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नहरों पर होगा निगम का कब्जा शासन को भेजा गया प्रस्ताव

6 वर्ष पहले
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नगरनिगम भिलाई-दुर्ग क्षेत्र में आने वाले जलसंसाधन विभाग की नहरों को अतिक्रमण से बचाने के लिए विशेष तैयारी की जा रही है। इसके लिए नहरों को निगमों को सौंपा जाएगा। इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। ताकि दुर्ग भिलाई की सीमा में आने वाली नहरों को उन्हें हस्तांतरित किया जा सके। ताकि नहर की जमीन का उपयोग निगम सीवरेज, ड्रेनेज सिस्टम से लेकर अन्य जरूरी कामों में कर सके।

दोनों शहरों का तेजी से विस्तार हो रहा है। कृषि योग्य जमीन नहीं के बराबर है या है ही नहीं। बावजूद पूर्व में सिंचाई के लिए तैयार की गई नहर अब भी अस्तित्व में है। नहर हर समय सूखी रहती है। बारिश के दिनों में कुछ समय के लिए उनमें बहाव की स्थिति बनती है। इसके कारण नहरों पर लगातार अतिक्रमण हो रहे हैं। लगातार शिकायतों के बाद भी जल संसाधन विभाग नहरों को सुरक्षित रख पाने में नाकाम रहा है। इधर निगम के आधिपत्य वाली जगह भी लगातार कम हो रही है, जिसके कारण विकास के कई जरूरी काम नहीं हो रहे हैं। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने शहर से गुजरने वाली नहरों को निगम को हस्तांतरित करने का फैसला किया है।

फिलहाल शासन स्तर पर मामला विचाराधीन है, निगम से मांगें सुझाव

वर्तमानमें जल संसाधन विभाग की तरफ से प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। ताकि निगम को इन नहरों को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हो सके। फिलहाल शासन स्तर पर मामला विचाराधीन है। खबर है कि शासन ने निगमों से इस संबंध में सुझाव मांगें है कि उन्हें उक्त जगह उपलब्ध कराई जाती है, तो निगम वहां क्या काम कराएगा। निगमों ने अभी जवाब नहीं दिया है। जवाब के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

दुर्ग-भिलाई की कई नहर का अस्तित्व ही समाप्त, कई पर हो चुके हैं अतिक्रमण

तेजीसे विस्तार के कारण दोनों शहरों की नहरें गायब हो चुकी हैं। कई का तो अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है। इनमें बोरसी, जुनवानी स्थित चिखली नहर शामिल हैं। इसके अलावा नहर अब नाले का रूप ले चुकी है। जहां केवल निकासी का पानी नजर आता है। हर तरफ गंदगी रहती है। इसके अलावा सिकोला, कोटनी नहर, कोहका माइनर जैसी नहर-नाली पर अतिक्रमण है। शासन की योजना है कि उक्त जगहों पर कुछ काम किया जाए। जरूरत के हिसाब से उक्त जगहों को उपयोग में लाया जाए।

हस्तांतरित करने हो रहा तेजी से काम

^शासनको प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। दुर्ग भिलाई की डेड नहरों को निगमों को हस्तांतरित किया जाना है। इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है। ताकि नहर की जगह का समुचित उपयोग हो सके। वहां कोई बेहतर काम कराया जा सके। देखरेख के अभाव में हर समय अतिक्रमण का खतरा बना हुआ है।\\\'\\\' पीकेअग्रवाल, कार्यपालन अभियंता, जलसंसाधन विभाग दुर्ग

जानिए : कहां कौन सी नहर, लंबाई क्षेत्र

कोटनी नहर आठ किलोमीटर 32बंगला से तितुरडीह, एफसीआई, उरला, बघेरा होते हुए कोटनी तक

पोटियानहर दो किलोमीटर ठगड़ाबांध से जेल तिराहा होते हुए महाराजा चौक, पोटिया तक

कोहकामाइनर तीन किलोमीटर खम्हरियावितरण नहर से सुपेला, शारदा पारा, कैम्प-दो होते हुए नंदिनी रोड, खुर्सीपार तक

कातुलबोड़आधा किलोमीटर कातुलबोड़से कातुलबोड़ में

सिकोलानहर दो किलोमीटर सिकोलाभाठा,कृषि उपज मंडी से होते हुए कोटनी नहर में मिलती है।

चिखलीडेढ़ किलोमीटर चिखलीमाइनर खम्हरिया वितरण नहर से निकलकर चिखली तक।

करहीडीह1.2 किलोमीटर कुटेलाभाठासे करहीडीह तक

फार्मचैनल रूआबांधा- 2.1 किमी रूआबांधासे मैत्री नगर, मरोदा

कसारीडीहनहर-2 किलोमीटर कसारीडीहसे केलाबाड़ी क्षेत्र तक