बिलासपुर. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) चाहता है कि यूनिवर्सिटी और कॉलेज जमाने के साथ चलें। यही वजह है कि कॉलेजों को हाईटेक करने के लिए नेशनल नॉलेज नेटवर्क और इनफ्लिब्नेट जैसी सुविधाएं लाई गईं, लेकिन कॉलेज हैं कि इनमें रुचि ही नहीं ले रहे। यूनिवर्सिटी कॉलेजों के प्रबंधन को कई बार इन सुविधाओं से जुड़ने के लिए ऑफर दे चुकी है। इधर, कॉलेजों में अब भी दशकों पुरानी व्यवस्थाएं लागू हैं।
बिलासपुर यूनिवर्सिटी ने सभी 158 कॉलेजों को कुछ समय पहले यूजीसी की नेशनल नॉलेज नेटवर्क स्कीम के लिए ऑफर किया था। इस योजना में काॅलेजों को इंटरनेट के जरिए एक-दूसरे से लिंकअप होना था। सुविधा का लाभ लेने वाले काॅलेज को किसी भी काम के लिए मैनुअली पत्राचार की जरूरत नहीं पड़ती। नेट के जरिए मेल से एक-दूसरे से संपर्क रख सकते थे। इस स्कीम में सिर्फ 25 प्रतिशत राशि कॉलेजों को लगानी थी, जबकि 75 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार दे रही है। बिलासपुर यूनिवर्सिटी के ऑफर को छह महीने गुजर गए, लेकिन अब तक 158 में से सिर्फ दो कॉलेजों ने ही आवेदन दिया है। इनमें एक साइंस कॉलेज और दूसरा जेपी वर्मा कॉलेज है। दूरदराज के काॅलेजों को छोड़ भी दें तो शहरी इलाकों के ऐसे कॉलेज भी हाईटेक होने में रुचि नहीं ले रहे हैं, जहां कंप्यूटर, इंटरनेट की सुविधा है।
इनफ्लिब्नेट से भी कोई वास्ता नहीं : इस सुविधा का लाभ सिर्फ इंटरनेट कनेक्शन के जरिए उठाया जा सकता है। इसमें किसी भी यूनिवर्सिटी का स्टडी मटेरियल, रिसर्च जर्नल तक
मोबाइल में देखा जा सकेगा। ई-रिसोर्स की सुविधा अलग मिलेगी। उदासीनता को देखते हुए यूनिवर्सिटी इसकी जानकारी देने के लिए 17 अक्टूबर को वर्कशाॅप करवा रही है।
बीएसएनएल प्रभावी नहीं : योजना में अरुचि के पीछे यह भी एक बड़ी वजह बताई जा रही है। इसके बाद भी ऐसे कई कॉलेज हैं, जहां नेट कनेक्शन हैं लेकिन उन्होंने भी अब तक एनकेएन योजना के लिए बीयू को आवेदन नहीं दिया है।
क्या कहते हैं प्राचार्य
हम राजी, लेकिन बिजली, इंटरनेट की समस्या
हमारे यहां एनकेएन जैसी योजना से जुड़ने के लिए सभी संसाधन हैं, लेकिन बिजली और इंटरनेट को लेकर बड़ी समस्या है। अक्सर बिजली गुल होने से काम नहीं हो पाता। बिजली अगर हो तब भी नेट कभी-कभार ही आता है। ऐसी स्थिति में हम इस स्कीम से जुड़ भी जाएं तो इस सुविधा का लाभ नहीं ले पाएंगे। हालांकि हमने मेंबरशिप के लिए पत्र भेज दिया है।- संध्या तिवारी, प्राचार्य, निरंजन केशरवानी गवर्नमेंट कॉलेज कोटा
सदस्यता के लिए जल्द ही भेजेंगे आवेदन
दोनों ही योजनाएं यूनिवर्सिटी, कॉलेज और स्टूडेंट्स को बड़ी राहत देने वाली हैं। इस योजना के लिए हम तैयार हैं, लेकिन बीएसएनएल की सर्विस सही नहीं है। इस वजह से कुछ समय पहले इसका इंटरनेट कनेक्शन कटवा दिया गया था। कॉलेज में अभी निजी कंपनियों की सर्विस से नेट चलाया जा रहा है। एनकेएन के लिए फिर से बीएसएनएल की सर्विस लेने के बारे में सोचेंगे।
- आरपी पांडे, प्रभारी प्राचार्य, डीपी विप्र कॉलेज
काॅलेजों को जागरूक करने के लिए वर्कशाॅप करवा रहे
- कॉलेजों को एनकेएन और इनफ्लिब्नेट जैसी सुविधाओं की जानकारी देने के लिए ही बिलासपुर यूनिवर्सिटी वर्कशाॅप करवा रही है। वर्कशाॅप में जानकारी दी जाएगी कि इन सुविधाओं का उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। वर्कशाॅप से कॉलेजों में भी जागरूकता आने की उम्मीद है। - प्रो. जितेंद्र कुमार, कंप्यूटर साइंस, बिलासपुर यूनिवर्सिटी