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प्रदेश में रिसर्च के अवसर ज्यादा, पहल की जरूरत

6 वर्ष पहले
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साइंसकॉलेज दुर्ग में शनिवार को नेशनल सेमिनार की शुरुआत हुई। सेमिनार में देश के 12 राज्यों के जूलॉजी, प्राणीशास्त्र और बायोटेक्नोलॉजी के एक्सपर्ट मौजूद थे। सेमिनार का उद्घाटन बायोटेक्नोलॉजी विभाग, भारत सरकार नई दिल्ली के चीफ सलाहकार प्रोफेसर अरूण एस निनावे ने किया। सेमिनार में उन्होंने कहा कि, छत्तीसगढ़ खनिज संपदा के साथ-साथ जैव संपदा के क्षेत्र में भी अव्वल है। प्रदेश में जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोध तथा अन्य कार्य में अवसर ज्यादा है। इसलिए लोगाें को इसका फायदा उठाना चाहिए और प्रदेश का नाम रौशन करे।

जुलाजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रो. बीएन पांडेय ने पंचतत्व की व्याख्या करते हुए कहा कि, शिक्षा, पर्यावरण,ऊर्जा तथा रोजगार सभी एक दूसरे के पूरक है। इनमें से कोई एक भी घटक प्रदूषित होता है, तो पूरा वातावरण प्रभावित होता है। खाद्य सुरक्षा एवं कुपोषण पर विचार व्यक्त करते हुए प्रो. पांडेय ने नई युवा पीढ़ी से इस दिशा में शोध करने के लिए कहा। सेमिनार में आयोजन के सचिव अनिल कुमार, प्राणीशास्त्र की प्रोफेसर डॉ. उषा साहू, डॉ. दिव्या मिंज, डॉ. रेणु माहेश्वरी, डॉ. आरती परगनिहा, हेमा कुलकर्णी, डॉ. भावना पांडेय, प्रोफेसर प्रशांत श्रीवास्तव, डॉ. मधुलिका, छात्र संघ अध्यक्ष रश्मि राय आदि मौजूद थे।

6 तकनीकी सत्र होंगे

आयोजनके सचिव अनिल कुमार ने बताया कि दो दिवसीय संगोष्ठी में यूजीसी और छत्तीसगढ़ काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा प्रायोजित है। संगोष्ठी में कुल छह तकनीकी सत्र होंगे। इसमें 12 राज्यों के 50 से ज्यादा शोधकर्ता अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।

विशेषज्ञों ने कहा-

सेमिनारमें कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुशीलचंद्र तिवारी ने कहा कि, जुलाजिकल सोसायटी ऑफ छत्तीसगढ़ बेहतर कार्य करेगा। देश के टॉप वैज्ञानिकों के एक साथ विचार-विमर्श करने का सीधा नई पीढ़ी के शोधकर्ताओं और पीजी के छात्रों को मिलेगा।

साइंस कॉलेज में शनिवार को बड़ी संख्या में विशेषज्ञों को सुनने के लिए छात्र-छात्राएं जुटे।

करनी होगी व्यवस्था

छत्तीसगढ़जुलाजिकल सोसायटी के अध्यक्ष पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के प्रोफेसर एके पति ने छत्तीसगढ़ जुलाजिकल सोसायटी के गठन का उद्देश्य और भविष्य की कार्ययोजनाओं पर प्रकाश डाला। डॉ. पति ने बताया कि यूजीसी के निर्देश का पालन जरूरी है।