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अब खराब टीवी या मोबाइल से नुकसान डिस्मेंटल करना जरूरी

7 वर्ष पहले
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अबखराब इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण को खुले स्थान में फेकना अपकों भारी पड़ सकता है। क्योंकि इस पर पर्यावरण मंडल की नजर है। अगर ऐसा करता कोई पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। पर्यावरण मंडल ने अलर्ट किया है कि ऐसे उपकरणों को खुले स्थान में रखने या फेंकने से पर्यावरण लोगों को नुकसान है।

यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। इसके लिए खराब उपकरणों को डिस्मेंटल करना होगा या फिर रिसाइक्लर्स। इसकी जिम्मेदारी पर्यावरण मंडल ने ई-वेस्ट प्राधिकृत यूनिट सोमनी में नवरचना रिसाइक्लिंग प्राइवेट लिमिटेड को दिया है। यहां खराब उपकरणों को डिस्मेंटल किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के प्रावधानों के तहत भारत सरकार ने ई-वेस्ट के प्रबंधन हथालन के लिए 2011 में नियम बनाया है। इसके तहत सभी खराब उपकरणों को नष्ट किया जाना है।

पर्यावरण मंडल ने इसके लिए सभी औद्योगिक, व्यवसायिक और इलेक्ट्रॉनिक सामान के विक्रेताओं को पत्र लिखा है। उनसे जानकारी मांगी जा रही है कि उन्होंने खराब उपकरणों का क्या किया? अभी किस हालात में है? और आगे क्या करेंगे? महीने भर के भीतर में इसकी जानकारी मांगी गई है। इसके बाद पर्यावरण मंडल द्वारा इसका समाधान निकाला जाएगा। मंडल की प्लानिंग तो यह भी है कि सभी ई-वेस्ट यानी कि खराब उपकरणों को एक साथ सोमनी स्थित रिसाइक्लिंग यूनिट भेजा जाए, ताकि वहां उपकरणों को डिस्मेंटल किया जाए।

इनखराब उपकरणों को करना होगा डिस्मेंटल : जानकारीके अनुसार सेंट्रलाइज्ड डेटा प्रोसेसिंग उपकरण, मेन फ्रेम, मिनी कंप्यूटर, पर्सनल कंप्यूटर, उसके डिवाइस, लैपटॉप, नोटबुक, कार्टेज, फैक्स मशीन, टेलीफोन, सेल्युलर टेलीफोन, आंसरिंग सिस्टम, टेलीविजन सेट, रेफ्रीजरेटर, टाइपराइटर्स समेत अन्य उपकरण शामिल है।

क्यों कर रहे हैं ऐसा, जानिए...

छगपर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी अजय गेड़ाम ने बताया कि लगातार इलेक्ट्रॉनिक्स इलेक्ट्रिकल सामान खराब हो रहे हैं। इन उपकरणों में रसायन की मात्रा भी पाई जाती है। जो लोगों के लिए नुकसान दायक है। इसलिए ई-वेस्ट जनरेट हो, उन्हें डिस्मेंटल और रिसाइक्लिंग किया जा रहा है। यह अनिवार्य है।