मालिकाना हक नहीं, तो क्यों भरें टैक्स
प्रापर्टी टैक्स को लेकर हुए विवाद की जड़ नगर निगम और बीएसपी के बीच टकराव है। टकराव नगर निगम की स्थापना के बाद से ही लगातार जारी है। अब बीएसपी ने सीधे पब्लिक से टैक्स वसूलने का फरमान जारी कर दिया है। जिसके विरोध में मंगलवार को टाउनशिप बंद रही। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि जब प्रापर्टी प्रबंधन की है तो हम क्यों प्रापर्टी टैक्स भरें। पिछले आठ महीने से विरोध कर रहे व्यापारी और टाउनशिप में रहने वाले लोग अब इसके विरोध में खुलकर सामने आ गए हैं।
प्रापर्टी टैक्स को लेकर विवाद 1999 में नगर निगम की स्थापना के साथ ही शुरू हो गया था। बीएसपी प्रबंधन निगम के गठन के पूर्व विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) के करीब साढ़े तीन करोड़ रुपए दे रहा था। निगम प्रशासन ने उससे अधिक राशि की डिमांड कर दी। निगम की डिमांड को बीएसपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। जहां 2013 में मामले का निराकरण इस आधार पर हुआ कि बीएसपी हर साल निगम को प्रापर्टी व समेकित कर के रूप में करीब 11 करोड़ रुपए का भुगतान करेगा।
उधर, टाउनशिप में बंद का असर साफ दिखा। दुकानें पूरी तरह से बंद रहीं। सबसे ज्यादा दिक्कत गाड़ी वालों को हुआ। पेट्रोल पंप तो खुले रहे लेकिन दोपहर 3 बजे तक तेल नहीं मिला। सेक्टर एरिया की दुकानें पूरी तरह से बंद रहीं। सुबह कुछ जगहों पर दुकान बंद कराने के लिए व्यापारियों ने दबाव भी बनाया था। कुछ देर के लिए नोकजोंक जैसी भी स्थिति बनी।
जानिए, कहां पर फंसा है प्रापर्टी टैक्स के विवाद का पेंच
कलेक्टर से हस्तक्षेप करने प्रदर्शनकारियों ने रखी मांग
टाउनशिप में व्यापारी और नागरिक चाहते हैं कि बीएसपी केंद्र और निगम राज्य शासन के अधीन है। जिनकी मुखिया कलेक्टर हैं। नियम मुताबिक टैक्स वसूलने का अधिकार निगम को है, जबकि बीएसपी इसके लिए उन्हें नोटिस दे रहा है। ऐसे में कलेक्टर सुनिश्चित करें कि टाउनशिप के लोग किसके पास प्रापर्टी टैक्स जमा करें। वे जैसा बोलेंगी, टाउनशिपवासी वैसा ही करेगा। अगर कोई समाधान नहीं निकलेगा तो हम लोगों का आंदोलन जारी रहेगा। हम इसका विरोध जारी रखेंगे।
हम तो किराएदार हैं तो क्यों दे प्रापर्टी टैक्स
आंदोलनकारियों का कहना है कि टाउनशिप की प्रापर्टी बीएसपी की है। जिसमें व्यापारी और निवासी महज किराएदार के रूप में रहते हैं। जो प्रापर्टी उनके नाम पर नहीं है, उसका टैक्स कैसे भुगतान कर सकते हैं। प्रबंधन को टैक्स चाहिए तो उन्हें जिनके नाम से लाइसेंस जारी किए गए हैं, उन्हें एनओसी जारी करें। ताकि जरूरत पड़ने पर बैंक लोन भी ले सके। उसके बाद भी वे नए वित्तीय वर्ष से प्रापर्टी टैक्स का भुगतान करने को तैयार हैं। पुराने टैक्स का भुगतान करने के लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं।
निगम की ओर से जारी हुए नोटिस से उठा सवाल
सूत्रों के मुताबिक 15 साल बाद किसी तरह प्रापर्टी टैक्स का विवाद समाप्त होने के बाद बीएसपी प्रबंधन राहत ले पाता कि निगम ने उसे इससे जुड़ी एक और नोटिस थमा दी। जिसमें उसने 2011 से टाउनशिप में प्रापर्टी के असेसमेंट के आधार पर टैक्स जमा करने कहा। जिसकी जानकारी निगम प्रशासन सर्वे कर पहले ही तैयार कर चुका है। इस पर बीएसपी प्रबंधन निगम से टैक्स की वसूली कराने की बजाए खुद ही करने का निर्णय लिया। ताकि टाउनशिप में हुए अवैध निर्माण निगम के सामने न आ जाए।
जारी रहेगा आंदोलन
निगम आयुक्त से चर्चा में भी प्रापर्टी टैक्स विवाद का निराकरण नहीं हुआ तो आंदोलन जारी रहेगा। 16 फरवरी से हर सेक्टर के मार्केट में काला झंडा फहराया जाएगा। ज्ञानचंद जैन, अध्यक्ष भिलाई युवा व्यापारी संघ
यह बीएसपी का मामला है
बीएसपी से एकमुश्त प्रापर्टी टैक्स मिल जाता है। बाकी बीएसपी टाउनशिप के व्यापारियों और लोगों से किस रूप में वसूलता है, उससे हमें कोई लेना-देना नहीं है। नरेंद्र दुग्गा, आयुक्त, नगर निगम भिलाई
जो भुगतान किया वहीं मांगा
टाउनशिप के व्यापारियों और निवासियों से प्रापर्टी टैक्स की वसूली नहीं कर रहा। वह निगम को जो भुगतान कर चुका है, उसे मांग रहा है। आलोक झा, जीएम, नगर प्रशासन एवं सेवाएं, बीएसपी
एक्सपर्ट व्यू
बीएसपी प्रबंधन के पास यह अधिकार
हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और स्टेट बार काउंसिल के सदस्य बीपी सिंह का कहना है कि राजस्व संबंधी मामले में वहीं सरकारी संस्था हस्तक्षेप कर सकती है जिसे प्रशासनिक अधिकार होता है। बीएसपी प्रबंधन के पास यह अधिकार नहीं है। उसका काम प्लांट को आपरेट करना है न कि प्रापर्टी टैक्स की वसूलना।
कोई नहीं पहुंचा ज्ञापन लेने
आंदोलनकारी अपनी मांग का ज्ञापन बीएसपी प्रबंधन को न सौंपकर जिला प्रशासन के किसी अधिकारी को सौंपना चाहते थे। टीए बिल्डिंग के सामने पहुंचने के बाद आंदोलन की अगुवाई कर रहे भिलाई युवा व्यापारी संघ के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ने एडीएम सुनील जैन से मोबाइल पर ज्ञापन के लिए किसी अफसर को भेजने की बात कही। उन्होंने अफसर कलेक्टर बैठक में होने की बात कहते हुए शाम तक मीटिंग कराने का आश्वासन दिया। देर शाम को एडीएम ने फोन कर जानकारी दी कि कलेक्टर ने मामले का निराकरण करने भिलाई निगम कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा को निर्देशित किया है।
बीएसपी प्रबंधन के विरोध में मंगलवार को व्यापारियों के साथ टाउनशिप में रहने वालों ने किया प्रापर्टी टैक्स का विरोध।
सेक्टर एरिया में पेट्रोल मंप पर कर्मचारी तो रहे मगर तेल नहीं दिया गया।
पेट्रोल पंप व दुकानें रहीं 3 बजे तक बंद
बीएसपी हर साल टैक्स के रूप में साढ़े 11 करोड़ रुपए देता है नगर निगम को