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किवार के 25 फीसदी कर्मी रहते हैं गैरहाजिर, सिर्फ 72 फीसदी घरों से कलेक्शन, ऐसी है शहर में सफाई

7 वर्ष पहले
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भिलाई। शहर की सफाई का ठेका लेने वाली कंपनी किवार (भिलाई दुर्ग वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड) डेढ़ साल बाद भी सफाई के लिए जरूरी संसाधन नहीं जुटा सकी है। हालात ये हैं कि सिर्फ 72 फीसदी घरों से कचरा उठ रहा है। 25 फीसदी कर्मचारी रोज गैरहाजिर रहते हैं। यह हम नहीं, सोमवार को की गई खुद निगम की वेरीफिकेशन रिपोर्ट कह रही है। सब कुछ जानते हुए निगम प्रशासन मूकदर्शक की भूमिका निभा रहा है। किवार अभी तक उधार के सेटअप से ही काम चला रही है। इससे शहर की प्रॉपर सफाई नहीं हो रही है। न तो पर्याप्त कर्मचारी हैं और न ही सामग्रियां। डोर-टू-डोर कलेक्शन नहीं हो रहा है। नुक्कड़ों पर कचरे का ढेर लगा ही रहता है। बाजार और सड़कों पर भी हमेशा गंदगी पसरी रहती है। गौर करने की बात तो यह है कि यह सब जानते हुए भी निगम प्रशासन मौन है। शहरवासियों को मेट्रोसिटी के तर्ज पर शहर साफ-सुथरा रहेगा का सब्जबाग दिखाया गया था। हालात ये हैं कि सफाई हाईटेक हुई नहीं बल्कि पहले
से भी बदहाल हो गई है।
ये है किवार का असली चेहरा :

72% घरों से ही कचरा कलेक्शन हो रहा है। बाकी घरों व दुकानों की तरफ झांककर भी नहीं देख रहे है।

40% नालियों की सफाई कर पा रहे हैं। शहर के शेष नालियों में गंदगी बजबजा रही है।

60% सड़कों पर ही झाड़ू लग रहा है। वह भी नियमित नहीं हो पा रहा है। अधिकांश सड़कों पर गंदगी पसरी रहती है।

65%कलेक्शन सेंटर से ही कचरा उठा पा रहे हैं। बाकी जगह मैदानों और नुक्कड़ों पर गंदगी की ढेर पड़ी रहती है।
सफाई श्रमिक
हालात : -किवार शहर के 44 वार्डों की सफाई के लिए 1058 श्रमिक रखे हैं। इनमें से भी 25 फीसदी कर्मचारी रोज गैर हाजिर रहते हैं।

जरूरत : शहर की भौगोलिक स्थिति और आबादी को देखते हुए कम से कम 1475 श्रमिक होने चाहिए। लेकिन स्थिति बदहाल है।
डस्टबिन
हालात :- शहर में 1 लाख 25 हजार 664 मकान हैं। जबकि मात्र 79880 घरों में ही वह भी एक-एक डस्टबिन दिया गया है। व्यावसायिक संस्थानों को छोड़ दिया गया है जहां ज्यादा कचरा वहीं से निकलता है।
जरूरत : एग्रीमेंट के मुताबिक प्रत्येक घर में दो-दो डस्टबिन देना अनिवार्य है। इस लिहाज से 1 लाख 84 हजार 604 डस्टबिन बांटने चाहिए थी। किवार अभी तक यह काम नहीं कर सका है।
कचरा गाड़ियां
हालात : केवल 3 कंपैक्टर, 42 ऑटो, 195 रिक्शे, 188 हैंड ट्राली, 4 टिप्पर, 218 कंपैक्टर बिन और 49 डंपर बिन ही उपलब्ध कराई गई है। इनमें भी 20 फीसदी तो खड़े रहते हैं।

