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देहरादून की टीम ने देखी ब्रेल प्रेस, इससे क्षमता बढ़ जाएगी

6 वर्ष पहले
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बिलासपुर। तिफरा में मौजूद ब्रेल प्रेस को मॉर्डन व स्टैंडर्ड बनाने राष्ट्रीय दृष्टिबाधितार्थ संस्थान देहरादून (एनआईवीएच) की टीम ने निरीक्षण किया। दृष्टिबाधितों के लिए काम करने वाले देश के सबसे बड़े संगठन की रपट के आधार पर ही 30 साल पुराने ब्रेल प्रेस में विकास के द्वार खुलेंगे। यहां अत्याधुनिक ब्रेल प्रिंटिंग मशीन के अलावा कुछ अन्य सुविधाएं मुहेया करवाए जाने पर विचार किया जा सकता है।

यहां हम आपको बता दें कि मोदी सरकार ने ब्रेल लिपि की किताबें छापने वाले बिलासपुर समेत देशभर की 16 प्रिंटिंग प्रेस को मॉर्डन व स्टैंडर्ड बनाने का निर्णय लिया है। राज्य के इकलौते ब्रेल प्रेस को अपग्रेड करने नार्वे से ढाई करोड़
रुपए की अत्याधुनिक ब्रेल प्रिंटिंग मशीन खरीदी गई है।

इसके आने पर ब्रेल बुक्स की छपाई में क्रांतिकारी तेजी की उम्मीद जताई जा रही है। अत्याधुनिक मशीन की स्थापना के बाद छत्तीसगढ़ के साथ ही मध्यभारत के बाकी राज्यों में भी दृष्टिहीन छात्र-छात्राओं को समय-सीमा के भीतर किताबें मिलेंगी। मशीन और दीगर सुविधाएं देने के पहले दृष्टिबाधितार्थ संस्थान की टीम 29 जनवरी को ब्रेल प्रेस का जायजा लेने पहुंची। टीम के सदस्य व दृष्टिबाधित संस्थान देहरादून के ब्रेल प्रेस मैनेजर जीएल नवानी ने ब्रेल प्रेस प्रभारी व समाज कल्याण विभाग के संयुक्त संचालक पंकज वर्मा से प्रेस में मौजूद सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। करीब दो घंटे तक स्टॉफ के प्रत्येक कर्मचारी से उनके अनुभव का जायजा लिया। हैदराबाद से पहुंचे ब्रेल प्रेस के अधिकारी श्याम सुंदर भी भवन व अमला देखकर संतुष्ट हुए।

फोन पर कहा, ओके, मिलेंगी सुविधाएं
दृष्टिबाधितार्थ संस्थान के अधिकारी अपने साथ प्रेस से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट लेकर गए और जो कुछ बच गया उसे ई-मेल के जरिए मंगवाया भी। पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद फोन पर स्थानीय अधिकारियों को बता भी दिया कि प्रेस में अत्याधुनिक ब्रेल प्रिटिंग मशीन के साथ ही कुछ अन्य सुविधाएं भी मुहैया करवाई जा सकती है। जल्द ही टीम केंद्र सरकार को प्रेस के बारे में रिपोर्ट देगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर प्रेस का भविष्य तय होगा।
इस तरह खुलेंगे विकास के द्वार
{नई मशीन आने पर ब्रेल किताबों की तेजी से छपाई होगी। समय पर किताबें भेजी जा सकेगी।
{पाठ्यक्रम के अलावा धार्मिक, साहित्यिक और कला-संस्कृति पर भी बुक्स प्रिंट की जाएंगी।
{पड़ोसी राज्यों ओड़िसा, उत्तरप्रदेश, झारखंड और बिहार के दृष्टिबाधितों को किताबें भेजी जाएंगी।
{इस तरह जॉब वर्क की डिमांड भी बढ़ेगी और यहां के प्रेस को अच्छी आमदनी होगी।
{आमदनी बढ़ने पर प्रेस ब्रेल लिपि के
नए वित्तीय वर्ष से हमें बड़ी उम्मीदें हैं
नए वित्तीय वर्ष से हमें बड़ी उम्मीदें हैं। नई व ज्यादा क्षमता वाली प्रिंटिंग मशीन मिलने पर ब्रेल किताबों की छपाई के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। खासतौर पर मध्यभारत में हम सर्वाधिक तेजी से ब्रेल किताबें छापने वाले अग्रणी राज्य बन जाएंगे। पाठ्यक्रम, रामचरित मानस व अन्य धार्मिक, साहित्यिक और कला-संस्कृति पर भी बुक्स प्रिंट कर राज्य व राज्य के बाहर सप्लाई करेंगे।''
-पंकज वर्मा, प्रभारी, ब्रेल प्रेस और संयुक्त संचालक, समाज कल्याण विभाग