(दुर्ग बायपास पर रविवार को ओवरलोडिंग वाहन गुजरता हुआ। पास में ही उड़नदस्ता का जवान बैठा हुआ। )
भिलाई| शहर में ओवर लोडिंग का खेल पहले जैसा ही चल रहा है। औसतन सभी वाहन निर्धारित क्षमता से अधिक माल ढो रहे हैं। छोटे-छोटे माल वाहक भी इसमें पीछे नहीं हैं। कोई रोकने वाला है टोकने वाला। एक चेक पोस्ट से महज एक घंटा में सौ ओवर लोड वाहन गुजर रहे हैं। टूटती सड़कें और जरा- सी बाधा आने पर पलट जाने वाले इन वाहनों से रोज ही दुर्घटनाएं हो रही हैं। खास बात ये है कि जिम्मेदार अधिकारी इस सब के लिए खुद को दोषी नहीं मानते। वे ट्रांसपोर्टर भी नहीं जो इसके लिए सीधे जिम्मेदार हैं। वो तो शासन को ही दोषी बताते हैं।
फिलहाल दुर्ग जिला परिवहन विभाग महज 14 कर्मचारियों-अधिकारियों का स्टाफ बनकर रह गया। जबकि जरूरत 135 के स्टाफ की है। जिम्मेदार कह रहे, हमारे पास स्टाफ नहीं। कार्रवाई कैसे करें।
ओवरलोडिंग का गणित ऐसे समझिए : गुजरात मॉडल इफेक्टिव है। स्टेट बॉर्डर पर वजन तौलने का ऑनलाइन सिस्टम लगा हुआ है। जिसकी मॉनिटरिंग अहमदाबाद से होती है। एक टन एक्सट्रा माल पर 2000 रुपए फाइन। जिसका पैसा ट्रेजरी में जमा होता है। बार-बार पकड़े जाने पर फाइन बढ़ता जाता है।
आरटीओ और ट्रांसपोर्टर दोनों की मिली भगत
आरटीओ इन पर कार्रवाई नहीं करता ताकि घूस ले सकें।
ओवर लोडिंग करते हैं। ताकि ज्यादा मुनाफा कमा सकें
पब्लिक पिसती है क्योंकि रिश्वत और चालान की लागत व्यापारी पब्लिक से ही वसूलते हैं।
निर्धारित क्षमता: 25 टन
फिलहाल 35 टन तक माल ढोया जा रहा।
निर्धारित क्षमता: 14 टन
फिलहाल20 टन तक माल ढोया जा रहा।
हमने पूछा- स्टाफ कम तो बढ़ाते क्यों नहीं, तो ये जवाब मिला
^हम तो दो साल से विभाग में कर्मचारियों अधिकारियों की भर्ती का प्रस्ताव शासन को दे चुके हैं। लेकिन पिछले बजट में यह शामिल नहीं हो पाया। अगली बजट में जरूर शामिल हो जाएगा। विभाग में स्टाफ बढ़ाने की मंशा शासन की भी है।” हेमकृष्ण राठौर, एडीशनल कमिश्नर परिवहन विभाग
सामाजिक मुद्दों के विचारक शेषनारायण शर्मा का कहना है कि ज्यादातर खाद्यसामाग्री या हमारी दैनिक उपभोग के सामानों की आवक जावक भारी वाहनों से होती है। ये अक्सर ओवरलोडेड होती हैं। अगर कोई चेकपोस्ट पर वह पकड़ा जाता है तो वाहन चालक रिश्वत देकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश करता है। आरटीओ रिश्वत ले तो चालान काटेगा। इन दोनों खर्चों को व्यापारी माल की लागत में जोड़ देता है। व्यापारी जब पब्लिक के पास सामान लेकर पहुंचता है तब वह महंगी हो चुकी होती है। अगर ट्रक ओवरलोड नहीं होता तो रिश्वत और चालान देने की जरूरत नहीं पड़ती। उसका फिजूल खर्चा माल के लागत में भी नहीं जुड़ता। तब इसका भार भी आम आदमी को नहीं भुगतना पड़ता।
