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दृष्टिहीन गरीब बच्चों ने छोड़ दिया विद्यालय

7 वर्ष पहले
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कैंपक्षेत्र स्थित दिव्य ज्योति नेत्रहीन विद्यालय से पालक अपने बच्चों को ले जा रहे हैं। प्रताड़ना की शिकायत के बाद से अधिकतर पालकों ने अपने बच्चे वहां रखना ठीक नहीं समझ रहे हैं। इससे अब उनकी पढ़ाई का सवाल खड़ा हो गया है। अधिकतर बच्चे गरीब परिवार से हैं। जिले में दृष्टिहीन बच्चों के लिए सरकारी स्कूल नहीं है। विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों की पढ़ाई के लिए प्रशासन की ओर से कोई प्रयास नहीं किया। इसके बाद रोटरी चेरिटेबल ट्रस्ट इन बच्चों की जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार हो गया।

मोहल्ले के लोगों ने दिव्य ज्योति विद्यालय में बच्चों को प्रताड़ित करने की शिकायत की थी। विद्यालय संचालक के बेटे पर विद्यालय की एक बच्ची के साथ छेड़छाड़ का आरोप भी लगाया गया लेकिन जांच में यह सही नहीं पाया गया। बाकी शिकायतों के बारे में प्रशासन की ओर से भी गोलमोल जवाब दिया जा रहा है। पुलिस भी बिना निर्देश के कार्रवाई के पक्ष में नहीं है। लेकिन इस घटनाक्रम से विद्यालय प्रबंधन से पालकों का विश्वास उठ गया है। वे जांच वाले दिन ही अपने बच्चों को ले जाने लगे थे। लेकिन प्रशासन ने उनकी सुध नहीं ली।

बच्चे आएं तो स्वागत

रोटरीचेरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन एमसी जैन, अध्यक्ष आरटी रामचंद्रन और सचिव ज्ञानचंद जैन ने कहा कि उनका ट्रस्ट तो दृष्टिहीन बच्चों के लिए नयनदीप आवासीय विद्यालय का संचालन कर रहा है। ट्रस्ट ऐसे बच्चों को आवासीय सुविधा के साथ नि:शुल्क शिक्षा दे रहा है। यदि कोई पालक अपने बच्चे को यहां प्रवेश दिलाना चाहते हैं तो हम उनका स्वागत करेंगे।

पालक सामने आएं मदद करेंगे

{दिव्य ज्योति विद्यालय में छेड़छाड़ प्रताड़ना के शिकायत की जांच पूरी हो गई?

{{हां, लगभग हो गई। जांच में छेड़छाड़ वाली बात सामने नहीं रही है।

{और प्रताड़ना की?

{{हां.. उसे भी देखते हैं।

{यानि जांच कंप्लीट नहीं हुई?

{{मुख्य शिकायत तो गलत लग रही है।

{शिकायत के बाद विद्यालय छोड़ रहे नेत्रहीन बच्चों के आगे की पढ़ाई बारे में प्रशासन ने क्यों कुछ नहीं सोचा?

{{देखते हैं। उनके लिए भी कुछ करेंगे।

{कैसे करेंगे, जिले में तो नेत्रहीन बच्चों के लिए सरकारी विद्यालय नहीं है?

{{कोई समाजसेवी संस्था की मदद लेंगे।

{कब .. जब सारे बच्चे जा चुके होंगे तब? क्या ये सच नहीं है कि प्रशासन को इसका ध्यान ही नहीं है?

{{है।

{फिर प