बिलासपुर। कॉलेज स्टूडेंट्स को जिला कोर्ट में शपथ आयुक्त के समक्ष मौजूद होकर शपथ-पत्र देनी होगी कि वे रैगिंग नहीं करेंगे। यूजीसी के सर्कुलर के बाद बीयू ने नए प्रावधान की जानकारी देते हुए कॉलेजों को लिखा है। ये शपथ-पत्र स्टूडेंट्स की ओर से दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में मान्य किए जाएंगे। बीयू ने काॅलेजों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
यह शपथ पत्र छात्र-छात्राओं की तरफ से दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में मान्य किए जाएंगे। यूजीसी रैगिंग रोकने के लिए नए-नए प्रावधान ला रही है। वर्तमान में ऐसा ही एक प्रावधान आया है जिसके बाद छात्र-छात्रा यह नहीं कह सकेंगे कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। इस नए प्रावधान के अनुसार देश भर की यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं को 50 से 300 रुपए के स्टांप पेपर में यह शपथ पत्र शपथ आयुक्त को जिला कोर्ट में देनी होगी। यह शपथ पत्र छात्र के खुद मौजूद रहने पर ही स्वीकार की जाएगी।
मामले नहीं आते इस वजह से नहीं है गंभीर
यह सच है कि रैगिंग का वीभत्स रुप अब मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में ही नजर आता है। सामान्य कॉलेजों में रैगिंग की घटनाएं नहीं होती। मामले नहीं होने पर इसका यह मतलब नहीं कि समय पर कॉलेज समिति गठित नहीं करें। समितियां गठित हुई है कि नहीं इसकी मॉनिटरिंग यूनिवर्सिटी भी नहीं कर रही है। यूजीसी का नया सर्कुलर आने के बाद भले ही कॉलेजों में भिजवा दिया गया लेकिन इसका पालन कितने करेंगे इसकी मॉनिटरिंग करने वाला भी कोई नहीं है।
आॅनलाइन एफिडेविट का भी विकल्प
कालेजों में सीनियर स्टूडेंट्स को आवेदन के साथ एंटी रैगिंग एफिडेविट का विकल्प है। यूजीसी यह एफिडेविट आन लाइन जारी करेगा। इसके लिए खासतौर पर antiragging.in वेबसाइट बनाई गई है। इस पर जरूरी जानकारी देने के बाद एफिडेविट हो जाएगा। वेबसाइट पर स्टूडेंट्स को ईमेल आईडी के अलावा जरूरी जानकारियां देनी होंगी। इसमें अभिभावक या संरक्षक की भी जानकारी शामिल है। ई-मेल आईडी पर चार फार्मेट भेजे जाएंगे। इसमें सुप्रीम कोर्ट व यूजीसी की गाइड लाइन के अलावा एफिडेविट भी होगा। एफिडेविट एडमिशन फार्म के साथ जमा करना होगा। वेबसाइट पर रैगिंग की शिकायत भी की जा सकेगी।
यहां से बढ़ा रैगिंग का चलन
हमारे देश में रैगिंग का इतिहास दशकों पुराना है। अमेरिकी अंग्रेजी में रैगिंग का अर्थ मजाक है। रैगिंग मुख्यत: सेना में की जाती थी। सेना से यह पब्लिक स्कूलों, यूनिवर्सिटीज, मेडिकल-इंजीनियरिंग कालेज और तकनीकी शिक्षण संस्थानों में आ गई। सातवें दशक में बड़े पैमाने पर यूनिवर्सिटीज की स्थापना के साथ ही रैगिंग का चलन भारत में शुरू हुआ। विश्व में भारत व श्रीलंका को छोड़कर किसी भी देश में रैगिंग चलन में नहीं है।