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  • रेलवे में वीआरएस लेने वाले लोको पायलटों के परिजनों के लिए अच्छी खबर है

परिजनों की भर्ती के नियम बदले, एक बार फेल हो गए तो दूसरी बार भी मिलेगा मौका

6 वर्ष पहले
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बिलासपुर। रेलवे में वीआरएस लेने वाले लोको पायलटों के परिजनों के लिए अच्छी खबर है। एक बार भर्ती परीक्षा में फेल होने वालों को अब दोबारा परीक्षा का मौका दिया जाएगा। हालांकि इसके लिए उन्हें स्थानीय बोर्ड के जीएम सेे मंजूरी लेनी होगी।

लोको पायलटों के परिजनों की भर्ती के लिए रेलवे बोर्ड ने नियमों में बदलाव किया है। बोर्ड से जारी नए निर्देश के अनुसार अब स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले लोको पायलट के परिजन दो बार परीक्षा दे सकेंगे, जबकि पहले एक बार परीक्षा में फेल होने पर उन्हें भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया जाता था। लारजेस योजना के तहत परीक्षा पास करने के बाद उन्हें असिस्टेंट लोको पायलट के पद पर नियुक्त किया जाता है।

रेलवे की इस योजना के तहत लोको पायलट 55 से 57 साल के बीच स्वेच्छा से रिटायरमेंट ले लेते हैं। उनकी जगह उनके लड़के या लड़की काे नौकरी दी जाती है। इसके लिए
रिटायर लोको पायलट के परिजनों को परीक्षा देनी हाेती है। एक बार परीक्षा में फेल होने पर उसे नौकरी नहीं मिलती थी, लेकिन नए नियमों के तहत ऐसे अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा में शामिल किया जा सकता है।
जीएम से लेनी होगी अनुमति
दोबारा परीक्षा में शामिल हाेने के लिए आवेदक को जोन के जीएम से अनुमति लेनी होगी। महाप्रबंधक की अनुमति के बिना उसे दोबारा परीक्षा में शामिल किया जा सकता है।
नए नियम से आवेदकों को राहत मिलेगी
रेलवे बोर्ड ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले लोको पायलटों के परिजनों की भर्ती प्रक्रिया में बदलाव किया है। अब एक बार फेल होने वाले अभ्यर्थियों को दोबारा मौका दिया जाएगा। हालांकि इसके लिए स्थानीय जीएम से अनुमति लेनी होगी।''
-अारके अग्रवाल, सीपीआरओ, एसईसीआर
आवेदक को साइकोलॉजिकल टेस्ट पास करना अनिवार्य है। क्योंकि ज्यादातर आवेदक लिखित परीक्षा पास कर लेते है। साइकोलॉजिकल टेस्ट में फेल हो जाते हैं। इसीलिए बोर्ड ने अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा देने का मौका दिया है।
नए नियम से आवेदकों को राहत मिलेगी
रेलवे बोर्ड ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले लोको पायलटों के परिजनों की भर्ती प्रक्रिया में बदलाव किया है। अब एक बार फेल होने वाले अभ्यर्थियों को दोबारा मौका दिया जाएगा। हालांकि इसके लिए स्थानीय जीएम से अनुमति लेनी होगी।''
-अारके अग्रवाल, सीपीआरओ, एसईसीआर