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गोल्ड जीतकर लौटी भिलाई की यशोदा, स्टेशन पर हुआ स्वागत

5 वर्ष पहले
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भारतीय खेल खो-खो पहली बार इंटरनेशनल लेवल तक पहुंचा। जिसमें जीत दर्जकर भारतीय टीम ने गोल्ड मैडल जीता। इस पहली महिला इंटरनेशनल विजेता टीम में भिलाई की यशोदा साहू भी शामिल थीं, जिन्होंने पूरी स्पर्धा में सबसे अधिक 10 पाइंट हासिल किए। इस शानदार जीत के बाद वापस लौटने पर दुर्ग रेलवे स्टेशन पर परिजनों व नागरिकों ने उसका जोरदार स्वागत किया।

12वें साउथ एशियन गेम्स का आयोजन 5 से 16 फरवरी तक गोवाहाटी, शिलांग में किया जा रहा है। इसमें कुल 23 गेम्स शामिल किए गए है। जिसमें खो-खो को भी शामिल किया गया। भारतीय सीनियर महिला व पुरुष खो-खो टीम ने इसमें हिस्सा लिया। दोनों ही टीमों ने फाइनल में बांग्लादेश को हराकर गोल्ड मैडल जीता। पुरुष वर्ग टीम में छत्तीसगढ़ की ओर से कोई शामिल नहीं हो सका। वहीं महिला टीम में भिलाई की यशोदा ने अपना स्थान बनाया। बेहतर प्रदर्शन व जीत हासिलकर प्रदेश का नाम रौशन किया। शिलांग में बांग्लादेश को हराने के बाद टीम ने खुशी जाहिर करते हुए हाथ में तिरंगा लेकर पूरे ग्राउंड के चक्कर लगाए।

50 साल के बाद पहली बार खो-खो मिला स्थान
खो-खाे के खेल काे अभी तक भारत से बाहर इंटरनेशनल गेम्स में शामिल नहीं किया गया था। खो-खो की शुरुआत के 50 साल के बाद यह साउथ एशियन गेम्स में शामिल हो पाया। इसके पहले सीनियर नेशनल गेम्स तक ही इसके मुकाबले होते थे। पहली बार इंटरनेशनल स्तर पर मुकाबले हुए।

प्रतियोगिता के पहले इस तरह से बनी टीम
सलेक्शन के लिए 49वें सीनियर नेशनल सोलापुर से ही तैयारी प्रारंभ हो चुकी थी। यहा से महिला व पुरुष टीम के कैंप के लिए 45-45 खिलाड़ियों का चयन किया गया। महिला सीनियर टीम को गांधी नगर व पुरूष सीनियर टीम को भोपाल में प्रशिक्षण दिया गया।

फाइनल मेें बांग्लादेश को 1 पारी 2 पाइंट से हराया
साउथ एशियन गेम्स में शामिल इंडियन वुमेन खो खो टीम ने फाइनल में बांग्लादेश को हराकर गोल्ड मैडल हासिल किया। इस टीम में भिलाई की यशोदा साहू भी शामिल है। यह प्रदेश की पहली इंटरनेशनल खो खो खिलाड़ी है। फाइनल में यशोदा बेहतर खेल का प्रदर्शन करते हुए नाट आउट रही। टीम का फाइनल में बांग्लादेश टीम के साथ मुकाबला हुआ। इंडियन खो खो वुमन टीम ने जीत दर्ज की।

कोच ने कहा-हमेेशा सिर्फ भारत की जीत के लिए ही खेलना
गुरुवार को भिलाई पहुंची यशोदा ने बताया जब उनका सलेक्शन सोलापुर से हुआ तो वह कैंप में हिस्सा लेने वाली 45 लड़कियाें में शामिल की गई। इस समय उनके कोच दीपक कुमार ने बस एक ही बात कहीं। जो भी टीम में सिलेक्ट हो उन्हें बस भारत की जीत के लिए ही खेलना है। इसके अलावा कोई बात नहीं सोचना। इसी के आधार पर सभी ने प्रेक्टिस की। जीत हासिल करने पर पूरी टीम ने वहीं खुशियां मनाई। यशोदा ने 2004 में पहला मिनी नेशनल खेला। इसके बाद वह आगे बढ़ती गई। हालांकि उस समय खो-खो में बहुत कम खिलाड़ी जाना चाहते थे। यशोदा ने अपना ध्येय बनाए रखा। जिसके बाद वह हर प्रतियोगिता में अपना स्थान बनाती रही। उनकी इस उपलब्धि से पिता घनाराम साहू व माता लता साहू बेहद खुश हैं। यशोदा के भिलाई पहुंचते ही उनका स्वागत किया गया।

टीम ने पूरे देश का नाम रौशन किया
टीम की सफलता से प्रदेश सहित पूरे देश का नाम रौशन हुआ है। इंडोर स्टेडियम में जूते पहनकर मैच खेला गया। जिसमें भी खिलाड़ियों ने बेहतर प्रदर्शन किया। दीपक कुमार, इंटरनेशनल कोच खो खो टीम

भिलाई की खिलाड़ी यशोदा साहू के दुर्ग स्टेशन पर उसका स्वागत करने सैकड़ों लोग पहुंचे थे।

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