कविता के शब्दों काे पहाड़ी रंगों से कर रहे अनुवाद
कवि जयदेव की कविता गोविंद, केशवदास की रसिक प्रिया और बिहारी की ‘सतसई’ के शब्दों का अनुवाद रंगों से स्टूडेंट्स ने किया।
राधा-कृष्ण, नायक-नायिका और सखी-दूती की हर गतिविधियों को पहाड़ी चित्रकारी कला शैली में रंगों से उकेरा। पिछली चार सदी से जम्मू से गड़वाल तक पहाड़ी शैली की विधा में दुर्ग-भिलाई के भावी चित्रकारों ने रंगों से जान भर दी। पद्मश्री हिमाचल प्रदेश के चित्रकार विजय शर्मा के सानिध्य में शासकीय डॉ. वावा पाटणकर महाविद्यालय दुर्ग में सैकड़ों स्टूडेंट्स ने रंगों की जादूगरी सीखी। रजा फाउंडेशन के सहयोग से महाविद्यालय चित्रकला विभाग की ओर से 15 फरवरी तक पहाड़ी शैली की चित्रकारी के लिए नेशनल वर्कशॉप आयोजित है। उद्घाटन इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने किया। प्राचार्य प्रो. दीपक कारकुन, संयोजक प्रोफेसर योगेन्द्र त्रिपाठी, बीएसपी के सीओसी विजय मैराल, पीआरओ प्रशांत तिवारी अादि ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
अस्तित्व खतरे में : पहाड़ी चित्रकारी को लेकर पद्मश्री विजय शर्मा का कहना है कि चार सौ साल पुरानी इस विधा का अस्तित्व अब खतरे में है। सरकार इस ओर ध्यान ही नहीं दे रही हैं। वे उदासीन हैं। लाहौर यूनिवर्सिटी में मिनेचर पेंटिंग स्नातक व स्नातकोत्तर में एक विषय में पढ़ाया जा रहा है।
खैरागढ़ विवि करे पहल रोजगार की संभावना
पद्मश्री शर्मा का कहना है कि खैरागढ़ यूनिवर्सिटी इस क्षेत्र में कारगर काम कर सकती है। कुलपति से चर्चा की जाएगी। एक विषय के रूप में शामिल करने से नई किरण फूटेगी। मिनेचर पेंटिंग सीखने वालों का ग्राफ भी बढ़ेगा। पहाड़ी चित्रकारी में अनुशासन होता है। इसकी बारीकी का अंदाजा हर कोई लगा सकता है। एक-एक भाव-भंगिमाओं और परिस्थितियों को ईमानदारी से उकेरा जाता है। लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाती है।
नेहरू आर्ट गैलरी में लगेगी प्रदर्शनी : बीएसपी के पीआरओ प्रशांत कुमार तिवारी का कहना है कि पद्मश्री विजय शर्मा व अन्य कलाकारों द्वारा तैयार पेटिंग की प्रदर्शनी नेहरू आर्ट गैलरी में 12 फरवरी को लगाई जाएगी। साथ ही यहां तैयार स्टूडेंट्स की चुनिंदा पेंटिंग काे भी प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि पहाड़ी शैली की इस अनूठी विधा को लोग देख सकें।
मंगलवार को कॉलेज परिसर में लगी क्लास में चित्रकार ने चित्रकला की बारीकियां बताई।
वर्कशॉप