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जानिए इससे पहले किन पांच मामलों में फांसी की सजा
दुर्ग जिले के इतिहास में फांसी देने का यह छठवां प्रकरण
23 जून 1997: शंकरगुहा नियोगी हत्या मामले में पलटन मल्लाह को अपर सत्र न्यायाधीश पीके झा ने 23 जून 1997 को फांसी की सजा सुनाई थी।
२००७:चारबच्चियों की हत्या करने वाले चरोदा भिलाई के बलराम शर्मा को तत्कालीन अपर सत्र न्यायाधीश एएस चंदेल ने फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट से पुष्टि होने के 1 दिन पहले ही बलराम ने जेल में फांसी लगा ली थी।
23अप्रैल 2013: तत्कालीनसत्र न्यायाधीश चंद्रभूषण वाजपेयी ने प|ी पांच बेटियों की हत्या करने वाले ग्राम मोहंदीपाट (अर्जुंदा) निवासी ढाल सिंह देवांगन को फांसी की सजा सुनाई। हाईकोर्ट ने कन्फर्म कर दिया है।
26जून 2013: तत्कालीनसत्र न्यायाधीश चंद्रभूषण वाजपेयी ने ही तीन लोगों की हत्या करने वाले पाटन ब्लॉक के ग्राम बोरिद निवासी छन्नूलाल वर्मा को फांसी की सजा सुनाई। प्रकरण कन्फरमेशन के लिए हाईकोर्ट में है।
27मार्च 2014: दोसाल के मासूम बच्चे चिराग की बलि देने वाले रूआबांधा भिलाई के तांत्रिक ईश्वरी यादव, उसकी प|ी किरण यादव उर्फ गुरुमाता और उनके पांच चेलों को सेशन कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई।