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विदेशों में कोयला खदान खरीदने बनी कंपनी का होगा री-स्ट्रक्चर

7 वर्ष पहले
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विदेशोंमें कोयला खदानें खरीदने के लिए बनाई गई भारतीय कंपनी इंटरनेशनल कोल वेंचर प्राइवेट लिमिटेड (आईसीवीएल) का पुनर्गठन होगा। संगठन के मुखिया सेल चेयरमैन सीएस वर्मा ने इस्पात मंत्रालय को पत्र लिखा है। यह नौबत इसलिए आई क्योंकि कंपनी के दो सदस्य सीआईएल और एनटीपीसी अलग हो गए हैं।

आईसीवीएल ने अफ्रीकी देश मोजाम्बिक में 2.6 बिलियन क्षमता वाले कोल माइंस का अधिग्रहण कर लिया है। इस माइंस में भी कोयले की क्वालिटी आस्ट्रेलिया से आने वाले हार्ड कुकिंग कोल के सामान है। जिसकी सबसे अधिक डिमांड बीएसपी में है। लिहाजा इस सौदे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

2009में हुआ था गठन:आईसीवीएल कागठन 2009 में 10 हजार करोड़ रुपए के साथ किया गया था। इसमें सेल के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां सीआईएल, आरआईएनएल, एनएमडीसी एनटीपीसी शामिल हैं। 28 जुलाई को रियो टिंटो से बेंगा माइंस का सौदा होने के बाद से ही सीआईएल एनटीपीसी ने आईसीवीएल से अलग होने का मन बना लिया था।

42% शेयर का होगा बंटवारा

आईसीवीएलमें सेल का 28 प्रतिशत, सीआईएल एनटीपीसी का 42 फीसदी शेयर हैं। बाकी कंपनियों की हिस्सेदारी 14-14 प्रतिशत है। इस्पात मंत्रालय से पुनर्गठन को मंजूरी मिलने के बाद सीआईएल एनटीपीसी के शेयर सेल आरआईएनएल, एनएमडीसी समान रूप से बांटे जाने की योजना है।

अभीआस्ट्रेलिया पर है निर्भर

बीएसपीमें स्थानीय कोल की खपत महज 30 फीसदी है, बाकी 70 फीसदी कोयला आस्ट्रेलिया से आयात कर रहा है। इसमें उसे बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है। मोजाम्बिक में खुद का माइंस होने से बीएसपी को सस्ता कोयला तो मिलेगा ही, आस्ट्रेलिया की अपेक्षा इस अफ्रीकी देश की दूरी भी कम होने के कारण परिवहन पर भी कम खर्च होगा।