भिलाई। बीएसपी कर्मियों को इस बार भी 18, 270 रुपए बोनस मिलेगा। बुधवार को प्रबंधन ने इस संबंध में एकतरफा आदेश जारी किया। बोनस की राशि 22 हजार कर्मियों के खाते में 29
सितंबर तक जमा की जाएगी। इस तरह मार्केट में कुल 40 करोड़ 19 लाख 40 हजार रुपए आएंगे। यह पांचवां साल है जब प्रबंधन बोनस में वृद्धि नहीं की है। इस बार खास बात यह है कि बोनस कितना दिया जाना है यह प्रबंधन ने अपने हिसाब से तय किया है। घोषणा से पूर्व एनजेसीएस के सदस्य यूनियनों को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई।
डिमांड तो 40 हजार की थी : सीटू व इंटक ने प्रबंधन पर दबाव बनाने के मकसद से प्रदर्शन किया। वहीं इस्पात श्रमिक मंच ने 40 हजार व इंटक 38 हजार सात रुपए बोनस की मांग कर रहे थे।
अपनी जिद पर अड़ा रहा प्रबंधन : प्रबंधन का तर्क था कि भले ही बीएसपी व दुर्गापुर यूनिट
का प्रॉफिट बढ़ा हो लेकिन वार्षिक उत्पादन योजना में दो प्रतिशत की गिरावट आई है। पिछले साल बीएसपी का एपीपी 102 फीसदी था। इस बार 100 फीसदी है। लिहाजा इस साल
भी पिछली बार जितना बोनस दिया जाएगा। जबकि यूनियन प्रॉफिट के आधार पर बोनस
पिछली बार से अधिक दिए जाने की मांग कर रहे थे।
यूनियन नेताओं ने जताई नाराजगी
प्रबंधन की हठधर्मिता: ''बोनस पर एकतरफा आदेश जारी कर हठधर्मिता का परिचय दिया है। हमने प्रॉफिट के आधार पर बोनस देने के साथ ही बोनस पर से सीलिंग हटाने की मांग की थी।
इसके लिए संघर्ष जारी रहेगा।'' -एसपी डे, अध्यक्ष सीटू।
बोनस कम क्यों :'' इस वर्ष सेल का प्रॉफिट 20 प्रतिशत अधिक हुआ है, इसलिए पिछले वर्ष से कम से कम 20% अधिक बोनस तो मिलना ही चाहिए।'' -एसएम पांडेय एसईयू इंटक
मंच विरोध करता है: बिना एनजेसीएस को विश्वास में लिए प्रबंधन द्वारा इसकी घोषणा किए
जाने से सदस्य यूनियनों की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में है। -हीरामन तेली इस्पात
श्रमिक मंच।
एनजेसीएस पर सवाल:'' बोनस पर एकतरफा आदेश जारी किए जाने से एनजेसीएस की उपयोगिता समाप्त हो गई है। अब एनजेसीएस अप्रासंगिक हो गया।''-बृजबिहारी मिश्रा इस्पात कर्मचारी यूनियन।