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स्टूडेंट्स को बताई नौकरशाही की भूमिका

5 वर्ष पहले
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पं. रविशंकर शुक्ल विवि के कुलपति डॉ. एसके पांडेय छात्रों को दिए टिप्स

एजुकेशन रिपोर्टर|भिलाई

स्टूडेंट्स को उच्च शिक्षा के एकेडमिक एवं प्रशासनिक क्षेत्र में नौकरशाही की भूमिका के बारे में बताया गया। जिसमें अतिथियों ने कहा कि छात्र-छात्रा को नौकरशाही को समझने की जरूरत है। उच्च शिक्षा में आदर्श नौकरशाही की संभावनाओं के बारे में भी छात्र-छात्राओं को जानकारी दी गई। बुधवार को कल्याण कॉलेज में संगोष्ठी का उद्घाटन पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एसके पांडेय के मुख्य आतिथ्य में हुआ। उन्होंने नौकरशाही में व्याप्त कमियां बताईं। साथ ही पांडेय ने संस्थाओं में औपचारिक नियमों की महत्ता के अलावा अनौपचारिक संबंधों को भी महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम के प्रथम तकनीकी सत्र में आईएफएस के. सुब्रह्मण्यम ने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के लिए पाठ्यक्रमों के नवीनीकरण, शिक्षकों के प्रशिक्षण एवं विषयों को समाज से व्यवहारिक रूप जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रमों को रोचक और रूचिकर बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियाें को सब्जेक्ट से हटकर कुछ सिखाया जाए। छात्रों को यह बताया जाए कि साक्षात्कार की तैयारी कराई जाए। व्यक्तित्व विकास की शिक्षा दी जाए। इसके अलावा बताया कि छात्र पूर्वाग्रह से उभरेंगे तभी उन्हें शिक्षित माना जा सकता है।

छात्रों को पहले से बनी रूढ़ीवादी व्यवस्था को तोड़ना होगा। तभी उनका कोई राजनीतिक दल उपयोग नहीं कर पाएगा। पढ़ा-लिखा व्यक्ति तो मिल जाता है, लेकिन समझदार नहीं मिलता। वर्तमान समय में समझदारों की जरूरत है। पढ़े-लिखे लोग तो बहुत मिल जाएंगे। दूसरे सत्र में एसआरएम नागपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बीके स्वाइन ने आदर्श नौकरशाही और वास्तविक नौकरशाही के बीच के अंतर को कम करने के लिए व्यवहारिक सुझाव दिए। इसके अलावा उन्होंने प्रशासनिक क्षेत्र में किस तरह की दिक्कतें आती हैं उसे भी बताया। स्वाइन ने आदर्श नौकरशाही का विस्तृत विश्लेषण भी किया। वहीं तृतीय सत्र में पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर प्रमोद कुमार शर्मा ने देश की नौकरशाही में सुधार करने पर जो दिया। इस मौके पर कार्यक्रम के संयोजक डॉ केएन दिनेश, प्रो. जेएल सोनभद्र, प्रो. एलआर वर्मा, डॉ एके वर्मा आदि मौजूद रहे।

कल्याण कॉलेज में बुधवार को आयोजित हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी।

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