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चित्र बनाकर ज्यादा नंबर पाओ

5 वर्ष पहले
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साइंस के छात्रों को पूरा परचा हल करने विशेषज्ञ ने दिए जरूरी टिप्स
मार्गदर्शन
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की वार्षिक परीक्षाओं की तारीख नजदीक अड़ाने से टेंशन न लें। 10वीं व 12वीं में साइंस के पेपर को लेकर टेंशन में हैं ताे एक्जामिनर की जुबानी जानते हैं कि आप क्या फॉर्मूला अपनाकर सबसे ज्यादा नंबर हासिल कर सकते हैं। साइंस के सीनियर टीचर्स सुरेश कुमार बताते हैं कि सीजी बोर्ड के 40 से 50 प्रतिशत स्टूडेंट साइंस के पेपर में चूक करते हैं। गणित की तरह नंबर साइंस में भी दिया जाता है। यानि सब्जेक्ट पर आधारित उत्तर को पूरा नंबर मिलना तय है। होता यह है कि बच्चे हिन्दी या सामाजिक विज्ञान के पेपर की तर्ज पर निबंध जैसे जवाब देने लगते हैं। यह सिरे से गलत है। विषय से हटकर लिखने पर नंबर काट दिया जाता है। परीक्षार्थी सबसे पहले पेपर को लेते ही उसकी हैसियत का अंदाजा लगा लें। मतलब, यह कि जितने नंबर का सवाल पूछा जाए, उतना ही लिखें। ऐसा नहीं कि दो या तीन नंबर के प्रश्न का जवाब आपको सबसे अच्छे से आ रहा है तो उसको सबसे ज्यादा लाइन में लिखकर काॅपी भर दें। इसमें कॉपी भरने की जरूरत नहीं। विज्ञान के 1 या 2 नंबर के सवालों का जवाब छोड़ सभी प्रश्नों में जरूरत के हिसाब से उदाहरण, चित्र आैर समीकरण जरूर लिखें। इन तीन बिन्दुओं को काली पेन से हाइलाइट करते हुए लिखें। उत्तर में अगर तीनों साथ दिखते हैं तो एक्जामिनर के दिमाग में अच्छी छवि बनती है।

अक्सर स्टूडेंट करते हैं यह भूल
उत्तर लिखते वक्त इसका नंबर सही से लिखें। अक्सर स्टूडेंट जवाब लिखते हैं नंबर के सवाल का, लेकिन जल्दबाजी में 4 के बजाय 5 या 3 लिख देते हैं। इससे नंबर कटने की संभावना रहती है रसायन विज्ञान के उत्तर लिखते वक्त समीकरण व उदाहरण पर फोकस करें

रसायनिक पदार्थों का नाम लिखते हैं तो उसका विश्लेषण जरूर करें डाइग्राम न बनाने से पेज खाली रहता है। इसको भरने के लिए गलत तरीका अपनाकर निबंध लिख देते हैं, यह गलत है।

डाइग्राम से दो फायदे और नंबर भी
शिक्षक सुरेश कुमार के मुताबिक डाइग्राम बनाने की खूब प्रैक्टिस करें। यही वह फॉर्मूला है, जो स्टूडेंट को अच्छे नंबर लाने के लिए टेंशन से छुटकारा दिलाएगा। जो डाइग्राम बनाते हैं, उनका कांसेप्ट भी क्लियर हो जाता है। उत्तर को रटने की जरूरत नहीं पड़ती। पेंसिल से ही ड्राइग्राम बनाते वक्त जेहन में यह इसकी साफ तस्वीर भी बन जाती है। परीक्षा कक्ष में सवाल का जवाब भूलने का टेंशन भी नहीं रह जाता है। इससे छात्रों के मन में परीक्षा का भय भी दूर होता है।

वाइस प्रिंसिपल

सुरेश कुमार

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