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कॉम्प्लेक्स विवाद पर जवाब नहीं दे रहा निगम

7 वर्ष पहले
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चंद्रा-मौर्याटॉकीज के सामने निर्माणाधीन विवादित कांप्लेक्स का मामला नगर निगम के अफसरों की लेटलतीफी के कारण उलझाता ही जा रहा है। अफसर कोर्ट में निगम का पक्ष नहीं रखने में देरी कर रहे हैं। इसके कारण मामले का निपटारा नहीं हो पा रहा है। अफसरों के उलझन का खामियाजा भू स्वामी को उठाना पड़ रहा है। जबकि निगम पहले स्वयं भूखंड के आवंटन और व्यवस्थापन को नियमानुसार बता चुका है।

चंद्रा-मौर्या टॉकीज के सामने लगभग 2663 वर्ग फूट का भूखंड अर्चना देवी जैन के नाम से है। उन्होंने यह जमीन चार अलग-अलग लोगों से खरीदी थी। जैसे ही कांप्लेक्स का निर्माण शुरू किया कुछ लोगों ने आपत्ति जता दी। नगर निगम प्रशासन 15 मई 2014 को नगरीय निकाय के प्रमुख सचिव को दिए जवाब में तमाम आपत्तियों को खारिज कर चुका है। निगम ने आवंटन और व्यवस्थापन को विधि अनुरूप बताया है। कहा है कि पंजीयन नामांतरण की प्रक्रिया साडा विघटन एवं नगर निगम गठन के बाद निगम की बैठक में पारित संकल्प तथा राज्य शासन के निर्देशानुसार ही किया गया। निगम का यह भी कहना कि भू स्वामी को भवन अनुज्ञा देने में भी कोई अनियमितता नहीं हुई है। चूंकि शिकायत पर जांच चल रही थी इसलिए निपटारे और मामला नस्तीबद्ध होने के बाद सामान्य सभा के संकल्प के आधार पर अनुज्ञा जारी की गई।

वर्तमान में मामला राज्य शासन के पास और हाईकोर्ट में है। 11 अगस्त को हाई कोर्ट ने मामले का निराकरण करने कहा था, लेकिन निगम ने अभी तक अपना पक्ष नहीं रखा है। जहां तक राज्य शासन द्वारा सामान्य सभा की राय मांगने का सवाल है निगम पहले भी कह चुका है कि भूमि नामांतरण एवं अनुज्ञा के लिए एक्ट में आयुक्त को अधिकृत किया गया है। यह सामान्य सभा का क्षेत्राधिकार में नहीं आता।