शंकराचार्य धर्म पर करते थे चिंतन
शंकराचार्यकाशी सुमेरु पीठाधीश्वर चिन्मयानंद सरस्वती के शिष्यों भक्तों ने उनकी स्मृति में जेवरा सिरसा स्थित भागवत आश्रम एवं गौशाला में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया।
अहिवारा के विधायक सांवला राम डाहरे ने कहा कि ये मेरा परम सौभाग्य रहा कि कुछ समय पूर्व मैने शंकराचार्य का प्रत्यक्ष दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया था। वैशाली नगर कॉलेज के प्राचार्य महेशचंद्र शर्मा ने कहा कि शंकराचार्य ज्ञान तपस्या की साक्षात मूर्ति थे। भागवताचार्य मनोज पांडेय ने उपस्थित जन समूह को शंकराचार्य के जीवन वृत्त का परिचय दिया। छोटे बच्चों को भी बहुत प्रेम से शिक्षा प्रदान करते थे। हिंदू सनातन धर्म एवं भारत वर्ष की समृद्धि एवं सुरक्षा के लिए सतत चिंतन करते रहते थे सन्यास के कठोर नियमों का पालन करते हुए वर्षों तक पैदल भ्रमण करते हुए सभी प्रमुख तीर्थों की यात्रा की थी। शंकराचार्य हमारे मध्य अब भले ही शरीर के रुप में हो, लेकिन गुरू तत्व अविनाशी होता है प्रेमी भक्तों को सूक्ष्म रूप से अनुभव होता रहेगा।
उपस्थित सभी शिष्य गणों ने जेवरा सिरसा में एक केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया जिसमें शंकराचार्य के विभिन्न कार्यक्रमों की स्मृति को संजोकर रखा जाएगा। कार्यक्रम में डॉ. रामस्वरूप शर्मा, उपायुक्त भू-अभिलेख हरिकृष्ण शर्मा, शिवकुमार शुक्ल, राममूर्ति शर्मा, फेकूप्रसाद तिवारी , चंद्रहास अग्रवाल, ललित तिवारी, शारदा दुबे, भरत दुबे, कृष्णमुरारी शर्मा, रामअवतार शर्मा, प्रशांत तिवारी, बलदेव निषाद, गोविंद यादव, सागर चौबे आदि मौजूद थे।
कार्यक्रम में विधायक सांवलाराम समेत अन्य वक्ताओं ने रखे विचार।