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टाइगर रिजर्व के अफसरों को बताया गया वाइल्ड एनिमल का व्यवहार

6 वर्ष पहले
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बिलासपुर। अचानकमार टाइगर रिजर्व के असिस्टेंट डायरेक्टर से लेकर रेंज अफसर, डिप्टी रेंजर, वनपाल अौर फाॅरेस्ट गार्ड को मिलाकर करीब 80 अधिकारी व कर्मचारियों को सोमवार को कानन पेंडारी में वाइल्ड एनीमल के व्यवहार, जीवनशैली आदि की ट्रेनिंग दी गई। कानन जू रेस्क्यू सेंटर के वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. पीके चंदन ने एटीआर स्टाफ को वन्यप्राणियों के संबंध में सैद्धांतिक के साथ व्यवहारिक ज्ञान करवााया। इस मौके पर एनटीसीए द्वारा वन्यप्राणियों के संरक्षण के लिए प्रकाशित निर्देशिका के हिंदी वर्जन का विमोचन एटीआर के सीसीएफ तपेश झा, अचानकमार अमरकंटक बायोस्फियर रिजर्व के संचालक मातेश्वरन और डीएफओ एसपी मसीह ने किया।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण नई दिल्ली ने बाघों के रिहायशी इलाकों में भटक कर पहुंचने की स्थिति में उन्हें सुरक्षित रूप से बचाने, बाघों की मृत्यु के मामले में जांच तथा बाघ, तेंदुए की मृत्यु के बाद उनके शरीर के अवयव, अंगों आदि को नष्ट करने की प्रक्रिया के बारे में तीन पुस्तिकाएं प्रकाशित की हैं। एटीआर ने उनका अनुवाद करवा कर वन रक्षक तक इसे आसानी से पहुंचाने का मार्ग बताया। असिस्टेंट डायरेक्टर एसके शर्मा ने बताया कि टाइगर रिजर्व के दो दर्जन अधिकारी और कर्मचारियों को उनके बेहतर क्रियाकलापों के लिए पुरस्कृत करने का निर्णय लिया है। इनमें छपरवा रेंज के रेंज अफसर आलोक नाथ, परिक्षेत्र सहायक माधव प्रसाद शर्मा, डोमन सिंह मरावी सरईपानी आदि शामिल हैं।