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हर साल बढ़ा उत्पादन पर नहीं बढ़ा इनसेंटिव

7 वर्ष पहले
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बीएसपीमें हर साल प्रोडक्शन टार्गेट बढ़ रहा है। इस हिसाब से प्रॉफिट में भी लगातार वृद्धि हो रही है। लेकिन इनसेंटिव के मामले में स्थिति ठीक इसके विपरीत है।

सात साल पूर्व जितने इनसेंटिव के साथ स्कीम शुरू की गई थी। उसके बाद से हर साल इसकी राशि में कमी की जा रही है। प्रबंधन के इस रवैए से कर्मियों में नाराजगी व्याप्त है।बीएसपी में इंसेटिव स्कीम एक अप्रैल 2007 लागू है। उस समय प्लांट में 2.5 एमटी उत्पादन हो रहा था। फिलहाल सवा पांच एमटी उत्पादन किया जा रहा है जिसे अगले एक-दो वर्षों में साढ़े सात एमटी उत्पादन करने का लक्ष्य है।

इस तरह जबसे इनसेंटिव स्कीम शुरू हुई है तबसे उत्पादन तो हर साल बढ़ रहा है लेकिन इनसेंटिव की राशि बढ़ाने की बजाए कम की जा रही है। जबकि इस दौरान प्लांट में नियमित रूप से हो रहे रिटायरमेंट नई भर्ती में रोक की वजह से कर्मियों की संख्या घटी है। इससे भी कार्यरत कर्मियों पर काम की जिम्मेदारियां बढ़ी है। बावजूद इनसेंटिव नही बढ़ने से कर्मियों में रोष व्याप्त है।

प्रतिव्यक्ति प्रोडक्टिविटी बढ़ी

4-5साल पूर्व प्रति व्यक्ति / प्रति वर्ष प्रोडक्टिविटी 250 टन थी। वह बढकर 370 टन प्रति व्यक्ति / प्रतिवर्ष हो गई है। कम मेन पावर होने के बावजूद प्रोडक्टिविटी बढ़ना कर्मियों के लगन एवं मेहनत को दर्शाता है परंतु प्रबंधन द्वारा इस ओर ध्यान नही दिया। यूनियनों का मानना है कि जब प्रति व्यक्ति प्रोडक्टिविटी बढ़ गई है उसी अनुपात में मासिक इंसेटिव बढ़ना चाहिए।

इनसेंटिव में फेरबदल की जरूरत

इनसेंटिवको लेकर इस्पात श्रमिक मंच की कार्यकारिणी की बैठक हुई। मंच पदाधिकारियों का मानना है कि वर्तमान में जारी इंसेंटिव स्कीम काफी पुरानी होने के कारण कर्मियों के हित में नही है। प्रबंधन को इसमें आमूलचूल परिवर्तन की जरूरत है ताकि कर्मियों को उसके वाजिब हित का निर्धारण किया जा सके। बैठक में निर्णय लिया गया कि इनसेंटिव की मांग को लेकर ईडी पर्सनल एवं सेल चेयरमैन को ज्ञापन सौंप नई इंसेटिव स्कीम को जल्द से जल्द लागू करने की मांग की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता भावसिंह सोनवानी ने की। महासचिव हीरामन तेली, कार्यकारी महासचिव राजेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष भीखम लाल भूआर्य, उपमहासचिव सर्वजीत सिंग, सीताराम साहू, जेआर सोनवानी, आईएस ठाकुर, वरिष्ठ सचिव बाबूलाल साहू, सचिव आरके गजेंद्र आदि मौजूद थे।

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