पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • शिक्षकों को ट्रेनिंग दी ही नहीं और पढ़ाने के लिए भेज दिया स्कूल

शिक्षकों को ट्रेनिंग दी ही नहीं और पढ़ाने के लिए भेज दिया स्कूल

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
जिलेके शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण के तहत शासन ने समायोजन तो कर दिया, लेकिन अब तक उन्हें ट्रेनिंग दी गई। सभी शिक्षकों को एक महीने की ट्रेनिंग के लिए डाइट और एससीआरटी जाना था। उन्हें एक दिन का भी प्रशिक्षण शासन ने नहीं दिया।

समायोजन करते ही सीधे उनकी नियुक्ति स्कूलों में कर दी गई। जिन शिक्षकों की रुचि गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों में नहीं थी, उन्हें मजबूरन ही पढ़ाना पड़ रहा है। वहीं बीए और हिंदी के टीचरों को गणित और विज्ञान के लिए नियुक्त किया गया। जबकि वे लंबे समय से विज्ञान और गणित जैसे विषयों से दूर रहे। अचानक उन्हें इसे पढ़ाने के लिए विभाग ने मजबूर तो किया, लेकिन बिना तैयारी के।

इधर जिले के सरकारी स्कूलों में 22 सितंबर से त्रैमासिक परीक्षा है। शिक्षकों को ट्रेनिंग दिए बिना ही स्कूल भेजा गया है। वहां परीक्षा की तैयारी क्या और कैसे हुई है? इसका किसी ने पता भी नहीं किया। अफसर स्कूलों का दौरा तो कर रहे हैं, इस बीच उन्हें फीडबैक दिया जा रहा है कि परीक्षा के हिसाब से कोर्स कंप्लीट है। यह अफसरों का दावा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

कोई दिक्कत नहीं

^शिक्षकोंको ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। इसकी सूची बन गई है। जल्द ही इसकी तारीख जाएगी। अभी शिक्षकों को कोई दिक्कत नहीं है।\\\'\\\' एएनबंजारा, डीईओ

ट्रेनिंग में नहीं भेजने से होगा ये नुकसान...

{स्कूलों में विषय विशेषज्ञों की कमी।

{ बच्चे सिर्फ थ्योरी पढ़ेंगे, प्रेक्टिकल में दिक्कत होगी।

{ परीक्षा परिणाम प्रभावित हाे सकता है।

{ टीचरों की रूचि नहीं के बराबर रहेगी, क्योंकि उन्हें पसंदीदा विषय नहीं मिला।

{ क्वालिटी एजुकेशन का मिशन कंप्लीट नहीं हो सकता।

शिक्षकों ने किया था विरोध

इसलिए नहीं दे रहे ट्रेनिंग

शिक्षाविभाग के एक बड़े अफसर का कहना है कि टीचर्स अपने स्कूल समय में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी की पढ़ाई कर चुके हैं। इसलिए उन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। शिक्षकों से बात की गई है, उन्होंने खुद इसे स्वीकारा है कि उन्हें ट्रेनिंग की जरूरत नहीं है। ढाई सौ शिक्षकों को मन पसंद से विषय दिए गए हैं।

जिले के विभिन्न शिक्षक संघों ने युक्तियुक्तकरण का विरोध किया था। संघों का कहना था कि व्यवस्था बदलने से पढ़ाई प्रभावित होगी। शासन ने संघों की मांग को किनारे कर दिया और अपनी नीति को लागू कर दिया। संघों की माने