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उत्पादन बढ़ा, टर्नओवर भी बढ़ गया, लेकिन कर्ज इतना कि लाभ के आंकड़े जस के तस

4 वर्ष पहले
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अप्रैल, मई और जून में हुए सेल के कारोबार से यह तथ्य आए सामने

सिटी रिपोर्टर| भिलाई

चीन पर अघोषित बैन लगाने के बाद देश के स्टील कारोबार में 4.3 प्रतिशत इजाफा हुआ। यानि 24.73 एमटी क्रूड स्टील प्रोडक्शन बढ़ा। अप्रैल, मई और जून के कारोबारी आंकड़ों से यह साबित हुआ है।

स्टील इंडस्ट्री के लिए बेहतर दिन आते दिख रहे। लेकिन स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सितारे अब भी गर्दिश में हैं। मई से जून तक की तिमाही में तकरीबन 5 हजार करोड़ का घाटा हुआ है, जिसकी रिपोर्ट अभी पेश नहीं की गई है। इसी तरह भिलाई स्टील प्लांट का भी घाटा इस तिमाही में करीब 200 करोड़ बताया जा रहा। हालांकि इसकी भी अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सेल के घाटे के चलते प्राॅफिट का ग्राफ तेजी से नीचे गिर रहा। इसकी मुख्य वजह बैंकों से लिया गया कर्ज है। 72 हजार करोड़ रुपए सेल ने इस्को बर्नपुर, राउरकेला, भिलाई स्टील प्लांट के एक्सपांशन प्रोजेक्ट में खर्च किया है। इतनी भारी रकम की अदायगी के लिए सेल को हर महीने करोड़ों रुपए कर्ज के रूप में अदा करना पड़ रहा। इतना ही नहीं, सैलरी आदि व्यवस्थाओं के लिए भी कर्ज भी 6 हजार करोड़ से ज्यादा हो चुका है। बैंक को यह रकम सेल द्वारा वापस की जानी है।

मंत्रालय का टार्गेट स्टील की खपत दोगुना करने का

इस्पात मंत्रालय ने स्टील की खपत को दोगुना करने का टार्गेट तय किया है। सरकारी कंस्ट्रक्शन में सेल के ही स्टील लगाने का निर्देश जारी हो चुका है। वहीं, नेशनल स्टील पॉलिसी भी घोषित की जा चुकी है। साल 2030 तक 300 एमटी स्टील प्रोडक्शन का लक्ष्य रखा गया है।

खपत 4.6 प्रतिशत और एक्सपोर्ट 66% बढ़ा
प्रति व्यक्ति स्टील खपत 60 किलो के टार्गेट को हासिल करने की दिशा में स्टील इंडस्ट्री बढ़ रही है। स्टील की खपत 4.6% और एक्सपोर्ट 66% बढ़ा है। अप्रैल से जून 2016 की तुलना में इस बार 66 % स्टील प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट किया गया इंपोर्ट अप्रैल, मई जून 2016 में 1.715एमटी था।

क्या कह रही ज्वाइंट प्लांट कमेटी रिपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक जून तिमाही में स्टील आउटपुट में इजाफा हुआ। 24.73 मिलियन टन क्रूड स्टील प्रोडक्शन पिछले साल से ज्यादा है। साल 2016 के तिमाही में 23.71 एमटी प्रोडक्शन हुआ था। जून 2016 में 8.03 एमटी प्रोडक्शन था, जो बढ़कर 8.29 एमटी हो चुका है।

फिनिश्ड स्टील कारोबार में इजाफा हुआ 6.7%
ज्वाइंट प्लांट कमेटी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कुल फिनिश्ड स्टील प्रोडक्शन का बाजार बढ़ा है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार ज्यादा प्रोडक्ट की मांग रही। यह 6.7% बढ़ी है। वर्ष 2016 में अप्रैल से जून तक 26.30 एमटी ही फिनिश्ड प्रोडक्ट की बिक्री हुई थी, जो इस बार 6.7% ज्यादा है। इस साल के मई में दो फीसदी गिरावट भी हुई। 8.82 एमटी प्रोडक्शन रहा।

डायरेक्टर ने कहा- संभल जाएं, वरना सैलरी में कटौती
सेल के डायरेक्टर फाइनेंस अनिल चौधरी की रिपोर्ट में सभी सीईओ व ईडी, जीएम को पत्र लिखकर कटौतियों के प्रति अगाह किया जा चुका है। कैश लेन-देन व बजट पर मंथन करने को कहा गया है। स्थिति को संभालने की हिदायत दी गई। अन्यथा फंडिंग के सोर्स बैंक व इंवेस्टर से भी पैसा लेना मुश्किल होगा। जिसका खामियां कार्मिकों को ही उठाना पड़ेगा।

सेल पर कर्ज है कुल 38,836 करोड़ रुपए
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) बैंक व इंवेस्टर का कर्जदार है। सेल की सेंट्रल मार्केटिंग आर्गनाइजेशन का कहना है कि कैश एमाउंट के रूप में जनवरी 2017 में 2964 करोड़ ही मिले हैं। वहीं, खर्च अकेले कोल की खरीदी पर 2300 करोड़ और सैलरी आदि में 2500 करोड़ रुपए खर्च किए गए। 31 मार्च 2016 में सेल का कर्ज जहां 33217 करोड़ था। वहीं 31 जनवरी 2017 में 38836 करोड़ पहुंच चुका है। एक साल में ही सेल पर 5649 करोड़ का कर्ज अतिरिक्त बढ़ा है। सर्विस कवरेज आैर लोन बकाया चुकता करने के लिए सेल को कर्ज लेना पड़ रहा है। यानी कर्ज अदा करने में भी फ्रेश कर्ज को सेल विवश है।

बीएसपी फायदे में, लेकिन कर्मचारियों को नहीं मिल रहा है उसका लाभ
सर्विस कवरेज और बकाया लोन चुकान के लिए भी सेल को बैंक से लेना पड़ रहा है अलग से करोड़ों रुपए कर्ज

72 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए एक्सपांशन में
10 हजार करोड़: सेल की माइंस पर खर्च

17 हजार करोड़ बीएसपी एक्सपांशन पर रहा खर्च

72 हजार करोड़ एक्सपांशन पर कुल खर्च

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