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शारदापारा योजना: कोर्ट ने तीन हफ्ते में मांगा जवाब

5 वर्ष पहले
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शारदापारा अवासीय योजना मामले में हाईकोर्ट ने फिर नगर निगम भिलाई और राज्य सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी निगम और राज्य सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके खिलाफ हितग्राहियों ने याचिका दायर की है, जिसकी सुनवाई हुई।

पूर्व मंत्री बदरुद्दीन कुरैशी ने कहा कि हाईकोर्ट की दोनों बैंचों का निर्णय आने के बावजूद नगर निगम ने 9 महीने तक कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद हितग्राही रामसिया गुप्ता, देवनाथ मिश्रा, राजेंद्र प्रसाद शर्मा, भोजराज ने बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इसमें कहा गया था कि, नगरीय प्रशासन और नगर निगम ने जानबूझकर पट्टे का नवीनीकरण, बिजली, पानी, सड़क और नाली की व्यवस्था करने में विलंब किया। याचिका की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायाधीश मनेंद्र मोहन श्रीवास्तव ने 26 अगस्त 2015 को निर्णय दिया कि, तीन महीने के अंदर राज्य सरकार और निगम लीज का नवीनीकरण करें। लेकिन आयुक्त नरेंद्र दुग्गा ने समय अवधि में मकान निर्माण न करने और भू-भाटक न पटाने के कारण आवेदन को निरस्त कर दिया। इसके खिलाफ दोबारा शारदापारा आवासीय योजना के हितग्राही रामसिया गुप्ता समेत अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। तब हाईकोर्ट के न्यायाधीश मनेंद्र मोहन श्रीवास्तव और प्रशांत कुमार मिश्रा ने अलग-अलग आदेश जारी कर हितग्राहियों के भूखंड को यथावत रखते हुए स्थगन आदेश दिया। इसकी प्रति मंगलवार को निगम आयुक्त आयुक्त को सौंपी गई।

भूखंड ही नहीं भवन तक के लिए जारी रहेगा संघर्ष
पूर्व मंत्री कुरैशी ने कहा कि, शारदापारा आवासीय योजना के हितग्राहियों के अधिकार के लिए यह लड़ाई आखिरी दम तक लड़ी जाएगी। हितग्राहियों को भूखंड का नवीनीकरण, मूलभूत सुविधा ही नहीं।

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