जरूरत : जबकि 5 कंपैक्टर, 5 ऑटो, 350 रिक्शे, 220 हैंड ट्राली, 8 टिप्पर, 300 कंपैक्टर बिन, और 80 डंपर बिन की जरूरत शहर की सफाई के लिए है।
सीधी बात: रमशीला साहू, महिला एवं बाल विकास मंत : मुझसे तो किसी ने शिकायत नहीं की
- किवार शहर की ठीक से सफाई नहीं कर रही है। जनता गंदगी से परेशान हैं। आप लोग शासन स्तर पर बात क्यों नहीं रखते?
- मुझे ऐसी कोई जानकारी नहीं है। आज तक किसी ने भी कोई शिकायत नहीं की है?
- मतलब जनता जब शिकायत करेगी तभी आप लोग बात रखेंगे। आप जनप्रतिनिधि हैं, जनता
की फिक्र करना क्या आपकी जिम्मेदारी नहीं है?
- वही तो कह रही हूं मै जनप्रतिनिधि हूं मुझे जानकारी तो होनी चाहिए।
- शहर का एक भी नागरिक सफाई से संतुष्ट नहीं है। आप भी यहीं रहती है। फिर भी आपको पता नहीं?
- नहीं, बिलकुल नहीं। मैं दौरे पर जाती रहती हूं। आज आपसे बात करते हुए दौरे से लौट रही हूं। मुझे किसी ने शिकायत नहीं की है।

- ठीक है अब तो पता चल गया, अब आप क्या करेंगी?
- सफाई व्यवस्था में लापरवाही बिलकुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मैं डिटेल जानकारी लेती हूं। फिर जो भी हो सकेगा बात रखूंगी।
सीधी बात : विद्यारतन भसीन, विधायक वैशाली नगर
निर्देश दिए हैं, बात करूंगा
- किवार शहर की सफाई नहीं कर रही है, आप लोग शासन स्तर पर बात क्यों नहीं करते?
- यह सही है, सफाई व्यवस्था दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। मैंने तो प्रभार मंत्री से बात भी की है। मेरे सामने ही निगम कमिश्नर को निर्देश भी दिए। सप्ताह भर में बैठक होने वाली है, फिर अपनी बात रखूंगा।

सीधी बात : निर्मला यादव, महापौर, बहुत हो गया, अब मंत्री से बात करूंगी

किवार के पास न तो पर्याप्त संसाधन है और न ही ठीक से सफाई कर रही है कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं?
- कार्रवाई बिलकुल होनी चाहिए। सही बात है,शिकायत आ रही है।
- कौन करेगा?
- मैंने तो कमिश्नर से कई बार कहा है। हम लोग फाइन कर सकते हैं। किए भी हैं। शासन को
ध्यान देना चाहिए।

