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आज की शिक्षा प्रणाली इंटरनेट पर निर्भर: डॉ बेलसरे

6 वर्ष पहले
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साइंसकॉलेज दुर्ग में दो दिवसीय सेमिनार का रविवार को समापन हुआ। वैज्ञानिकों ने अपने-अपने रिसर्च और अनुभव बताए। सेमिनार में जहरीली कैमिकल के बारे में बताने वाले वैज्ञानिक डॉ. डीके बेलसरे भी पहुंचे। दैनिक भास्कर संवाददाता ने डॉ. बेलसरे से खास बातचीत की।

इस दौरान उन्होंने अभी के एजुकेशन सिस्टम पर बेबाक बात की। डॉ. बेलसरे ने कहा कि, आज की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह इंटरनेट पर निर्भर है। स्कूल में शिक्षक से लेकर बच्चे इंटरनेट से जानकारी ले रहे हैं। वे भ्रम में रहे कि ये जानकारी उनके लिए ज्ञान की बाते नहीं हैं। हमें इंटरनेट से दूरी बनानी चाहिए। यही हाल कॉलेज का है। अगर किसी छात्र को प्रोजेक्ट देते हैं तो वे इंटरनेट से कंटेंट निकालते हैं। प्रोफेसर भी इन कंटेंट को नहीं देखते। इसलिए उन्हें साइंस से लेकर अन्य विषयों के बारे में जानकारी नहीं है। सिर्फ डिग्री लेने से कुछ नहीं होता, उन्हें प्रैक्टिकली करना होगा। इस दौरान डॉ. बेलसरे ने अपने पुराने दिनों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि, मैंने अपनी स्कूली पढ़ाई अमरावती जिले के तलेगांव के स्कूल में की। यह 1941 की बात है। तब स्कूलों में तो बिजली होती थी और ही बैठने के लिए फर्नीचर भवन।

जूलॉजिकलसोसाइटी ऑफ छग का गठन : प्रदेशके कॉलेजों के प्रोफेसरों स्टूडेंट्स ने जूलॉजिकल सोसाइटी ऑफ छत्तीसगढ़ का गठन किया। सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. एके पति ने बताया कि इसमें कोई भी प्रोफेसर जो जीव-जंतु और पेड़-पौधों में रुचि लेते हैं। वे इसके सदस्य हो सकते हैं। सोसाइटी रिसर्च को बढ़ावा देगी। कार्यशाला का आयोजन होगा। स्टूडेंट्स को इस फील्ड के जॉब के बारे में भी बताया जाएगा। सोसाइटी के सचिव डॉ. अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि जल्द ही ई-जनरल का प्रकाशन होगा। जिसे कोई भी इंटरनेट के माध्यम से पढ़ सकेगा। यह व्यापक स्तर से होगा।

साइंसकॉलेज दुर्ग को प्रथम पुरस्कार : सोसाइटीके सचिव डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि दो दिवसीय संगोष्ठी में कुल 12 आमंत्रित व्याख्यान, 86 शोधपत्रों की मौखिक प्रस्तुति तथा 42 पोस्टर प्रस्तुत किए गए। मौखिक प्रस्तुति में प्रथम पुरस्कार साइंस कालेज दुर्ग के शोधकर्ता निखिल मिश्रा को तथा द्वितीय पुरस्कार घासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर की गीता मिश्रा को मिला।

रिसर्च को नकल करें: डॉ. पांडेय

सेमिनारके समापन के मौके पर पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. शिवकुमार पांडेय मौजूद थे। उन्होंने कहा कि, मौलिक और उद्देश्य पूर्ण शोध आज के समय की सबसे प्रमुख आवश्यकता है। युवा पीढ़ी को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए। प्रकृति के संरक्षण से ही हमारा अस्तित्व जुड़ा हुआ है। हमें प्रकृति का उपयोग सदैव जैव, विविधता के संरक्षण को ध्यान में रख कर करना चाहिए। शोधकर्ताओं को नकल से बचना चाहिए।

नेशनल सेमिनार में पं. रविशंकर विश्वविद्यालय के कुलपति एवं अन्य एक्सपर्ट।

सेमिनार