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रेडिएशन से समुद्री जल को बनाया जा रहा पीने लायक : बीके दत्ता
होसकता है कि तीसरा विश्वयुद्ध अगर हुआ तो वह पानी के लिए हो। बार्क के हेड की मानें तो समुद्र से के पानी को पीने लायक बनाया जा सकता है। और चेन्नई में यह हो भी रहा है। इसके अलावा झरनों और नदियों को सदानीरा करने के प्रोजेक्ट को भी सफलता पूर्वक अंजाम दिया जा सकता है। यह सब संभव है रेडिएशन तकनीक से। ह्यूमन रिसोर्स डेवलेपमेंट डिविजन (भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर) बार्क के हेड होमी भाभा नेशनल इंस्टीट्यूट के डीन बिजोन दत्ता शुक्रवार को भिलाई में थे। उन्होंने भास्कर से हुई बातचीत में न्युक्लियर प्रोग्राम की जानकारी देते हुए बताया कि भारत में जिस गति से काम चल रहे है उसके मुताबिक अगले तीस साल में देश यूरेनियम के मामले में आत्मनिर्भर हो जाएगा। डॉ.दत्ता ने बताया कि भारत में एटॉमिक प्रोग्राम तीन हिस्सों में चल रहा है। पहला सुरक्षा, दूसरा ऊर्जा तीसरा सोशल वेलफेयर में। सोशल वेलफेयर के रूप में कैंसर के इलाज के लिए आइसोटोप्स बनाए जा रहे हैं। यही नहीं बीज मसाले को रेडियेशन देकर उसकी क्वालिटी को साल भर बनाए रखने जैसे प्रोजेक्ट सफल हो चुके हैं।
चेन्नई में समुद्री पानी को मीठा करके पीने लायक बनाया जा रहा है। ऐसा तब किया गया जब सुनामी के कारण लोगों को मीठे पानी की समस्या पैदा हो गई थी। उनका कहना है कि आज भी बारिश के पानी को रोकने की व्यवस्था नहीं है बारिश का काफी हिस्सा समुद्र में चला जाता है। जानकारी दी कि जून-15 में चेन्नई के कलपक्कम में 500 मेगावॉट के रिएक्टर से बिजली मिल जाएगी।
भिलाई के हैं डॉ दत्ता
डॉ.दत्ताने हायर सेकंडरी स्कूल सेक्टर-7 से 1971 में मप्र बोर्ड की 11 वीं की परीक्षा मेरिट में उत्तीर्ण की। उन्होंने रविशंकर विश्वविद्यालय से मेकेनिकल में इंजीनियरिंग की। आईआईटी कानपुर से एम टेक तथा आईआईटी मुंबई से डाक्टरेट की उपाधि हासिल की। डॉ.दत्ता को टेक्निकल एक्सीलेंस अवार्ड हासिल है।
नदी को किया जा सकता है सदानीरा
कश्मीरमें सिर्फ बारिश के समय झरने में पानी रहने की समस्या से मुक्ति मिल चुकी है। रेडिएशन से पहाड़ झरने के बीच की बाधा को दूर करके पूरे समय तक झरना को रिचार्ज किया जा सकता है। पिछले पांच साल से कश्मीर में झरने का पानी सूख नहीं रहा है। आने वाले समय में नदियों को भी सदानीरा कर सकते हैं।
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