आंसर रटने के बजाय समझने पर करें ज्यादा फोकस
केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 10वीं की परीक्षा में ग्रेडिंग सिस्टम से पहले ही तनाव कम हो चुका है। अब सिर्फ अच्छे नंबर की फिक्र ही रह गई है। ऐसे में एक-एक नंबर की व्यवस्था करना आसान है। बस, थोड़ी सी सावधानी और लगन से लक्ष्य को हासिल करना संभव है। 70 प्रतिशत से अधिक नंबर लाने की सोच रखने वालों को पिछले साल 10वीं की परीक्षा में 95 प्रतिशत नंबर लाने वाले डीपीएस दुर्ग के केशव टिप्स दे रहे हैं। केशव का कहना है कि जो स्टूडेंट एग्जाम के पहले फोकस करते हैं, वह कामयाबी में कहीं न कहीं चूक जाते हैं। क्योंकि गाइड और दूसरों के नोट्स पर निर्भरता होती है। इसलिए खुद के नोट्स को पढ़ें। इससे एग्जाम रूम में प्रश्नों के भूलने का खतरा नहीं रहता। सभी सवालों को आसानी से हल किया जा सकता है। खास यह कि प्रश्नों को रटने के बजाय समझने पर फोकस करें। एक-एक लाइन को याद करने वालों के साथ यह दिक्कत होती है कि इम्तिहान देते वक्त प्रश्न भूल जाते हैं। इससे बचने के लिए रटना बंद करें और समझना शुरू करें। यही फॉर्मूला नंबर का ग्राफ बढ़ाएगा। दिनभर किताबों से जूझने के बजाय टाइम टेबल बनाएं और सब्जेक्ट व चैप्टर के हिसाब से पढ़ाई करें। इसी से टाइम बचेगा और गहराई से सब्जेक्ट पर पकड़ होगी। ऐसा न करने से पूरा समय एक ही सब्जेक्ट या विषय पर लगाना पड़ सकता है। जिससे परीक्षा के लिए सही ढंग से तैयारी नहीं हो पाती है।
अच्छे नंबर चाहिए तो परीक्षा की तैयारी के लिए इन बातों का भी रखें ध्यान
राइटिंग को अच्छी रखें
प्रश्नों को हल करते वक्त स्टूडेंट्स जल्दबाजी में अपनी राइटिंग का ख्याल नहीं रख पाते हैं। ऐसे में एक पैरा लिखते वक्त कई बार कट के निशान लगते हैं। इससे कॉपी गंदी लगती है और परीक्षक नंबर कम देते हैं। इसलिए प्रश्नों को लिखने की प्रैक्टिस करें ताकि तय समय में पूरा किया जा सके। कांसेप्ट क्लियर रखते हुए थोड़ा कम भी लिखने से काेई दिक्कत नहीं।
इन बातों का भी रखें ख्याल
पेपर हाथ में लेते ही पढ़ना शुरू करें। पेपर पढ़ने के लिए 15 मिनट मिलता है। इसी समय में ही यह काम पूरा करने से आगे समय की बचत होगी ।
उत्तर नहीं आ रहा है तो छोड़ दो। नकल का सहारा न लें। नकल करते पकड़े गए तो कॅरियर चौपट होगा। एक सवाल न लिखने से कुछ नंबर का नुकसान ही होगा ।
गाइड से न पढ़ें, अपने बनाए नोट्स का लगातार रिवीजन करते रहें।
अनसाल्व पेपर को साल्व करें।
रातभर झूमे नहीं, भोर में उठें
केशव बताते हैं कि परीक्षा के समय स्टूडेंट्स घर वालों के दबाव में रातभर बैठकर किताबों से जूझते रहते हैं। नींद और थकान से उनको कुछ समझ में आता तक नहीं। घर वालों के प्रेशर में वह पूरी रात जागकर बीता देते हैं। और जब पढ़ने का वक्त आता है तो नींद में होते हैं। इसलिए अब शेड्यूल बदल दें। रात 11 बजे तक पढ़ने के बाद सो जाएं और भोर में 5 बजे तक बेड छोड़ दें। सुबह के वक्त पढ़ने से कांसेप्ट क्लियर होगा।
मेरिट स्टूडेंट 2015
केशव