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पर्ची सिस्टम लागू हुआ तो तौल में कम हुआ 40 टन कचरा, एक लाख की हो रही बचत

7 वर्ष पहले
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भिलाई। किवार पहले शहर से रोज 230-240 टन कचरा उठा रहा था। निगम ने पर्ची सिस्टम लागू किया तो 40-50 टन कचरा कम हो गया। अब किसी दिन 180 तो किसी दिन 140 टन ही कचरा ट्रेंचिंग ग्राउंड में अनलोड हो रहा है। जाहिर सी बात है या तो कचरे के तौल में हेराफेरी हो रही थी या फिर कचरे के साथ मिट्टी-पत्थर भी लोड कर दिया जा रहा था। गड़बड़ी रुकने से अब निगम का रोज करीब एक लाख रुपए बच रहा है।

नगर निगम ने शहर की सफाई का ठेका भिलाई दुर्ग वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड (किवार) को दिया है। करार के मुताबिक निगम किवार को 1948 रुपए प्रति टन कचरे के हिसाब से भुगतान करता है। किवार की सफाई व्यवस्था पर शुरू से सवाल उठते रहे हैं। कचरे के साथ मिट्टी और पत्थर तौलाते कई बार पकड़े गए। हर निगम ने मामूली फाइन लगाकर मामले को निपटा दिया। अब जब पर्ची सिस्टम लागू किया है, कचरे के तौल में कमी गई है।

क्या है पर्ची सिस्टम :पहले मात्र तौल के दौरान ही पर्ची कटती थी। अब व्यवस्था में बदलाव कर एक ही नंबर की तीन पर्चियां अलग-अलग स्थानों से कटवाना पड़ रहाी है। पहली पर्ची प्राइमरी कलेक्शन सेंटर से कटती है जहां से कचरा उठाते हैं। उस पर एसआई का हस्ताक्षर होता है। इससे मिट्टी और पत्थर भरकर ले जाने जैसी गड़बड़ी पर रोक लगी है। दूसरी पर्ची तौल के समय और तीसरी पर्ची ट्रेंचिंग ग्राउंड में कचरा अनलोडिंग के समय काटी जा रही है।

व्यवस्था दुरुस्त करने यह करने जा रहा है निगम प्रशासन
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ऐसे पकड़ी गड़बड़ी

तो पांच करोड़ बच सकता था : निगम के अफसरों को गड़बड़ी की जानकारी है। बल्कि मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता। यही पर्ची सिस्टम अगर शुरू से लागू कर दिया गया होता तो और अभी जैसी मॉनीटरिंग पहले की होती तो, शहर भी साफ-सुथरा रहता और एक साल में निगम का लगभग 5 करोड़ रुपए बच सकता थी।


1948 रुपए प्रति टन कचरे के हिसाब से किवार को भुगतान करता है निगम

बदल जाएंगे एसआई : अब कचरा तौल होने वाले धर्मकांटा में सेनेटरी इंस्पेक्टर भी तीसरे दिन बदल जाएंगे। सभी एसआई की पारी-पारी से ड्यूटी लगाई जाएगी। ऐसा तौल में हेरा-फेरी को रोकने के लिए किया जा रहा है।

नहीं चलेगी मनमर्जी : निगम के एसआई लोगों की शिकायतों, मौसम और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र में सफाई कामगार लगाने कहते हैं, लेकिन किवार जोनल इंचार्ज अपने हिसाब से ही काम करते हैं। निगम प्रशासन ने अपने सभी एसआई को सख्त हिदायत दी है कि शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी निगम की है इसलिए किवार से काम लें।

मंगाई है जानकारी : निगम प्रशासन ने सोमवार को किवार से सफाई कार्य में लगे सभी संसाधनाें की जानकारी मंगाई है। इसके बाद भौतिक सत्यापन भी किया जाएगा कि सामग्रियां सिर्फ कागज में दिखावे के लिए हैं कि शहर की सफाई कार्य में भी लगाई गई हैं।

एक कर्मचारी को दो जाेन का इंचार्ज : जोन3 और 4 का जोनल इंचार्ज एक ही है। जोनल इंचार्ज को निगम के एसआई के साथ तालमेल बनाकर काम करना है। पूरे जाने क्षेत्र की मॉनीटरिंग और सफाई करवाने की जिम्मेवारी जोनल इंचार्ज की होती है। निगम के एसआई बताते हैं कि जोन-3 की समस्या बताने पर वे कहते हैं कि मैं अभी जोन-4 में हूं और जोन-4 वाले कोई शिकायत बताते हैं तो जोन-3 का बहाना बनाते हैं।

25 रिक्शे मगर कचरा कलेक्ट कर रहे थे सिर्फ 18 : किवार ने डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने के लिए निगम के 144 रिक्शे किराए पर ले रखा है। कैंप क्षेत्र में 25 रिक्शे लगना बताया गया, लेकिन कचरा कलेक्शन करने में लगे थे सिर्फ 18 रिक्शे। ऐसे ही कैंप क्षेत्र में 13 श्रमिक झाड़ू लगाने की जानकारी दी गई। निगम के अफसर उपस्थिति चेक करने पहुंचे तो मौके पर कोई नहीं मिला। तब यह बताया गया कि लंच छुट्टी हुई है। एक घंटे बाद 13 श्रमिकों को उपस्थित किया गया, जिसमें 9 लोगों के हाथों में झाड़ू था।
किवार ने बताया 1025, आए थे 729 श्रमिक : स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक दिन पहले किवार के सफाई कामगारों की सरप्राइज चेकिंग की। कंपनी के जाेनल इंचार्ज ने कुल 1025 श्रमिक बताया पर निगम के एसआई ने जब उपस्थिति चेक की तो 729 श्रमिक ही थे। निगम को श्रमिकों की संख्या से कोई मतलब नहीं है। शहर की सफाई और कचरे का तौल के हिसाब से भुगतान करना है, लेकिन शहर की प्रॉपर सफाई नहीं होने की वजह श्रमिकों की कमी ही है।

किवार से जैसा काम कराना चाहेंगे कंपनी को करना पड़ेगा : कमिश्नर एनके दुग्गा के निर्देश पर शहर की सफाई की मॉनीटरिंग की गई। इस दौरान कई गड़बड़ियां पकड़ में आई है। उसे दुरुस्त किया जा रहा है। पर्ची सिस्टम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। शहर की सफाई की जवाबदारी नगर निगम की है। हम किवार से जैसे काम कराना चाहेंगे कंपनी को करना पड़ेगा। संसाधनों की भी जानकारी मंगाई है।'' अशोक पहाड़िया, प्रभारीस्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम

कास्ट कटिंग के चलते कचरा उठाने वाली गाड़ियां कम किए हैं
सीधी बात : प्रशांत मिश्रा, किवार
- पहले रोज 240-250 टन कचरा उठाते थे। अब तौल में अचानक 40-50 टन की कमी कैसे गई है?
- कॉस्ट कटिंग के चलते कचरा उठाने वाली किराए की सभी गाड़ियां बंद कर दी है। अब केवल कंपनी की ही गाड़ियों से कचरा उठा रहे हैं। तौल में कमी आना स्वभाविक है।
- इसका मतलब यह है कि अब आप लोग शहर की प्रॉपर सफाई नहीं कर रहे हैं। आप लोगों को शहर की सफाई, लोगों की सेहत की नहीं कॉस्ट कटिंग और कंपनी के प्रॉफिट की चिंता ज्यादा है?
- नहीं..नहीं…, ऐसा बिलकुल नहीं है। डोर-टू-डोर क्लेक्शन और रोड स्वीपिंग तो रोज हो रही है। केवल कलेक्शन सेंटर से कचरा उठाने में चेंजेंस के किए हैं।
- कैंप क्षेत्र में 25 रिक्शे बताए गए, काम में तो सिर्फ 18 लगे थे?
- हो सकता है रिपेयरिंग के लिए वर्कशॉप में भेजा गया रहा होगा। ऐसा होता है।
- जोन इंचार्ज निगम के एसआई की बात नहीं मानते?
- बिना कोआर्डिनेशन के काम हो नहीं सकता। हो सकता है निगम के अधिकारी कोई आउट ऑफ वे काम बताते होंगे।
- आउट ऑफ वे से आपका क्या मतलब है?
- मसलन ड्यूटी के बाद कही बता देते होंगे तो कैसे कर पाएंगे। कंपनी में श्रमिकों का ड्यूटी ऑवर तय है न।
ट्रेचिंग ग्राउंड में ट्रैक्टर से कचरा अपलोड करते किवार के कर्मचारी।