- आप लोग खुलकर विरोध क्यों नहीं करते?
- नई व्यवस्था है, थोड़ा समय लगता है सोचकर शुरुआत में को-ऑपरेट किए। अब बहुत हो गया।
मैं स्वयं हमारे विभाग के मंत्री से बात करूंगी।
प्रशांत मिश्रा, पीआरओ किवार, रिलोकेट करना पड़ गया
- डेढ़ साल बाद भी आपकी कंपनी पर्याप्त संसाधन की व्यवस्था क्यों नहीं की है?
- शुरुआत में पर्याप्त सामग्रियां लाई गई थी। कुछ दुर्ग व रायपुर में रिलोकेटेड हो गए थे।
- रिलोकेटेड हो गए इससे आपका क्या मतलब है?
- यहां का समान दुर्ग और रायपुर चला गया था?
- तो अब क्या सफाई व्यवस्था ऐसी ही चलती रहेगी?
- नहीं, हेड आफिस से बजट की स्वीकृति मिल गई है। जल्द ही समान खरीदेंगे।
- प्रोसेसिंग प्लांट क्यों नहीं बनाया?
- हमारी ओर से कोई देरी नहीं है। शासन स्तर पर लटका है।
शहर को बीमार कर रही है ये गंदगी : शहर में हर तरफ पसरी गंदगी की वजह से डायरिया, पीलिया और डेंगू प्रभावितों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। सुपेला शासकीय अस्पताल में
रोज ओपीडी की संख्या 400 से बढ़कर 500 पार कर गई है। बैकुंठधाम अस्पताल में भी पहले 70-80 मरीज रोज आते थे अब 130 के करीब पहुंचने लगे हैं। तीन दर्जन डेंगू प्रभावितों में ज्यादा संख्या भिलाई की ही है।
भास्कर लाइव :
निगम की ट्राली से उठा रहे हैं कचरा
कैंप एरिया के वार्ड 18, 19, 20 और 21। कचरा कलेक्क्शन में सिर्फ 13 रिक्शे ही सफाई में लगे मिले। जबकि रिकार्ड में 23 रिक्शे और 21 हेंड ट्राली दिए गए हैं। सुपरवाइजर जानकारी देने में आनाकानी करने लगे तो निगम के एसआई के पास पानी टंकी स्थित कार्यालय गए। वहां 10 रिक्शे कंडम पड़े थे। कई हेंड ट्राली भी रखी थी। 120 लीटर वाले दर्जनभर डस्ट बिन तो कबाड़ में डाल दिए गए हैं। किवार के एक श्रमिक ने कहा हमारी कंपनी के सब समान कंडम हो गए हैं।
वैशाली नगर में 49 श्रमिक गैरहाजिर : वैशाली नगर के वार्ड 9 से 16। सोमवार को 133 लोग आए थे। 49 गैरहाजिर थे। जबकि रिकार्ड में वार्डों की सफाई के लिए 182 श्रमिक रखे हैं। वार्ड 9 और 10 में चार-चार हेंड ट्राली की जगह दो-दो हैड ट्राली से ही कचरा उठाया जा रहा था। बाकी कहा है,जवाब मिला कंडम हो गई है। वार्ड 15 घासीदास नगर में भी 5 की जगह 3 रिक्शे
से ही कचरा कलेक्ट किया जा रहा था। पहले क्षेत्र से रोज 40 टन कचरा उठता था। अब बमुश्किल 30 टन ही उठ रहा है।
निगम की कार्रवाई: भुगतान करोड़ों में, जुर्माना लाखों में
20.42करोड़ रुपए भुगतान निगम अब तक ककर चुका है। यह मई 2013 से अगस्त 2014 तक कचरा उठाने की एवज में दिया गया है।
49.23 लाख रुपए अर्थदंड अभी तक निगम ने किवार के ऊपर लगाया है। ऐसा एग्रीमेंट की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप में।
32 नोटिस अब तक निगम ने किवार को दिया है। सही ढंग से सफाई नहीं करने, कचरा छलकने, डंप कचरा उठाने व मिट्टी
और पत्थर तुलवाने की शिकायत पर।

सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति
जोन कूल उपस्थित अनु. प्रतिशत
नेहरू नगर 214 189 25 12
वैशाली नगर 182 141 41 23
मदर टेरेसा नगर 219 166 53 24
शिवाजी नगर 248 186 62 25
रिसाली 190 151 39 21
कुल 1053 833 220 21
(यह स्थिति 20 सितंबर की है)
यक्ष प्रश्न :
- किवार के पास पर्याप्त संसाधन नहीं है। इससे शहर की सफाई चौपट हो रही है। यह अहम बुनियादी सुविधा है, जिसकी
जिम्मेवारी निगम प्रशासन की है। इसके बाद भी निगम के अफसर क्यों मौन साधे हुए हैं?
- शहर के दो केबिनेट मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय और रमशीला साहू का विधानसभा क्षेत्र है। वैशाली नगर के विधायक विद्यारतन भसीन भी सत्तारूढ़ दल से हैं। क्या उनकी अपनी कोई जवाबदारी नहीं बनती?
-निगम के जनप्रतिनिधि महापौर निर्मला यादव, सभापति राजेंद्र अरोरा और पार्षद भी खुलकर किवार की सफाई व्यवस्था का
विरोध करने से क्यों कतराते रहे है। कभी किसी ने मुंह खोला भी तो कुछ दिन में जुबान क्यों बंद हो जाती है?