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हडि्डयों को मजबूत बनाने सुबह की धूप भी जरूरी: डॉ. उरगांवकर

7 वर्ष पहले
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बचपनमें जहां हड्डियों लचीली होती हैं। वहीं बुढ़ापा आते तक उनमें भुरभुरापन आने लगता है। यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसके प्रति सावधान रहने

की जरूरत है। दिनचर्या में मामूली फेरबदल कर लोग अपनी हड्डियों को को मजबूत बना सकते हैं। यह बात एमजे कालेज की ओर से आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि आर्थोपेडिक सर्जन दुर्ग के पूर्व सीएमएचओ डॉ एडी उरगांवकर ने कही। उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्र में बोन मिनरल का घनत्व कम होने लगता है। एक्सरे में ऐसी अस्थियां कुछ पारदर्शी सी लगने लगती हैं। मामूली चोट या जोर पड़ने पर भी ऐसी हड्डियां टूट सकती हैं। उन्होंने बताया कि हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए आहार में कैल्शियम का होना जितना जरूरी है, उतना ही महत्व सुबह की धूप में मिलने वाली पराबैंगनी किरणों (अल्ट्रावायलेट रेज) का भी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भिलाई इस्पात संयंत्र के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक डॉ शैलेन्द्र जैन ने कहा कि बदलती जीवन शैली ने समस्या को बढ़ा दिया है। इसकी खास वजह सुबह देर से उठना है। सेमिनार के मुख्य वक्ता अपोलो बीएसआर अस्पताल के जाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन एवं सुपर स्पेशलिस्ट डॉ सौरभ शिरगुप्पे ने बताया कि अधिक वजन और कमजोर हड्डियों के कारण बढ़ती उम्र में शरीर का भार ढोने वाले जोड़ों में दर्द होने लगता है। चलना-फिरना, बैठना-उठना मुश्किल हो जाता है। प्राचार्य डॉ कुबेर गुरुपंच ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस मौके पर डायरेक्टर श्रीलेखा विरुलकर, हेरिटेज इंटरनेशनल स्कूल के संचालक बृजमोहन उपाध्याय, प्राध्यापक, व्याख्याता आदि मौजूद थे।