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स्वाइन फ्लू से मौत, आप रहें अलर्ट

6 वर्ष पहले
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कैसे और क्यों जरूरी है मास्क

स्वाइनफ्लू से गुरुवार को बोरसी के वृंदानगर निवासी एक युवा शिक्षक की मौत हो गई। शहर में इस बीमारी से मौत का यह पहला प्रकरण है। वहीं उसके पास ट्यूशन पढ़ने वाली छात्रा को संदेह के आधार पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसमें से मृतक के स्वाइन फ्लू से पीड़ित होने की पुष्टि हो चुकी है और छात्रा का ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजा गया है। छात्रा भी वृंदानगर निवासी है। विडंबना यह है कि बीमारी जिले में बढ़ती जा रही है, लेकिन अभी भी जिला प्रशासन कई जरूरी कदम नहीं उठा सका है।

परिजनों के अनुसार दुर्ग नगर निगम के वार्ड 51 बाेरसी के वृंदानगर निवासी 27 वर्षीय देवेंद्र साहू बोरसी चौक में कोचिंग सेंटर चलाता था। उसे सिर दर्द, बुखार निमोनिया की शिकायत होने पर ढिल्लन नर्सिंग होम ले जाया गया। जहां से उसे 4 फरवरी को सेक्टर 9 हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया था। जहां स्वाइन फ्लू का संदेह होने पर उसका ब्लड सैंपल जांच के लिए दिल्ली भेजा गया था। दिल्ली से आई रिपोर्ट में ही उसे स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो गई थी। उसका सेक्टर 9 हॉस्पिटल के आईसीयू में ही इलाज चल रहा था। लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका और गुरुवार को सुबह 12 बजे उसकी मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि देवेंद्र के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। एक दुधमुंहा बेटा है और दो साल की बेटी है। उसका बोरसी चौक में कोचिंग सेंटर है। जहां पर पढ़ने वाली 14 वर्षीय छात्रा को भी स्वाइन फ्लू होने का संदेह जाहिर किया जा रहा है। उसकी भी तबीयत ज्यादा खराब होने पर गुरुवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां अलग से बनाए गए वार्ड में उसे रखा गया है। अब तक सिर्फ उसका ब्लड सैंपल ही लिया गया है। हमेशा की तरह अस्पताल प्रबंधन इलाज के लिए रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहा है। गुरूवार को कुछ और मामले सामने आए हैं।

जिला अस्पताल में कमरा नंबर 10 को बनाया स्वाइन फ्लू वार्ड

स्वाइन फ्लू का शहर में स्टेटस

{अब तक तीन की सैंपल रिपोर्ट पॉजििटव आई है। सभी मामले सेक्टर-9 से जुड़े। उनमें से एक की गुरुवार को मौत।

{गुरुवार को ही तीन संदिग्ध सामने आए। जिसमें बीएसपी कर्मचारी और डॉक्टर भी शामिल हैं।

{अब तक 10 सैंपल जांच के लिए दिल्ली भेजे जा चुके हैं। इनमें से तीन मामले निजी अस्पतालों में से जुड़े हैं। गुरुवार को 4 सैंपल भेजे गए।

फिलहाल 400 वैक्सीन उपलब्ध, सवाल ये कि क्या यह पर्याप्त ...

छत्तीसगढ़हेल्थ सर्विस ने स्वाइन फ्लू से निबटने के लिए 1300 वैक्सीन मंगवाए थे। जिसमें से 300 वैक्सीन जिला अस्पताल और 100 दवाइयां सेक्टर-9 हॉस्पिटल को प्रदान की गई है। मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. आरके देवांगन ने बताया कि स्वाइन फ्लू के सामान्य मरीज को एक दिन में 1 और गंभीर मरीज को 2 गोली दी जाती है। सात दिन का कोर्स मरीज को दिया जाए तो एक मरीज के पीछे 7 से 14 गोली खत्म हो जाती है। फिलहाल जिस तेजी के साथ शहर में स्वाइन फ्लू के संदिग्धों की संख्या बढ़ रही है। उसको देखते हुए इसे पर्याप्त नहीं माना जा सकता।

बारिश से ताकतवर हुए वायरस ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत

{भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें, जाएं तो मुंह-नाक ढंककर रखें।

{ हाथों को साबुन से या हैंड वॉश से न्यूनतम 20 सेकेंड तक धोएं।

{ हाथों को साबुन से या हैंड वॉश से न्यूनतम 20 सेकेंड तक धोएं।

{ व्यक्ति जिनमें स्वाइन फ्लू के लक्षण दिख रहे हों, उनसे दूरी बनाकर रखें। हाथ मिलाएं, दूर से नमस्ते करें।

सेक्टर-9 अस्पताल में भर्ती दोनों मरीज हुए डिस्चार्ज

सेक्टर9 हॉस्पिटल में भर्ती तीन मरीजों के स्वाइन फ्लू की रिपोर्ट पॉजीटिव चुकी है। जिसमें से एक देंवेद्र साहू की गुरुवार को मौत हो गई। एक बीएसपी कर्मी मरीज संजय कुमार को पहले ही डिस्चार्ज किया जा चुका है और गीत धरनी को गुरुवार को छुट्टी दे दी गई। इधर निजी अस्पतालों में भी स्वाइन फ्लू के मरीज पहुंच रहे हैं। हालांिक अस्पताल प्रबंधन गोपनीयता का हवाला देकर इसके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे रहे। लेकिन तय है कि मरीजों के आंकड़े बढ़े हैं।

केंद्रीय मंत्रालय का निर्देश जारी पहले स्टाफ का करें बचाव

केंद्रीयस्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बुधवार को सभी स्वाइन फ्लू प्रभावित राज्यों के लिए निर्देश जारी किया है। जिसमें स्वास्थ्य विभाग को पहले अपने स्टाफ को स्वाइन फ्लू से बचने वैक्सीन लगाने कहा है। ताकि मरीज का इलाज करते वक्त वे स्वयं संक्रमित हो जाएं और उनके द्वारा इलाज किए जा रहे दूसरे मरीज को स्वाइन फ्लू हो। इसके लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को फंड भी देने का आश्वासन दिया है। कहा गया है कि मामले में हरसंभव मदद दी जाएगी।

प्रचार-प्रसार, ही यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू की गई है..

