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निगम सभापति के फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामले में आया नया मोड़

7 वर्ष पहले
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भिलाईनिगम के इतिहास में सबसे ज्यादा वोटों से जीतने का रिकार्ड बनाने वाले अरोरा की फर्जी जाति का जिन्न फिर नए मोड़ पर है। शुक्रवार को शिकायतकर्ता समय लाल साहू ने कलेक्टर को अर्जी दी कि हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, उच्च स्तरीय छानबीन समिति, सब जगह अरोरा फर्जी साबित हो चुके हैं। अब तो एफआईआर की कार्रवाई की जाए। साथ ही यह चेतावनी भी दी कि अगर हमारी आवाज नहीं सुनी गई तो कलेक्टोरेट परिसर में अप्रिय स्थिति बन सकती है।

मामले में शिकायतकर्ता पिछड़ा वर्ग जनकल्याण समिति के अध्यक्ष समय लाल साहू से जब भास्कर ने बातचीत की तो बताया कि वे पहले भी पांच फरवरी 2014 को कलेक्टर से अरोरा पर कार्रवाई करने की मांग कर चुके हैं। कलेक्टर ने इस पर 30 अक्टूबर 2014 को तहसीलदार को कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। लेकिन अब तक इस मामले में हुआ कुछ नहीं। जबकि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश पर राज्य की उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि 2000 में वार्ड 22 से राजेंद्र अरोरा ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाकर चुनाव लड़ा था। दोष साबित होने के बावजूद वे आज तक पद पर बने हुए हैं। इसका शीघ्र निराकरण होना चाहिए। इस मामले में राजेंद्र अरोरा का कहना है कि मामला हाईकोर्ट के डबल बैच में पेंडिंग है। शिकायतकर्ता समय लाल साहू और उनके आका 14 साल से मेरी जाति की चिंता कर रहे हैं। यही चिंता अगर भिलाई की जनता के लिए करते तो लोगों को फायदा होता।

आखिर क्या है पूरा मामला

बकौल समय लाल साहू सन 2000 में हुए भिलाई निगम चुनाव में वार्ड 22 ओबीसी प्रत्याशी के लिए आरक्षित था। राजेंद्र अरोरा यहां से प्रत्याशी थे। जीते भी। आरोप लगा कि चुनाव लड़ने के लिए इन्होंने 10 अप्रैल 2000 को लोहार जाति का फर्जी अस्थाई प्रमाणपत्र बनाया। इसकी शिकायत समय लाल साहू ने उच्चस्तरीय छानबीन समिति से की। मामले की जांच हुई। और 23 जुलाई 2007 को समिति ने अरोरा की जाति को अवैध करार देकर विलोपित करने का आदेश दिया। इसके अगेंस्ट में राजेंद्र अरोरा कोर्ट गए। कहा कि बिना किसी छानबीन और गवाही लिए ही समिति ने उनकी जाति को फर्जी कहा है। इस पर हाईकोर्ट ने समिति को एक महीने के अंदर दोबारा जांच करने कहा। समिति ने दोबारा जांच की और कहा कि महज पांच गवाहों के आधार पर किसी की जाति साबित नहीं होती। अरोरा एक भी दस्तावेज पेश करने में असफल रहे जिससे उनकी जाति