बाद सील की गई दुकान की चाबी लौटाने के लिए झूमा-झटकी हुई।
अमले के प्रभारी प्रमिल शर्मा और निगम कर्मचारियों की काॅलर पकड़ने और धक्का-मुक्की को लेकर विवाद बढ़ा। इसके बाद निगम अमले और व्यापारियों के बीच मार-पीट होने लगी। अमले ने बचाव में जवाबी कार्रवाई की। व्यापारियों के विरोध के चलते अमला कोतवाली थाने जा पहुंचा।
अधिकारियों को घेरा, जब्त सामान काऊकैचर से उतारकर सड़क पर फेंका व्यापारियों ने पहले निगम अमले के प्रभारी प्रमिल शर्मा, फिर एई गोपाल सिंह ठाकुर को घेरा। निगमकर्मी जोर आजमाइश कर उन्हें छुड़ा ले गए तो बिल्डिंग अफसर वीके खेत्रपाल को उनकी कार के पास जा घेरा। बीच बचाव के लिए बाजार विभाग के प्रभारी अनिल सिंह और प्रभारी सब इंजीनियर सौमित्र पहुंचे। कुछ देर में एक के बाद एक सिविल लाइन टीआई सुरेश ध्रुव व कोतवाली टीआई आशीष अरोरा वहां पहुंचे और स्थिति संभाली। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद खेत्रपाल निगम लौटे। व्यापारियों की भीड़ ने सामान जब्त कर ले जा रहे निगम के काऊकैचर को रोक लिया।
ड्राइवर को धमकी देकर ड्राइविंग सीट से नीचे उतारा। इसके बाद भीड़ ने सड़क किनारे अवैध रूप से दुकान लगाने वालों से जब्त टेबल, होर्डिंग व अन्य सामान को उतारकर सड़क पर फेंकना शुरू कर दिया। एक व्यापारी ने यह कहकर लोगों को रोका कि उन पर सामान चोरी करने की रिपोर्ट लिखवाई जा सकती है। इसके बाद सड़क पर फेंका गया सामान वापस लोड कर दिया गया।
अवैध निर्माण के मामले में दो दुकानें, एक काॅम्प्लेक्स सील, कार्रवाई रोकने आते रहे कॉल
निगम कमिश्नर रानू साहू के निर्देश पर अतिक्रमण निवारण दस्ते और भवन शाखा ने तेलीपारा रोड पर बसंत जायसवाल के विष्णु प्रिया काॅम्प्लेक्स की लगभग 20 दुकानों को सील किया।
काॅम्प्लेक्स में नक्शे के मुताबिक पार्किंग के लिए उपयुक्त जगह नहीं छोड़ी गई है। इससे पहले सदर बाजार करोना चौक के पास पूजा लालवानी के चश्मा संसार नामक दुकान को सील किया गया। दुकान नक्शा पास करवा बिना बनाई गई है। डेढ़ साल पहले भी निगम ने यहां कार्रवाई की कोशिश की तो एक नेता के इशारे पर रोक दी गई। बताया जाता है कि सीलिंग के दौरान कुछ नेताओं ने कार्रवाई रोकने के लिए अफसरों को कॉल किए, लेकिन इस बार कार्रवाई नहीं रोकी गई। अंतिम कार्रवाई शंकर हार्डवेयर को सील कर पूरी की गई।
पहले पार्किंग बनाएं, फिर दुकानें सील करें
तेलीपारा रोड पर शंकर हार्डवेयर के संचालक को अवैध निर्माण के मामले में नगर निगम ने पहले ही नोटिस दिया था। संतोषजनक जवाब न मिलने पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। दुकान संचालकों ने निगम अमले पर दादागिरी करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई का विरोध किया। कार्रवाई के दौरान निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।
डेढ़ घंटे तक रोड पर होता रहा हंगामा
