बिलासपुर. हाईकोर्ट ने रायपुर निवासी ठेकेदार को युवती के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। पिछली सुनवाई के दौरान सामाजिक रीति-रिवाजों और कानूनी तौर पर गोद लेने पर सहमति बनी थी, लेकिन अब तक इसका क्रियान्वयन नहीं हो सका है। मामले पर अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी। युवती की मां ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाई है।
युवती को बंधक बनाकर रखने का आरोप लगाते हुए पेश की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर हाईकोर्ट ने संबंधित ठेकेदार शैलेंद्र सिंह तोमर को युवती के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की समझाइश के बाद दोनों पक्षों ने मध्यस्थता केंद्र में चर्चा की। इसके बाद दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हो गए थे कि ठेकेदार युवती को रीति-रिवाजों और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए गोद लेगा।
इसके बाद हाईकोर्ट ने 25 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई के दौरान गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर पंजीयन होने की जानकारी देने को कहा था। पैरवी के लिए हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति की ओर से नियुक्त किए गए वकील संदीप दुबे की मौजूदगी में कानूनी दस्तावेज तैयार किए जाने थे। लेकिन दस्तावेज पेश नहीं किया जा सका। सोमवार को मामले की सुनवाई जस्टिस टीपी शर्मा और जस्टिस चंद्रभूषण वाजपेयी की डिवीजन बेंच में हुई। हाईकोर्ट ने ठेकेदार को युवती के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी।
क्या है मामला
रायपुर में रहने और सब्जी बेचने वाली निर्मला दुबे ने हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति के जरिए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाई है। इसमें रायपुर के ठेकेदार शैलेंद्र सिंह तोमर पर उसकी बेटी को लगभग 4-5 साल से बंधक बनाकर रखने का आरोप लगाया गया था। याचिका में कहा गया कि तोमर ने 4-5 साल पहले उसके परिवार को आश्रय दिया था, कुछ समय बाद उसने सभी को वहां से जाने को कह दिया। वहीं उसकी बेटी को अपने पास रख लिया, अब उसकी बेटी बालिग हो चुकी है। इस बीच उसने संबंधित थाने में रिपोर्ट लिखाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी।