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बीएसपी : पेंशन स्कीम के फार्मूले का विरोध
पेंशनस्कीम के फार्मूले को लेकर विरोध शुरू हो गया है। यूनियन पदाधिकारियों को आपत्ति फार्मूले के उन शर्तों को लेकर है जो अफसरों कर्मियों के लिए अलग-अलग रखी गई है। लिहाजा उन्होंने एक बार फिर एनजेसीएस कोर कमेटी के सदस्यों की भूमिका पर ही सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं।
यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि प्रबंधन एवं कोर कमेटी के सदस्यों के बीच वेतन समझौता के लिए जनवरी 2014 में सहमति बनी। जुलाई 2014 को अनुबंध हुआ। समझौते में कर्मियों के लिए पेंशन स्कीम को लेकर स्पष्ट कर दिया गया था कि पेंशन स्कीम एक जनवरी 2012 से लागू होगी और बेसिक डीए का 6 प्रतिशत अंशदान कंपनी का होगा। इस अवसर पर महासचिव हीरामन तेली, कार्यकारी महासचिव राजेश अग्रवाल, उप महासचिव सर्वजीत सिंह, सीताराम साहू, जेआर सोनवानी, आईएस ठाकुर, कोषाध्यक्ष आरडी देशलहरा, उप कोषाध्यक्ष अरूण साहू मौजूद थे।
1. पेंशनस्कीम को इंडेक्स के हिसाब महंगाई के से परिवर्तनशील होना चाहिए। वर्तमान की पेंशन स्कीम में यह सुविधा नही है।
2.चिकित्सासुविधा के लिए अपना इंफ्रास्ट्रक्चर है तो सुविधा के नाम से कटौती कहां तक उचित है।
3.पेंशनस्कीम लागू होने के बाद यदि कोई कर्मी इसका फायदा नही लेना चाहता तो एसईएसबीएफ की कुल जमा राशि मय ब्याज सहित वापस करने की सुविधा।
4.एकजुलाई 2014 के बाद ज्वाइन करने वाले कर्मचारी पेंशन सिलिंग एक्ट में आएंगे। पेंशन स्कीम बदलना चाहिए उन्हें बहुत नुकसान होगा।
सुधार के चार सुझाव
कंपनी के अंशदान में भेदभाव का आरोप
सामान्यतौर पर कर्मी एवं अधिकारियों पर समान रूप से पेंशन स्कीम लागू होता है जबकि प्रस्तावित फार्मूले में कर्मचारियों का पेंशन स्कीम 2012 से लागू होगी और कंपनी का अंशदान 6 प्रतिशत रहेगा। वहीं अधिकारियों की पेंशन स्कीम 2007 से लागू होगी और कंपनी का अंशदान 9 प्रतिशत रहेगा।
फार्मूला कर्मचारियों को दिग्भ्रमित करने वाला
पेंशनफार्मूले को लेकर इस्पात श्रमिक मंच की की बैठक हुई। जिसमें संगठन के अध्यक्ष भावसिंह सोनवानी ने फार्मूले की जानकारी दी। साथ ही कहा कि प्रस्तावित फार्मूले में प्रबंधन ने कर्मचारियों के एमजीबी को 6 प्रतिशत कम कर पेंशन स्कीम में समायोजित किया है। इसमें प्रबंधन का क्या योगदान है समझ से परे है। जब वेतन समझौता हो रहा था तब 23 प्रतिशत एमजीबी की बात हो रही थी। इस तरह देखा जाए तो प्रबंधन इस मुद्दे पर कर्मियों को दिग्भ्रमित करने का कार्य कर रहा है। उनका कहना है कि फार्मूले से साफ हो गया है कि प्रबंधन कर्मचारियों की हितों में कटौती कर रहा है।