जिम्मेदारों की भूमिका : आरटीओ,खनिज विभाग, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन के अफसर अपनी ड्यूटी ही निभा लें तो मजाल है कि लोडिंग स्पॉट पर गड़बड़ी हो और ट्रांसपोर्टर धांधली कर सकें। दरअसल जिनके ऊपर ओवरलोडिंग को रोकने की जिम्मेदारी है वही बढ़ावा दे रहे हैं। केवल आरटीओ बल्कि खनिज विभाग भी धांधली के खेल में शामिल है। जिला प्रशासन और पुलिस के जिम्मेदार अफसर संस्थागत भ्रष्टाचार में शामिल हैं। यक्ष प्रश्न कि ये ईमानदार प्रयास कब करेंगे।
ट्रांसपोर्टिंग : ट्रांसपोर्टर्स सिर्फ मुनाफा देखते हैं। इनकी नीयत साफ हो तो समस्या खत्म हो जाएगी। पर ऐसा नहीं होता। ट्रांसपोर्टर्स ने संघ बना रखे हैं। जो प्रेशर ग्रुप का काम करते हैं। दुर्ग में रेत परिवहन संघ और खनिज परिवहन संघ एक्टिव हैं। ये टोकन के विरोध की बात कह रहे हैं। लेकिन ओवरलोडिंग बंद करना नहीं चाहते। यक्ष प्रश्न कि मूल समस्या तो ओवरलोडिंग ही है। ये ट्रांसपोर्टर कब ओवलोडिंग बंद करने की पहल करेंगे।
लोडिंग स्पॉट : वह स्थान जहां पर रेत, खनिज सहित खाद्यान्न (धान-चावल-दलहन-तिलहन) और अन्य सामानों की लोडिंग होती है। इसमें रेत और खनिज का हिस्सा 70 फीसदी है। ओवरलोडिंग की शिकायत इनसे ही जुड़ी है। नियम के मुताबिक शासन ने क्षमता निर्धारित कर रखी है। अगर उसके मुताबिक लोडिंग हो तो समस्या यहीं खत्म हो जाती है। तथ्यों पर जाएं तो पूरे प्रदेश में लोडिंग स्पॉट पर कहीं भी धर्मकांटा नहीं है। यक्ष प्रश्न कि क्या इस व्यवस्था को बनाने की पहल होगी?
भास्कर लाइव
दोपहर 01.30 बजे
पुलगांवचौक। यहां राजनांदगांव और बालोद की ओर से आने वाली गाड़ियों का स्टापेज है। रविवार को दोपहर एक बजे रेत और ईट से भरे तीन माजदा पहुंची। तीनों में रेत और ईट भरे हुए थे। जितनी क्षमता है, उससे कहीं अधिक। यहां खनिज विभाग की चौकी है। चौकी में बैठे कर्मचारी सिर्फ रायल्टी पर्ची देखते हैं, ये नहीं देखते कि वाहन ओवरलोड है कि नहीं? कई बार आरटीओ का उड़नदस्ता भी यहां पहुंचता है, आज हालांकि यहां ऐसा कोई अमला नजर नहीं आया। लेकिन पुलिस की गाड़ी वहां से दो बार गुजरी। कुछ जवान भी वहां तैनात थे। किसी ने भी इन वाहनों पर ध्यान नहीं दिया।
दोपहर 12.30 बजे
राजनांदगांव-दुर्गबायपास में बाफना टोल प्लाजा के सामने आरटीओ का वर्दीधारी उड़नदस्ता चेकपोस्ट पर तैनात है। राजनांदगांव की ओर से धड़ल्ले से ओवरलोडेड वाहन रहे हैं। एक 10 चक्का ट्रक की क्षमता 25 टन है, लेकिन उसे देखने से लग रहा है कि उसमें 5 टन से ज्यादा ओवरलोड माल है। उसे भी आरटीओ ने रोका नहीं। एक हाइवा, जिससे माल छलक रहा था। नहीं रोका। आधे घंटे में 25 से 30 ओवरलोडेड वाहन वहां से गुजरे। इनमें से आरटीओ ने एक भी वाहनों को नहीं रोका। उन्हें बिना कुछ कहे जाने दिया। ये वाहन शहर में भी पहुंचे। जहां पुलिस ने भी ध्यान नहीं दिया।
निर्धारित क्षमता: 42 टन
फिलहाल70 टन तक माल ढोया जा रहा।
चक्का
20
निर्धारित क्षमता: 35 टन
फिलहाल55 टन तक माल ढोया जा रहा।
चक्का
14
चक्का
10
चक्का
08
ओवरलोड वाहनों से भ्रष्टाचार और उसके कारण बढ़ रही है महंगाई
आप जानते हैं
ओवरलोडिंग: 3 कड़ियां, जिस पर चिंतन करना चाहिए
भास्कर लाइव :
अब तो आप लोगों के लिए अच्छा हो गया, कोई ओवरलोड देखता है टोकन पूछता है ?
- हां अब राहत तो है, पर हम पहले भी कहां ज्यादा ओवरलोड चलते थे।
- हां, लेकिन जो चल रही हैं वो ओवरलोड ही तो हैं न?
- ज्यादातर नहीं हैं। हम ईंट, गिट्टी, मुरुम, सीमेंट वगैरह का परिवहन करते हैं। रेत वगैरह में ओवरलोड होता है।
- पर आप ओवरलोड करते ही क्यों हैं ये जानते हुए भी कि इससे दुर्घटनाएं हो रही हैं? {{अब अवैध वसूली रुक गई है, ओवरलोड नहीं करेंगे।
- ये जान की कीमत से ज्यादा है ?
नहीं, जान सबसे कीमती है। पर हमारा कहना है कि इसके लिए केवल हम ही जिम्मेदार नहीं है। सभी को अपनी-अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
- अब तो परिवहन विभाग का टोकन सिस्टम बंद हो गया, आप लोगों का फायदा हो गया। जितनी मर्जी ओवर लोड भरो, कोई रोकने वाला टोकने वाला क्यों?
- नहीं सर जी। हां, टोकन सिस्टम बंद होने से हमें राहत जरूर मिली है। आरटीओ वाले डेरा डंडा समेट रहे हैं।
- लेकिन क्या मतलब, आप लोग तो ओवर लोड चलते रहेंगे, एक्सीडेंट होते रहेंगे? दोषी आप लोग नहीं हैं क्या?
- नहीं-नहीं ऐसा नहीं है।
- क्या कोई जबर्दस्ती आपके वाहनों पर ओवर लोड कर देता है?
- हम तो 15 किमी दूर रहते हैं। उधर वाहन ओवरलोड कर दिया जाता है।
- ऐसा एक ही दिन होगा। बाकी दिन तो मना कर सकते हैं। और आपका ड्राइवर क्या करता है?
-हां, लेकिन लोगों का क्या करें। उन्हें तो भर्ती से ज्यादा भरा माल चाहिए। अब नहीं करेंगे।
- ओवर लोड वाहन तो अब भी चल रहे हैं, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं करते हैं?
- कहां चल रहे हैं, अब सब बंद है। रेत की गाड़ियां तो अंडरलोड हैं।
- ऐसा क्या कर दिया आपने कि पहले चल रहा था और अब बंद हो गया?
- अब कड़ाई कर दी है, पहले की व्यवस्था भी बदल दी है।
- यानि आप लोगों की टोकन वाली व्यवस्था के कारण ही हो रहा था।
- देखिए, ओवर लोड वाहन तो ट्रांसपोर्टर और ड्राइवर चलाते हैं।
- और आप चलने देते हैं? अब जो भी हो, पर अब नहीं।
- फोरलेन और बायपास पर आज भी ओवरलोड गाड़ियां चल रही हैं।
- अच्छा… हां, हम कार्रवाई करेंगे।
- खानापूर्ति.. पहले क्यों नहीं की।
- असल में हम दूसरे कामों में व्यस्त थे। स्टाफ भी तो हमारे पास कम है।
धड़ल्ले से जारी है ओवरलोडिंग।