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ब्रह्मलीन हुए काशीपीठ के शंकराचार्य चिन्मयानंद

7 वर्ष पहले
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काशी(बनारस) पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी चिन्‍मयानंद सरस्वती 12 सितंबर की रात 10 बजे महाप्रयाण कर गए। उनके ब्रह्मलीन होने की सूचना यहां पहुंचते ही उनके शिष्यों में शोक छा गई। दुर्ग-भिलाई, बेमेतरा, बालोद, कवर्धा राजनांदगांव जिले में उनके शिष्य हैं। वाह्य आडंबरों एवं प्रचार-प्रसार से दूर शंकराचार्य लगभग प्रतिवर्ष यहां आकर अपने शिष्यों को धर्म शिक्षा देते रहे हैं। बनारस से मिली खबर के अनुसार शनिवार को शाम 4 बजे संन्यासी परंपरानुसार पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती की मौजूदगी में उनके पार्थिव शरीर को गंगा नदी में जल समाधि दी गई। शंकराचार्य के महाप्रयाण पर पंडित मनोज पांडेय, पं अनूप तिवारी, डॉ महेशचंद शर्मा, डॉ रामस्वरूप शर्मा, रामावतार, राममूर्ति शर्मा, अनूप शर्मा, प्रशांत तिवारी, सुभाष तिवारी, ललित तिवारी, सीमा तिवारी, कविता शर्मा, रमेश शर्मा, झम्मन शास्त्री, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. सीताराम शर्मा आदि ने शोक व्यक्त किया है।

चिन्‍मयानंद सरस्वती