- Hindi News
- हिन्दी को सम्मान दें तभी होगा राष्ट्रीयता का विकास : मिश्र
हिन्दी को सम्मान दें तभी होगा राष्ट्रीयता का विकास : मिश्र
पदुमलालपुन्नालाल बख्शी सृजनपीठ में हिंदी दिवस पर छत्तीसगढ़ के साहित्यकार विषय पर गोष्ठी हुई। अध्यक्षता सृजनपीठ छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष आचार्य रमेंद्रनाथ मिश्र ने की। उन्होंने छत्तीसगढ़ की विभूति डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र, गजानन माधव मुक्तिबोध, पदुमलाल बख्शी जैसे साहित्यकारों पर हमें गर्व है। उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि वे आज हिंदी में अपना हस्ताक्षर करने का संकल्प लें। व्यवहार में हिंदी को सम्मान दें, तभी राष्ट्रभाषा राष्ट्रीयता का विकास होगा। इससे राष्ट्रवादी चिंतन उन्नत होगा। हम साल में एक बार कोई दिवस मनाकर मौन रहें बल्कि मुखरित होकर परिवार, समाज और राष्ट्र का सम्मान करें। मुख्य वक्ता डॉ. नलिनी श्रीवास्तव ने कहा कि हिंदुस्तान को अपनी भाषा पर गर्व करे। मुक्तिबोध ऐसे साहित्यसेवी थे, जिन्होंने समर्पण भावना से हिंदी की सेवा की। सरला शर्मा ने कहा कि राजशाही, नौकरशाही के चंगुल से निकलकर हिंदी बाहर गई है। कथाकार शिवनाथ शुक्ल ने कहा कि हिंदी स्वतंत्रता संग्राम को चिंगारी देने वाली भाषा है, जिसने पूरे हिंदुस्तान को एक सूत्र में पिरो दिया। कार्यक्रम को डॉ. संजय दानी, तमिल भाषी हिंदी कवि आर मुत्थुस्वामी, शानू मोहनन ने दक्षिण भारत में हिंदी के बढ़ते प्रसार पर विचार रखे। छात्रा दिवी कविता पेश की। आभार प्रदर्शन नरेश विश्वकर्मा ने किया। मौके पर साहित्यकार रतनलाल सिन्हा, प्रदीप वर्मा, डॉ. नरेंद्र कुमार देवांगन, राजाराम रसिक, जगदीश राय गुमानी, ओमप्रकाश जायसवाल, डॉ. किशोर श्रीवास्तव, इंद्रेश साहू, गणेश कुमार गंधर्व, बीरेंद्र कुमार तिवारी आदि मौजूद थे।
आईएमए भवन में हिन्दी दिवस मनाने के लिए जुटे साहित्यकार अन्य।
आईएमए भवन में हिन्दी दिवस पर संबोधित करते मुकुंद कौशल अन्य कवि।