तेलीपारा में शाम 4 बजे तक व्यापारियोंं का विरोध अलग-अलग अंदाज में चलता रहा। अमला लौटा तो सड़क पर टायर जलाए। पुलिस ने पहुंचकर आग बुझाई तो दूसरी जगह फिर टायर जला दिया। कुछ दुकानें भी बंद करवाई। गोल बाजार में चक्काजाम करने जा पहुंचे। पुलिस ने समझाइश देकर उन्हें रोका।
ईस्ट पार्क और 10 बैंकों को भेजा नोटिस
नगर निगम प्रशासन ने अवैध निर्माण और ट्रैफिक में बाधा पहुंचाने के मामलों में सख्ती शुरू कर दी है। गुरुवार को लिंक रोड के ईस्ट पार्क होटल और अभिषेक अग्रवाल के अवैध निर्माण के मामले में नोटिस जारी किया गया। इनके अलावा 10 बैंकों को पार्किंग का इंतजाम नहीं करने और ट्रैफिक में बाधा पहुंचाने पर नोटिस दिया गया है। निगम ने यह कार्रवाई व्यापारी संघ की इस शिकायत पर की कि बैंक प्रबंधन द्वारा बैंक पहुंचने वाले ग्राहकों के लिए पार्किंग की व्यवस्था भवन में नहीं की गई है, जिससे सड़कों पर बेतरतीब पार्किंग करने के कारण ट्रैफिक प्रभावित हो रहा है।
निगम प्रशासन द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, व्यापारी संघ से शिकायत मिली थी कि विभिन्न बैंकों द्वारा पार्किंग विहीन भवन को व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
इन बैंकों में हर रोज लगभग 200 से 500 लोग आते हैं। इनके वाहनों की पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है। ग्राहकों द्वारा सड़क पर वाहन पार्क करने के कारण ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है और आम नागरिकों को असुविधा होती है।
15 दिन के भीतर पार्किंग की व्यवस्था के निर्देश
निगम कमिश्नर रानू साहू ने बिना पार्किंग के चल रहे शहर के 10 बैंकों के प्रबंधकों को निगम की भवन शाखा में अनुमति-पत्र और स्वीकृत मानचित्र की कॉपी सात दिन में पेश करने और 15 दिनों में पार्किंग व्यवस्था करने के लिए नोटिस दिया है।
निगम की भवन शाखा ने इससे पहले इन बैंकों का सर्वे किया था। जिन बैंकों को नोटिस दिया गया है, उनमें भारतीय स्टेट बैंक कलेक्टोरेट शाखा, एचडीएफसी बैंक मुंगेली नाका, एसबीआई सरकंडा, बैंक आॅफ इंडिया राजेंद्र नगर, एचडीएफसी बैंक जरहाभाठा, यूनियन बैंक पुराना हाईकोर्ट रोड, ओरिएंटल बैंक आॅफ काॅमर्स इंदू चौक, बैंक आॅफ इंडिया दयालबंद, बैंक आॅफ महाराष्ट्र मध्यनगरी चौक, काॅरपोरेशन बैंक श्रीकांत वर्मा मार्ग शामिल हैं।
अवैध निर्माण पर होटल व भवन मालिक को नोटिस
मुख्य मार्गों पर भवनों को भी पार्किंग व्यवस्था न करने पर नोटिस दिया गया है। अभिषेक अग्रवाल को लिंक रोड पर निगम की अनुमति के विपरीत अधिक निर्माण करने पर नोटिस दिया गया था। पूर्व में मकान मालिक ने बतौर राजीनामा शुल्क 33.81 लाख रुपए जमा करने की जानकारी दी थी। संशोधन के लिए राशि जमा न करने पर उन्हें नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 307(3) से कार्रवाई का नोटिस भेजा गया है। इसी तरह होटल ईस्ट पार्क को अनुमति के विपरीत निर्माण को लेकर नोटिस जारी किया गया था। ऋतुराज वाजपेयी की ओर से भवन का पूर्णता प्रमाण-पत्र मांगा गया था। निगम ने अवैध निर्माण का निराकरण होने तक प्रमाण-पत्र देने से इनकार कर दोबारा नोटिस भेजा है।