भिलाई। केरोसीन के डिस्ट्रीब्यूशन में जबरदस्त धांधली का खेल चल रहा है। जिनके नाम से केरोसीन रहा है, उन तक यह पहुंच ही नहीं रहा। कुल आवक का 90 फीसदी स्टॉक तस्करी की भेंट चढ़ रहा है। इस खेल में सब मिले हुए हैं। सोसायटी संचालक, डीलर और जिला पुलिस प्रशासन तक। इसका खामियाजा भुगत रहे हैं कार्डधारी उपभोक्ता। जिन्हें संचालक और डीलर कभी धौंस दिखाकर तो कभी नियमों का पेंच दिखाकर लौटा देते हैं।
तस्करी का खेल उजागर करने के बाद भास्कर ने जब पूरे मामले की पड़ताल की। पूरा सिस्टम धांधली के खेल में इन्वॉल्व है। शुरूआत सोसाइटी संचालकों से शुरू होती है। इनकी जिम्मेदारी बनती है कि ये उपभोक्ताओं तक केरोसीन पहुंचाएं। लेकिन ये केरोसीन तस्करों तक पहुंचा रहे रहे हैं। डीलर जिनका काम सोसाइटी से केरोसीन लेकर उपभोक्ताओं तक केरोसीन पहुंचाना है। ये सीधे तस्करों को केरोसीन बेच रहे हैं।
इधर खाद्य विभाग और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है कि ये गड़बड़ी पकड़े और दोषियों पर कार्रवाई करें। लेकिन यह काम वे नहीं कर रहे। उनके सामने ही पूरे खेल को अंजाम दिया जा रहा है। वे मूकदर्शक बनकर बैठे हैं। कलेक्टर कॉल ले सकती हैं। लेकिन अभी तक उन्होंने भी कोई कार्रवाई नहीं की है। पिछली बार रीना बाबा कंगाले के कार्यकाल में 2011 में कार्रवाई हुई थी। उसके बाद तस्करी रोकने के लिए कलम तक नहीं चलाई गई है।
फैक्ट फाइल
- अंत्योदयकार्डधारी 88453
- बीपीएलकार्डधारी 274472
- एपीएलकार्डधारी 74893
- सोसाइटियोंके लिए केरोसीन का आवंटन 900केएल
-हाकरों के लिए केरोसीन का आवंटन 295केएल
-प्रति कार्ड 2लीटरकेरोसीन का वितरण
इस बार होगी कार्रवाई
''इस बार केरोसीन तस्करी करने वालों के खिलाफ अत्यावश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत भी अपराध दर्ज किया जाएगा।” सुनीलजैन, एडीएमएवं नोडल अधिकारी
-शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर ने सोसाइटियों और हाकरों का कोटा निर्धारित कर रखा है। शहर में पहला स्टॉक इसी कोटे के तहत डीलरों से सोसायटी संचालक के पास आता है।
- द्वार प्रदाय योजना के तहत डीलर हाकरों और सोसाइटियों तक केरोसीन पहुंचाते हैं। सोसाइटी संचालकों और हाकरों की जिम्मेदारी होती है कि वे इसे उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं।
-हॉकर की जिम्मेदारी है कि वे किनको केरोसीन दे रहे हैं, उसकी जानकारी फूड इंस्पेक्टर को दें। उसी दिन पूरे रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन करना जरूरी होता है।
-फूड इंस्पेक्टर सप्ताह में कम से कम एक दिन अनिवार्य रूप से सोसाइटी जाकर स्टॉक का वेरीफिकेशन करेगा। साथ ही यह सुनिश्चित करेगा कि कहीं गड़बड़ी हो।
सोमवार को भी धड़ल्ले से होती रही तस्करी
नियमों की आड़ में ही चल रहा खेल
एपीएलकार्डधारियों में जिनके यहां दो सिलेंडर हैं, उन्हें केरोसीन नहीं दिए जाने का प्रावधान है। सोसाइटी संचालक इनके नाम से शासन से कोटा तो अलाट करा रहे हैं लेकिन उपभोक्ताओं को उसी नियम का हवाला देकर बैरंग लौटा दिया जाता है। बीपीएल कार्डधारियों के साथ ऐसा करना जरा मुश्किल है लिहाजा उन्हें स्टाक नहीं आने का बहाना बनाकर घुमाया जाता है और महीना खत्म होते ही उनके हिस्से का कोटा तस्करों को बेच दिया जाता है। विदित हो कि जिले में 74 हजार 893 एपीएल 2 लाख 74 हजार 472 बीपीएल कार्डधारी है।
