18 साल तक जिस गांव में भोगा दंश, वहीं उपलब्ध हो कोर्ट से मिली राहत
महज 18 साल की उम्र में शादी का झांसे में आकर दुष्कर्म का दंश भोगने वाली नंदिनी खुंदिनी निवासी महिला। पीड़ा दोगुनी इसलिए क्योंकि बचपन से ईश्वर ने देखने की शक्ति नहीं दी। 11 फरवरी को सुप्रीम ने मामले में फैसला सुनाते हुए राज्य शासन को स्पष्ट निर्देश दिया कि पीडि़ता के रहने खाने की व्यवस्था करे। 8 हजार रुपए महीना गुजारा भत्ता दे। इधर पीडि़ता ने कहा कि 18 सालों तक जिस गांव में मैने दंश झेला, वहीं न्याय मिले। कोर्ट ने जो भी सुनिश्चित किया है, शासन जो देना चाहता है। वह गांव में ही उपलब्ध करवाई जाए।
कोर्ट ने कई मायनों में इस केस को उदाहरण करार देते हुए सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे ऐसे बेसहारा पीडितों के लिए एक जैसी राहत योजना बनाएं जिसमें गोवा की तर्ज पर पुनर्वास नीति तैयार की जाए। 10 लाख रुपए की एफडी पुनर्वास नीति के तहत पीड़ित महिला के नाम करवाने के निर्देश दिए हैं। वहीं महिला को हर माह 8 हजार रुपए दिए जाने का भी निर्देश है।
जानिए, यह है मामला
नंदिनी-खुंदनी में स्थित पीड़िता का घर, जहां अब भी है उसे न्याय की दरकार।
बेसहारा है पीड़िता : पीड़िता की मां ने दूसरी शादी कर ली है, उसके तीन भाई हैं जो उससे दूर अलग अलग स्थानों पर रहते हैं। निशक्त योजना में 300 रुपए की पेंशन स्वीकृत है। सरकार ने गरीबी रेखा कार्ड दिया है।
आवाज और छूकर पहचाना आरोपी : पीड़िता नेत्र विकलांग है उसके लिए न्याय पाना दुर्लभ माना जा रहा था, उसने आरोपी की पहचान आवाज और उसे छूकर की। इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ने विशेष माना।
इसलिए केस को माना विशेष
झोपड़ी में रहती है पीड़िता : पीड़िता वर्तमान में अकेले एक झोपड़ी में रहती है। जहां उसे सुरक्षित नहीं माना जा सकता है इसलिए उसके पुनर्वास की सुरक्षित व्यवस्था करने कहा गया। साथ ही महिला का आर्थिक हाल सुधारने की बात कही।
राज्य सरकारों और दुर्ग एसपी को दिए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को फटकार लगाई है। इसके लिए गोवा सरकार की तर्ज पर पुनर्वास नीति बनाएं।
दुर्ग जिला पुलिस के एसपी को पीड़िता को नारी निकेतन भिजवाने के सुझाव पर आदेशित किया कि वे उसे हर माह 8 हजार रुपए क्षतिपूर्ति भत्ता आजीवन दिलवाएं। इसके अलावा गृह विभाग के सचिव को 10 लाख रुपए पीड़ित के नाम एफडी करवाने कहा।
दुर्ग जिले के नंदिनी खुंदिनी गांव में रहने वाली एक नेत्र विकलांग लड़की से उसके भाई के साथ पढ़ने वाले दोस्त टिकेंद्र ने शादी का झांसा देकर लगातार दुष्कर्म किया। जब आरोपी को पता चला कि पीड़िता गर्भ से है तो उसने शादी से इंकार कर दिया। इसके बाद गांव वालों ने पंचायत बुलाई और आरोपी पर शादी के लिए दबाव बनाया पर आरोपी नहीं माना। मामला पुलिस तक पहुंचा, सेशन कोर्ट ने आरोपी को 7 साल की सजा सुनाई। आरोपी ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने मामले को विशेष श्रेणी का माना और कहा कि पीड़िता नेत्र विकलांग है उसने आरोपी की पहचान आवाज सुनकर और उसे छूकर की है। वहीं पीड़िता को राहत भत्ता देने की बात कही। आरोपी ने 2014 में मामले को सुप्रीम कोर्ट में अपील की।