अबतक यह माना जा रहा था कि शायद स्वाइन फ्लू से किसी की मौत होने के बाद ही जिला प्रशासन की नींद टूटेगी। लेकिन गुरुवार को जिले में स्वाइन फ्लू से हुई पहली मौत के बाद भी जिला प्रशासन हरकत में नहीं आया है। प्रशासन ने तो स्वाइन फ्लू को लेकर किसी तरह का प्रचार-प्रसार शुरू किया है। ही बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर बाहर से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग शुरू की गई है। जबकि संक्रमण की संभावना बनी हुई है। जिनके माध्यम से इस बीमारी के दुर्ग में प्रवेश की पूरी संभावना बनी हुई है। जबकि रायपुर में यह शुरू किया जा चुका है।

भिलाई-दुर्ग में स्वाइन फ्लू को रोकने ये दावा किया जा रहा

सिविलसर्जन डॉ. जेपी मेश्राम ने बताया कि स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए जिला अस्पताल में कमरा नं 10 निर्धारित किया गया है। अलग थलग इस वार्ड को इसलिए चुना गया है ताकि इसका संक्रमण दूसरे मरीजों तक नहीं पहुंचे। मरीज के इलाज के लिए टेमी फ्लू वैक्सीन सहित अन्य जीवन रक्षक दवाइयों की पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है। सांस लेने में तकलीफ होने पर मरीज को लगाने के लिए अंबू बैग, ऑक्सीजन आदि तैयार रखा गया है। मरीज अस्पताल स्टाफ के लिए मास्क सहित पूरा किट उपलब्ध करा दिया गया है। वाइल ट्रांसपोर्टर मीडिया सेल का गठन किया गया है।

{स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए सामान्य मास्क कारगर नहीं होता, लेकिन थ्री लेयर सर्जिकल मास्क को 4 घंटे तक और एन-95 मास्क को 8 घंटे तक लगा सकते हैं।

{मास्क मिले तो मलमल के साफ कपड़े की चार तहें बनाकर पर बांधें। इसे धोकर दोबारा भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

{खांसी या जुकाम होने पर मास्क पहनें।

{थ्री लेयर सजिर्कल मास्क : 10से 12 रुपये

{एन-95: 100से 150 रुपये

रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर स्क्रीनिंग के लिए अफसरों से बात करेंगे

{ अब तक स्वाइन फ्लू के कितने मरीज मिल हैं। {{ अभी तक हमारी तरफ से 6 सैंपल भेजा जा चुके हैं। प्राईवेट अस्पताल भी अपनी तरफ से सैंपल भेज रहे हैं। मेरी जानकारी में तीन सैंपल पॉजीटिव आए हैं।

{ गुरुवार को जिसकी मौत हुई क्या वह स्वाइन फ्लू से पीड़ित था। {{ हां उसकी रिपोर्ट पॉजीटिव आई थी।

{ एक की मौत हो गई, दो अन्य रिपोर्ट पॉजीटिव गई इसे रोकने के लिए क्या कर रहें हैं। {{ जिला अस्पताल में पूरी व्यवस्था कर ली गई है। संदिग्ध मरीज को अलग वार्ड में रखा जा रहा है। टेबलेट भी रखी गई है।

{ ये तो स्वाइन फ्लू हो चुके मरीज की इलाज करने के लिए है। मेरा सवाल है कि नए केस आएं इसके लिए क्या किया जा रहा हैं। {{ नए केस तो आएंगे ही। अगर आप देखेंगे तो जितनी भी रिपोर्ट पॉजीटिव रही है। वे मरीज बाहर से ही संक्रमित हुए हैं। आज जिसकी मौत हुई है उसके घर पर भी कुछ दिन पहले जमशेद पुर से कोई आया था। संभवत: उसी से इसे स्वाइन फ्लू का संक्रमण पकड़ा था।

{ क्यों नहीं रोका जा सकता। क्या रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड में बाहर से आने वालों की स्क्रीनिंग करके पता नहीं लगाया जा सकता। {{ हां सही कह रहे हैं आप ऐसा किया जा सकता है। मै उच्च अधिकारियों से चर्चा करुंगा इस बारे में।

{ लोगों के संपर्क में रहने वाले स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के लिए एंटी स्वाइन फ्लू वैक्सीन लगाना। { रेलवे स्टेशन बस स्टैंड में स्क्रीनिंग डेस्क शुरू करना { कॉलोनियोंं में जाकर कर्मचारी सर्वे कर पता करें कि अगर कोई बीमार है तो उसकी बीमारी के लक्षण क्या हैं। कहीं उसे स्वाइन फ्लू तो नहीं। { लोगों काे जागरूक करने के लिए टोल फ्री नंबर जारी कर प्रचार-प्रसार करना। { स्वाइन फ्लू के मरीजों को सांस लेने में तकलीफ होने पर पर्याप्त संख्या में वेंटिलेटर की व्यवस्था।

जिला अस्पताल में अन्य जरूरी सुविधाओं की तैयारी पूरी करने का दावा किया जा रहा है।