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वर्ष 2014 के बाद से एचआरए में नहीं जुड़ रही इंक्रीमेंट राशि

5 वर्ष पहले
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बीएसपी कर्मियों के एचआरए भुगतान में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। जनवरी 2014 के बाद से कर्मियों को भुगतान किए जा रहे एचआरए में इंक्रीमेंट की राशि नहीं जोड़ी जा रही है। जिससे प्रत्येक कर्मी को हर महीने औसतन 3 सौ से 8 सौ रुपए का नुकसान हो रहा है।

सेल में वेज रिवीजन के बाद अब तक एचआरए की नई पॉलिसी का निर्धारण नहीं हुआ है। वेज रिवीजन के लिए 25 जनवरी 2014 को प्रबंधन व एनजेसीएस सदस्य यूनियनों के बीच हुए एमओयू में दिसंबर तक इसे निर्धारित करने का समय दिया गया था। इसके लिए एनजेसीएस की सब कमेटी का गठन भी किया गया। कमेटी की बीते डेढ़ साल में पांच बैठक हो चुकी है लेकिन मामले का निराकरण नहीं हुआ है। इसके चलते कर्मियों को पुराने बेसिक का ही 20 प्रतिशत एचआरए भुगतान किया जा रहा है।

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एचआरए के लिए केटेगरी
एनजेसीएस सदस्य यूनियनें मांग रहीं नए बेसिक का एचआरए
वेज रिवीजन के बाद एचआरए इसलिए तय नहीं हो पा रहा है कि एनजेसीएस सदस्य यूनियनें और प्रबंधन के बीच इसे लेकर मतभेद हैं। प्रबंधन नए बेसिक का 10 प्रतिशत एचआरए देने का प्रस्ताव रखा है। वहीं सदस्य यूनियनें नए बेसिक का 20 फीसदी दिए जाने की मांग कर रही हैं। जबिक अभी पुराने बेसिक पर एचआरए मिल रहा है। इस दौरान सब कमेटी इतना ही तय कर पाई कि जब भी एचआरए पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा, उसका क्रियान्वयन जुलाई 2014 से किया जाएगा।

डेपुटेशन वाले कर्मचारी फायदे में
बीएसपी कर्मियों में केवल उन्हें बेसिक का 20 प्रतिशत एचआरए के साथ 10 फीसदी अतिरिक्त भुगतान किया जा रहा है जिन्हें कंपनी के कामकाज के लिए डेपुटेशन पर अन्य शहर में पदस्थ किया गया है। बताया गया कि एचआरए के लिए निर्धारित सिटी क्लासिफिकेशन के अनुसार भिलाई वाई केटेगरी में आता है। इस हिसाब से यहां के कर्मियों को बेसिक का 20 प्रतिशत भुगतान किया जाना है लेकिन डेपुटेशन पर गए कर्मियों को 30 प्रतिशत एचआरए दिया जा रहा है। हालांकि इसे लेकर प्रबंधन का तर्क यह है कि 30 प्रतिशत एचआरए उन्हीं कर्मियों को दिया जा रहा है जिन्हें एक्स केटेगरी वाले शहर में भेजा गया है।

भुगतान में नहीं जोड़ा जा रहा इंक्रीमेंट
प्रबंधन की ओर से पुराने बेसिक पर 20 प्रतिशत एचआरए का भुगतान किया जा रहा है। इस्पात श्रमिक मंच के मुताबिक प्रबंधन जनवरी 2014 तक हर साल दिए जाने वाले इंक्रीमेंट को बेसिक के साथ जोड़ कर एचआरए का भुगतान कर रहा था। वेज रिवीजन समझौता जनवरी 2012 से लागू हुआ। उसके बाद दो साल तक एचआरए का भुगतान उसी पैटर्न पर किया गया लेकिन उसके बाद मिले इंक्रीमेंट को बेसिक के साथ नहीं जोड़ा गया। इससे प्रत्येक कर्मियों को ग्रेड अनुसार 300 से 800 रुपए कम एचआरए मिल रहा है। इन आंकड़ों की तुलना करें तो बीते दो साल में हर कर्मियों 15-20 हजार रुपए का नुकसान हो रहा है।

एचआरए के भुगतान में गड़बड़ी की जा रही है। बीते दो साल के दौरान कर्मियों को मिले इंक्रीमेंट को बेसिक में शामिल किए बिना एचआरए का भुगतान किया जा रहा है। जिससे कर्मियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। यदि पूर्व में इंक्रीमेंट को बेसिक से जोड़ कर दिया जा रहा था तो बीते दो साल से ऐसा क्यों किया जा रहा है, इसे लेकर प्रबंधन से जल्द ही मिला जाएगा। सर्वजीत सिंह, उप महासचिव, इस्पात श्रमिक मंच

प्रबंधन ने क्यों बदली नीति इस पर करेंगे बात
जेड क्लास 5 लाख से कम

10 प्रतिशत

वाई क्लास 5 लाख से 50 लाख तक

20 प्रतिशत

एक्स क्लास 50 लाख और उससे अधिक

30 प्रतिशत

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