नीले तेल का काला खेल :
केरोसीन की तस्करी में सोसाइटी संचालकों संलिप्तता संबंधी प्रश्न पूछे जाने पर बोरसी के दुकान संचालक संतोष जैन हड़बड़ा गए। कहा- भाई साहब अब पहले जैसी बात नहीं रही। कोटा कम हो चुका है। नियम भी पहले से अधिक सख्त हो चुके हैं। बावजूद कोई कर रहा होगा तो मुझे नही मालूम, मै तो नहीं कर रहा।
सोसाइटी : केरोसीन डीलर विक्रम लखोटिया का कहना है कि अब डीलरों की सोसाइटी संचालकों के साथ कोई सेटिंग नहीं होती। क्योंकि शासन ने कोटा ही इतना कम कर दिया है कि सेटिंग करने लायक बचे ही नहीं। अब यह काम सोसाइटी वाले अवश्य कर रहे हैं। अगर गलत बोल रहा हूं तो आप किसी एक पीडीएस की दुकान भेज कर इसकी पड़ताल करवा सकते हैं।
डीलर : हॉकर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजूलाल ने बताया कि शासन इतना तेल नहीं देता कि हॉकर कालाबाजारी कर सके। कुछ हॉकर भले ऐसा कर सकते हैं। उनकी भी अपनी मजबूरी है। शासन प्रति हॉकर 600 लीटर केरोसीन देती है। परिवार कैसे चलेगा। सोसाइटी संचालक केवल दस फीसदी केरोसीन उपभोक्ताओं को दे रहे हैं। बाकी कहां जा रहा है?
सीधी बात : तरुण राठौर, खाद्य अधिकारी
बात सच है..कार्रवाई करेंगे
- विभागीय अधिकारियों द्वारा सोसाइटियों में स्टाक का नियमित सत्यापन नहीं किए जाने से भी केरोसीन तस्करी को बढ़ावा मिल रहा है।
- ऐसा नहीं है सोसाइटियों की नियमित जांच की जाती है। कहीं-कहीं ऐसा हो सकता है। इससे इंकार नहीं करता। जिन दुकानों की नियमित जांच नहीं हो रही, इसका पता लगा कर संबंधित अधिकारी को जवाब-तलब किया जाएगा।
-यानि आपके हिसाब से सबकुछ ठीक चल रहा है।
मैं ऐसा नहीं कह रहा, समय-समय पर तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की जाती रही है। हां यह भी सच है कि लंबे समय से इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
-इसके लिए किसी तरह का विभाग पर दबाव तो नहीं है।
- नहीं-नहीं, दबाव नहीं है। चुनाव के साथ ही अन्य प्रशासकीय कार्यों में व्यस्तता स्टाफ की कमी के कारण भी तस्करों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकी।
-इन अव्यवस्थाओं का खामियाजा तो आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। {{ऐसा हो इसके लिए बड़ी कार्रवाई की योजना बनाई जा रही है। पुलिस प्रशासन को बल मुहैया कराने पत्र लिखा जा रहा है।
लेकिन हो ऐसा रहा
- धांधलीकी शुरूआत डीलरों से ही शुरू हो जाती है। ये तस्करों के सीधे संपर्क में हैं। जो केरोसीन सोसाइटी संचालकों या हाकरों तक पहुंचना चाहिए वह तस्करों तक पहुंच रहा है।
- सोसाइटी संचालक कागजों में फर्जी एंट्री कर केरोसीन सीधे तस्करों तक पहुंचाते हैं। इसके बदले में उन्हें रेट का डिफरेंस अमाउंट कमीशन के रूप में मिल जाता है।
- हॉकर डीलरों से केरोसीन उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए लेते हैं। लेकिन बेचते तस्करों को हैं। चूंकि मॉनीटरिंग सिस्टम कमजोर है, इसलिए पकड़ में नहीं आते।
- फूड इंस्पेक्टर मिले हुए हैं। ये महीने में एक दिन निकलते हैं और सब जगह की खानापूर्ति पूरा करने का काम करते हैं। भौतिक सत्यापन सेम डे ये नहीं करते। ही हर हफ्ते सोसाइटी जाकर स्टॉक का वेरीफिकेशन कर रहे हैं।
ऐसी है सांठगांठ: ड्रिस्ट्रीब्यूशन के सभी स्तरों पर गड़बड़ी, 2011 के बाद कोई कार्रवाई नहीं।
तस्वीर टाटीबंध के पास की। सोमवार को मिट्टीतेल की तस्करी खुलेआम होती रही।