पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

टेबुलेशन चार्ट के जरिए शोध के आकड़ों की गणना आसान

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
कल्याण पीजी कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला शोध पत्र कैसे लिखें का समापन शनिवार को हुआ। तकनीकी सत्र में विषय विशेषज्ञ डॉ. रविंद्र पाठक ने प्रतिभागियों को कम्प्यूटर पर शोध पत्र के अंतिम प्रारूप को पूरा करने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार एसपीएसएस टेबुलेशन चार्ट के माध्यम से शोध के दौरान प्राप्त आंकड़ों की गणना आसानी से की जा सकती है। तकनीकी सत्र में प्रतिभागियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर विषय विशेषज्ञों ने दिया। समापन सत्र के मुख्य अतिथि चार्टर्ड एसोसिएशन भिलाई के पूर्व प्रमुख श्रीचंद लेखवानी व अध्यक्ष पं रविशंकर शुक्ल विवि के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के डायरेक्टर डॉ. एके श्रीवास्तव थे।

काफी उपयोगी साबित हुआ

कार्यशाला में शामिल रिसर्चर का कहना है कि उनके लिए यह कार्यशाला सही मायनों में काफी उपयोगी साबित हुई। इससे शोधार्थियों को सही दिशा में शोध करने में मदद मिलेगी। समापन सत्र में प्राचार्य प्रो एलआर वर्मा व कार्यशाला के संयोजक डॉ आरपी अग्रवाल ने दो दिवसीय कार्यशाला की उपलब्धियों का मूल्यांकन किया। कार्यक्रम में पूर्व अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर राजेश चौहान का सम्मान भी किया गया। संचालन डॉ सलीम अकील व धन्यवाद ज्ञापन डॉ एआर वर्मा ने किया। इस दौरान डॉ पीएस शर्मा, डॉ हरी कश्यप, डॉ रवीश सोनी, डॉ रंजना शर्मा, शेषनारायण शुक्ला, कल्पना त्रिवेदी, निशा राजपूत, अमित अग्रवाल, शिवानंद चौबे, पदमश्री ताम्रकार, जितेंद्र सिंग, दामिनी साहू आदि उपस्थित थे।

सही आंकड़ों से सही परिणाम ही मिलेगा
ग्वालियर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से शोधार्थियों का मार्गदर्शन करने आए डॉ. पाठक ने बताया कि सही आंकड़ों के प्रयोग से उचित शोध समस्या का उचित विश्लेषण करने में मदद मिलती है और परिणाम भी सही प्राप्त होते हैं। उन्होंने बताया कि इन शोधों का प्रयोग समाज के विभिन्न अंगों में किया जाता है। इसका प्रयोग विद्यार्थियों के लिए, शासकीय नीतियों के निर्माण में व उद्योगों व अन्य क्षेत्रों की समस्याओं को दूर करने के लिए जाता है। डॉ. पाठक ने प्रभावी तरीके से शोधार्थियों को डाटा एनालिसिस की तकनीक बताई। इस कार्यशाला के आयोजन से यह प्रतिपादित हुआ कि शोध के प्रति उनकी रूचि है और इस संबंध में तकनीकी जानकारियों के लिए निरंतर ऐसी कार्यशालाओं का आयोजन भविष्य में भी होना चाहिए। इस पर चर्चा होनी चाहिए।

शोध पत्र पर दो दिनी कार्यशाला में प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से सवाल भी पूछे
मैग्जीन से काफी अलग होता है शोधपत्र: उमेश होलानी
पूर्व अधिष्ठाता वाणिज्य एवं प्रबंध संकाय जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर डॉ. उमेश होलानी ने शोधार्थियों को बताया कि मैग्जीन और शोध पत्र में काफी अंतर है, क्योंकि मैग्जीन में आलेख प्रकाशित होते हैं। बल्कि शोध पत्र में वैज्ञानिकता मौजूद होती है, जो सत्य की खोज के लिए की जाती है। उन्होंने बताया कि शोध पत्र लिखने के अलग-अलग चरणों की जानकारी हिंदी भाषी क्षेत्रों में रहने वाले शोधार्थियों को नहीं होती, जिसके कारण उनके शोध आलेख का स्वरूप धारण कर लेते हैं। शोध के लिए स्पष्ट उद्देश्यों के साथ उचित परिकल्पना होना आवश्यक है।

राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन के दौरान स्टूडेंट्स व प्रोफेसर भी मौजूद रहे।

खबरें और भी हैं...