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चुनाव जीतने के बाद अपने वादे भूल गए शहर के छात्र नेता

6 वर्ष पहले
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ऑनलाइन कराएंगे प्रक्रिया

हमने निभाए चुनावी वादे

सत्रखत्म होने को है। छात्र संघ चुनाव जीतने के लिए छात्र संगठनों ने छात्रों से एक से बढ़कर एक वादे किए। जब चुनाव जीत गए तो वे अपने वादे ही भूल गए। कई नेताओं को तो ये तक याद नहीं है कि उन्होंने छात्रों से क्या वादा किया था? अब उन्हें छात्र ही याद दिला रहे हैं। छात्र संघ पदाधिकारियों को निर्वाचित हुए पूरा सत्र गुजरने वाला है, लेकिन कॉलेजों में डेवलपमेंट के नाम पर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है। एबीवीपी ने कल्याण कॉलेज में स्मार्ट क्लासेस और वाई-फाई कैंपस सुविधा दिलाने का छात्रों से वादा किया। वाई-फाई तो शुरू लेकिन छात्रों को पासवर्ड तक पता नहीं।

साइंस कॉलेज दुर्ग को मॉडल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाने के लिए एबीवीपी और एनएसयूआई ने वादा किया। वहां एनएसयूआई की प्रेसिडेंट रश्मि राय बनी। उन्होंने अब तक इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया तक नहीं। यही हाल बाकी कॉलेजों का भी है। जहां छात्रों से वाेट मांगने के लिए चुनावी वादे किए, लेकिन अब उन वादों को पूरा करने का सिर्फ आश्वासन ही दे रहे हैं। भास्कर ने छात्र संगठनों से किए वादे की पड़ताल की तो चौकाने वाली बात सामने आई।

सिर्फ सोशल मीडिया में छाए हुए हैं

चुनावजीतने के बाद छात्र नेता सिर्फ सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। फेसबुक पर पेज और वाट्सएप पर ग्रुप बना हुआ है। जहां उनकी गतिविधि दिख रही है। छात्र संघ पदाधिकारियों का वाट्सएप में ग्रुप बना है, जिसमें कलेक्टर आर. शंगीता भी है। यहां वे सिर्फ मूलभूत समस्याओं पर बात कर रहे हैं। बड़े मुद्दों पर माहौल भी नहीं बना रहे हैं। छात्रहित को लेकर ही छात्रनेता गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।

ऐसे काम करना था संगठन को

कॉलेजऔर यूनिवर्सिटी में छात्र संगठन के नेताओं को छात्र-छात्राओं के हित में काम करना होता है। छात्रों को जो भी परेशानी हो, चाहे वह किताब, पानी, खेल, मैदान, हॉस्टल, फर्नीचर, स्टाफ और फीस समेत अन्य। इन तमाम समस्याओं के समाधान के लिए छात्रों को अध्यक्ष से चर्चा करनी होती है, लेकिन चुनाव के बाद पूरी यूनिट गायब हो गई है। अब तक एकत्रित होकर कोई विशेष प्रोग्राम भी नहीं हो पाया।

^जब चुनाव हो रहे थे तो एबीवीपी हर जगह दिखती थी। अब सारी सीट जीतकर पूरे सत्र के दौरान कहीं नहीं दिखी। हम ही छात्रों के लिए आंदोलन कर रहे हैं, अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन एबीवीपी का कोई लेना-देना नहीं है। देवेंद्रयादव, राष्ट्रीय सचिव, एनएसयूआई

^महिला सेल का काम हो गया है, उसे केवल छात्रों के बीच प्रचारित नहीं किया गया है। लायब्रेरी अपडेट नहीं हुई है, उस पर काम चल रहा है। अधिकतर कॉलेज में वाई-फाई की सुविधा हो गई है। काजलमिश्रा, अध्यक्ष, छात्रसंघ, सीएसवीटीयू

{ऑनलाइन एग्जाम प्रक्रिया कराएंगे। अब तक क्या किया? {{पंडित रविशंकर शुक्ल में करवा दिया है। मैं सीएसवीटीयू नहीं देखता, वो हमारी जिम्मेदारी नहीं है।

{ यूनिवर्सिटी है, वहां ऑनलाइन तो कभी कभी होना था। ये बताइए स्टूडेंट की पर्सनालिटी डेवलपमेंट के लिए क्या किया? {{डीबेट कराएं हैं और आगे भी कई कार्यक्रम कराएंगे।

{डिबेट से पर्सनालिटी डेवलप होती है? और बाकी कार्यक्रम सत्र खत्म होने के पहले या बाद में कराएंगे? {{मैम, आप तो क्रॉस क्वेश्चन कर रही हैं। आपने तो मन बना लिया है। एबीवीपी के सारे नेता कुछ नहीं कर रहे हैं। हम ही उनका सारा काम कर रहे हैं।

{सत्र खत्म होने को है, छात्रनेता ने अब तक क्या किया है छात्रों के लिए? {{सारे वादे पूरे किए हैं।

{ कॉलेजों में महिला सेल का गठन कहां किया गया? {{काम कर रहे हैं। प्रिंसिपल को राजी कर रहे हैं। हम प्रदर्शन कर रहे हैं।

{महिला सेल बन रहे हैं? शौचालय की व्यवस्था हो रही है? {{जन कल्याण कॉलेज में हुई है। इसके सिवा अन्य सारे काम किए हैं। साइकिल स्टैंड का सीमेंटीकरण किया है।

{आपने टेक्नीकल एक्सपो और वाई-फाई लगवाने का क्या किया? {{मैं तकनीकी कॉलेज नहीं संभालता। पंडित रविशंकर शुक्ल संभालता हूं।

एनएसयूआई के वादे

{सभी कॉलेज कैंपस को वाई-फाई।

स्टेटस-ट्विनसिटीके कॉलेजों के कैंपस में ही वाई-फाई के बराबर रहता है।

{ ऑनलाइन एग्जाम फार्म प्रक्रिया शुरू कराएंगे।

स्टेटस-अभीअब तक पीआरएसयू में हुई है सुविधा शुरू और सीएसवीटीयू से चर्चा भी नहीं की।

{ स्टूडेंट्स के पर्सनालिटी डेवलप के लिए कार्यक्रम।

स्टेटस-डिबेटकार्यक्रम शुरू हुआ है। इसके सिवा कोई कार्यक्रम शुरू नहीं हुआ है।

{ कॉलेजों में होने वाली अवैध वसूली को बंद कराएंगे।

स्टेटस-साइकिलस्टैंड और जेरोक्स करने वाले स्टोर्स मे खुलेआम अवैध वसूली होती है।

एबीवीपी के वादे

{हरेककॉलेज में ई-क्लासेस और स्मार्ट क्लास रूम

स्टेटस-कुछकॉलेजों में पहल हुई है, प्रोसेस में है।

{ कॉलेजों में महिला सेल का गठन।

स्टेटस-महिलाकॉलेजों में भी सेल नहीं बना। महिला शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है।

{ हर महीने स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम और डिबेट।

स्टेटस-कुछनहीं हुआ है।

{ इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के लिए टेक्नीकल एक्सपो।

स्टेटस-एकभी इंजीनियरिंग कॉलेज में एक्सपो नहीं।

{ साइंस कॉलेज दुर्ग को मॉडल और यूनिवर्सिटी का दर्जा।

स्टेटस-निर्वाचितछात्र नेताओं ने पहल नहीं की।