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बोर खनन प्रतिबंध पर कलेक्टर की मुहर, जब्ती के साथ जुर्माना भी

5 वर्ष पहले
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जरूरत के हिसाब से संतुलित बोर हो सकेंगे, सारे बोर प्रशासन की निगरानी में होंगे

सिटी रिपोर्टर|दुर्ग

लगातार भू-जल स्तर गिरने व पीएचई अलर्ट के बाद कलेक्टर आर शंगीता ने जिले में नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगा दिया है। अब बिना प्रशासनिक अनुमति के कहीं भी कोई बोर नहीं करा सकेगा। कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से आदेश लागू कर दिया है। दैनिक भास्कर ने एक दिन पहले ही बोर खनन पर प्रतिबंध की खबर प्रकाशित की थी। हालांकि कलेक्टर के हस्ताक्षर नहीं होने से मामला एक दिन के लिए टल गया। मंगलवार को कलेक्टर की मुहर के साथ ही पूरे जिले में बोर खनन पर प्रतिबंध लग गया।

गौरतलब है कि जिले में इस वर्ष तीन सौ मिलीमीटर तक कम बारिश हुई। आगामी दिनों में पेयजल संकट को देखते हुए पहले ही बोर खनन पर प्रतिबंध की संभावना थी। कलेक्टर ने जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया है। इसके तहत अब बिना सक्षम अधिकारी के अनुमति नया नलकूप पेयजल अथवा अन्य किसी प्रायोजन के लिए खनन नहीं किया जा सकेगा। शासकीय एजेंसी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को जिले में पेयजल व्यवस्था के लिए खनन की अनुमति होगी। केवल उन्हें इसकी जानकारी प्राधिकारी अधिकारी को देनी होगी।

कलेक्टर ने नलकूप खनन के लिए प्राधिकारी अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई है। इसमें एडीएम को दुर्ग नगर निगम, एसडीएम दुर्ग को दुर्ग ग्रामीण, धमधा एसडीएम को धमधा नगर पंचायत व ग्रामीण क्षेत्र, एसडीएम पाटन को पाटन व ग्रामीण क्षेत्र, छावनी एसडीएम को भिलाई व आसपास के क्षेत्रों में अनुमति के लिए अधिकृत किया गया है। इनके बिना अनुमति के कहीं भी बोर करने पर उचित कार्रवाई की जाएगी। इसमें जुर्माना से लेकर जब्ती भी की जा सकती है। मामले को लेकर पुलिस प्रशासन को भी अलर्ट कर दिया गया है।

भिलाई नगर निगम क्षेत्र के नया पारा रोड पर इस तहर व्यर्थ बह रहा पानी, इस तरफ किसी का ध्यान नहीं।

जिला प्रशासन पानी संकट को लेकर गंभीर, वहीं भिलाई निगम कर रहे अनदेखी
बोर खनन पर प्रतिबंध प्रशासन के लिए चुनौती से कम नहीं
अंधाधुंध बोर खनन पर अंकुश लग सकेगा। भू-जल स्तर पर अपेक्षाकृत गिरावट में कम होगी। जरूरत के हिसाब से संतुलित बोर हो सकेंगे। सारे बोर प्रशासन की निगरानी में होंगे। इधर इसका प्रतिकूल असर पर पड़ेगा। बोर खनन के लिए जहां लोगों को इस समय 35 हजार रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। प्रतिबंध के बाद 50 हजार या इससे अधिक भी राशि खर्च करनी पड़ सकती है। अवैध बोर खनन का कारोबार बढ़ेगा। चोरी-छिपे बोर होंगे। इसे रोकना प्रशासन के लिए चुनौती की तरह होगा।

चार साल पहले लगा था बैन बावजूद बोर खनन जारी रहा
जिले में इसके पहले तत्कालीन कलेक्टर ठाकुर राम सिंह ने बोर खनन पर प्रतिबंध लगाया था। उस समय भी भूमिगत जल के गिरते स्तर को रोकने के लिए प्रतिबंध लगाया गया था। बावजूद इसके धड़ल्ले से नियमों को ताक पर रखकर बोर खनन हुए। आलम यह रहा कि सामान्य तौर पर जहां 25 हजार रुपए में बोर होते थे। वहीं प्रतिबंध के बाद से 50 से 75 हजार रुपए तक बोर वाहन के मालिकों ने वसूले।

भिलाई निगम ने बिछाई पाइप लाइन पर लीकेज
जिला प्रशासन जहां आगामी दिनों में होने वाले पेयजल संकट को लेकर गंभीर है। वहीं भिलाई निगम इसकी अनदेखी कर रहा है। करीब तीन महीने से गंजपारा से नया पारा रोड पर भिलाई निगम द्वारा बिछाई गई पाइप लाइन पर लीकेज आ गया है। इससे पानी के फौव्वारे उठ रहे हैं। बावजूद अब तक मेंटेनेंस नहीं कराया गया है। स्थानीय पार्षद कुलेश्वर साहू ने मामले की शिकायत भिलाई निगम के अधिकारियों से भी की। लेकिन लीकेज सुधारने का काम नहीं किया गया। लीकेज के कारण रोजाना पानी बह रहा है। गौरतलब है कि भिलाई निगम को भी पानी शिवनाथ नदी से ही सप्लाई किया जाता है। नदी तट पर इंटकवेल बनाया गया है। जहां से रॉ वॉटर राइजिंग पाइप के जरिए पहले 77 एमएलडी प्लांट पहुंचता है। उक्त प्लांट तक पहुंचाने वाली पाइप लाइन में ही यह लीकेज है।

कलेक्टर ने जारी किए आदेश, तत्काल प्रभावशील हो गया
कलेक्टर ने जिले में बोर खनन पर प्रतिबंध लगा दिया है। आज से ही कलेक्टर का यह आदेश प्रभावशील हो गया है। बिना प्राधिकृत अधिकारी के कहीं बोर नहीं हो सकेंगे। सरकारी एजेंसियां अवश्य बोर खनन कर सकेंगी, लेकिन इसकी जानकारी देना आवश्यक होगा। इतना ही नहीं प्राधिकृत अधिकारियों को भी जानकारी देनी होगी। कैलाश मढ़रिया, कार्यपालन अभियंता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग दुर्ग

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