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24 साल में सबसे बेहतर रिटर्न रियल एस्टेट ने ही दिया

7 वर्ष पहले
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सोना(गोल्ड ), शेयर या ऐसा ही कोई इन्वेस्टमेंट हो, इनकी ग्रोथ उतनी रफ्तार से नहीं होती, जितनी िकसी प्रापर्टी की होती है। फ्लेट, डुपलेक्स और प्लॉट की वैल्यू सबसे ज्यादा और सबसे तेज बढ़ती है। अन्य इन्वेस्टमेंट में ग्रोथ हो भी तो जोखिम हमेशा बना रहता है, लेकिन प्रापर्टी में जोखिम की गुंजाइश नहीं रहती। िपछले 24 साल में गोल्ड की कीमत कई बार कम-ज्यादा होती रहीं। यही हाल शेयर बाजार का भी रहा। कभी एकदम ऊपर तो कभी नीचे, लेकिन प्रापर्टी की कीमत लगातार बढ़ती ही गई।

प्रापर्टी की यह स्थिित एक दो शहराें में नहीं, बल्कि देशभर में ऐसी ही रहीं। मध्यप्रदेश के विभाजन के बाद छत्तीसगढ़ अलग राज्य बनने पर वहां भी प्रापर्टी की वेल्यू तेजी से बढ़ी। इन दिनों प्रापर्टी की वेल्यू दोनों राज्यों की राजधानी भोपाल और रायपुर में तो देश के कई बड़े शहरों से भी ज्यादा है। नेशनल हाउसिंग बैंक- एनएचबी के रेसिडेक्स से यह साफ जाहिर है। एनएचबी द्वारा जारी रेसिडेक्स के मुताबिक पिछले साल के अंतिम क्वार्टर और मौजूदा साल के पहले क्वार्टर में भोपाल और रायपुर में प्रापर्टी की वेल्यू तेजी से बढ़ी है। रियल इस्टेट के मामले में कमोबेश यही स्थिति ग्वालियर, बिलासपुर, और भिलाई में भी रही।

1990 से 2014 तक भोपाल और रायपुर के सभी एरिया में जमीन की कीमत ने मानो आसमान ही छू लिया। इन दो दशक में जमीन के दाम डेढ़ से दो सौ गुना तक बढ़े। पॉश कॉलोनियों से लेकर शहर से सटे इलाकों तक में जो जमीन 1990- 92 में सौ रुपए प्रति वर्गफीट थी वह अब ढाई से सात हजार रुपए वर्गफीट हो गई। रियल एस्टेट के िवशेषज्ञ कहते हैं कि इन दोनों राजधानियों में इस वक्त प्रापर्टी खरीदना सबसे बेहतर समय है।

1990 में सोना 3200 रु. प्रति 10 ग्राम था। जो पांच साल बाद 4680 प्रति 10 ग्राम हुआ। सन् 2000 में सोने की कीमत कम होकर 4400 रह गई। 2005 में 7000 रु., 2010 में 18500 और अभी लगभग 27000 रु. प्रति 10 ग्राम है। इधर 1990 में भोपाल की अरेरा जैसी पाॅश कॉलोनी में जमीन 300 रु. प्रति वर्गफीट और एचआईजी फ्लैट 3 से 4 लाख रु. में उपलब्ध था। अब यहां जमीन और फ्लैट के दाम 25 से 30 गुना बढ़ चुके हैं।